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5 भारतीय विकेटकीपर जिन्होंने 10 से कम टेस्ट खेले

Modified 28 Nov 2017, 17:17 IST
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महेंद्र सिंह धोनी के भारतीय टीम में प्रवेश के साथ ही टीम इंडिया की एक स्थाई और भरोसेमंद विकेटकीपर की तलाश खत्म हो गई थी। इससे पहले भारत ने विकेटकीपिंग डिपार्टमेंट में कई खिलाड़ियों को मौका दिया, लेकिन कोई भी लंबे समय तक टीम का हिस्सा नहीं रह सका। 2000 में नयन मोंगिया के जाने के बाद से टीम इंडिया, एक अच्छे विकेटकीपर की तलाश में थी, जो 2004 में धोनी के आने के बाद खत्म हुई। आइए जानते हैं ऐसे 5 विकेटकीपरों के बारे में, जो करियर में 10 टेस्ट भी पूरे नहीं कर सकेः #5 दीपदास गुप्ता (8 टेस्ट) Indian wicketkeeper Deep Dasgupta कोलकाता के दीपदास गुप्ता टीम में बतौर विकेटकीपर बल्लेबाज शामिल हुए थे। वह एक कुशल खिलाड़ी थे। हालांकि, वह अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 8 टेस्ट ही खेल सके। टेस्ट में उनके खाते में 28.66 के औसत के साथ 344 रन दर्ज हैं। उन्होंने 2001 में पदार्पण किया था। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच से उनके करियर की शुरूआत हुई थी। पहले मैच को ध्यान में रखते हुए दीपदास गुप्ता ने संतोषजनक बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया और धुरंधर प्रोटीज बल्लेबाजों के सामने 71 गेंदों में 34 रनों की पारी खेली। पहले टेस्ट के बाद उन्हें ओपनिंग का मौका दिया गया। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने 281 गेंदों में 63 रनों की धैर्यपूर्ण पारी खेली। उनकी सबसे यादगार पारी इंग्लैंड के खिलाफ चंडीगढ़ टेस्ट में निकली, जब उन्होंने करियर का पहला शतक जड़ा। हालांकि, इस घरेलू सीरीज के बाद उन्हें गिने चुने मैचों में मौका दिया गया। पदार्पण के 5 महीने बाद, दीपदास गुप्ता ने जॉर्जटाउन में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट मैच के रूप में अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच खेला।
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Published 28 Nov 2017, 17:17 IST
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