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2000 के बाद से सबसे बदकिस्मत रहे 5 भारतीय क्रिकेटर

टॉप 5 / टॉप 10
24.65K   //    17 Feb 2019, 15:10 IST

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भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई महान क्रिकेटर रहे हैं जिन्होंने अपने प्रदर्शन के दम पर क्रिकेट इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों से लिख दिया है। भारतीय टीम में हर दशक मे कम से कम एक सुपरस्टार रहा हैं।

कपिल देव और सुनील गावस्कर जैसे खिलाड़ियों ने 80 के दशक में अपनी धाक जमाई जबकि सचिन, द्रविड़ और गांगुली ने 1990 के दशक में अपनी बल्लेबाज़ी का लोहा मनवाया। 

वर्तमान में धोनी, कोहली और रोहित भारतीय टीम के स्टार खिलाड़ी हैं। पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने 2000 की शुरुआत में मैच फिक्सिंग कांड के बाद भारतीय टीम की कमान संभाली थी, उन्होंने अपनी कप्तानी में भारतीय टीम को एकजुट किया, इस टीम ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और कई रिकॉर्ड भी अपने नाम किये। 'दादा' के बाद धोनी ने भारतीय टीम की कप्तानी संभाली और भारत के सफलतम कप्तान बने।

2000 के बाद से कई क्रिकेटरों ने विभिन्न कप्तानों के नेतृत्व में खेला है। हालाँकि, 2000 के बाद कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपना पर्दापण किया लेकिन लेकिन उन्हें पर्याप्त मौके ना मिलने की वजह से उनका उनका क्रिकेट करियर लगभग खत्म होने की कगार पर आ गया।

तो आइये जानते हैं ऐसे 5 क्रिकेटरों के बारे में:

#5. अमित मिश्रा

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अमित मिश्रा सबसे अंडर-रेटेड भारतीय स्पिनरों में से एक हैं। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 500 से अधिक विकेट, और सूची 'ए' क्रिकेट में 242 विकेट लिए हैं। लेकिन उन्हें भारतीय टीम की ओर से खेलने के सीमित मौके ही मिले हैं। मिश्रा ने 2003 में अपने वनडे करियर की शुरुआत की थी लेकिन एक दो मैच खेलने के बाद ही उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा।

यह ऐसा समय था जब भारत के शीर्ष दो स्पिनर- हरभजन सिंह और अनिल कुंबले अपनी फॉर्म में थे और भारत के नियमित स्पिनर थे।

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इसलिए हरियाणा में पैदा हुए इस स्पिनर के लिए टीम में जगह बना पाना बहुत मुश्किल था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने पदार्पण के पांच साल बाद, आखिरकार उन्हें 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने का मौका मिला, वो भी तब जब अनिल कुंबले को चोटिल होने के कारण मैच से बाहर होना पड़ा था।

मिश्रा ने अपने टेस्ट करियर की अच्छी शुरुआत की और अपने पहले ही मैच में पांच विकेट लिए थे। उसी वर्ष कुंबले के रिटायर होने के साथ, उनके लिए खुद को स्थापित करने का यह एक अच्छा अवसर था। लेकिन विविधताओं की कमी और अनियमित प्रदर्शन के कारण उनकी जगह टीम में जडेजा और अश्विन जैसे युवा स्पिनरों को तरजीह दी गई।  

तब से, मिश्रा टीम से बाहर हैं और उनका करियर लगभग खत्म होने की कगार पर है। अगर उन्हें आज से तीन-चार पहले खेलने के ज़्यादा मौके मिले होते तो शायद वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को अच्छी तरह से स्थापित कर लेते।

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