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विदेशी धरती पर भारतीय टेस्ट टीम के 5 सबसे ख़राब बल्लेबाज़ी प्रदर्शन

Rahul Pandey

भारतीय क्रिकेट टीम दुनिया की सबसे अधिक चाही जाने वाली टीमों में से एक है। हालांकि, वे घर से बाहर बहुत सफल नहीं हुए हैं वे अक्सर खुद को अच्छी स्थिति में पहुँचाने के बाद मौके गवा देते हैं,और वे टेस्ट मैच हारने की कगार पर पहुँच जाते हैं। उनमें से कई हार बल्लेबाजी क्रम के लड़खड़ाने से आती हैं। हम अक्सर देखते हैं कि गेंदबाज़ों को विपक्ष को कम स्कोर पर रोकना पड़ता है, और ऐसा करने में वो सफल हो तो गये, लेकिन बल्लेबाजों ने अक्सर गेंदबाजों के प्रदर्शन का साथ नहीं दिया। यहां हम विदेशी जमीन पर टेस्ट मैचों में भारतीय टीम के कुछ सबसे खराब प्रदर्शनों पर नजर डाल रहे हैं:

# 5 डरबन, दक्षिण अफ़्रीका - 1996

66 रन पर दूसरी पारी में आउट
1992 में दक्षिण अफ्रीका के एक ऐतिहासिक दौरे के बाद, भारत ने 1996/97 में फिर से अफ्रीकी देश का दौरा किया। इस बार बहुत ज्यादा उम्मीद थी क्योंकि यह सचिन तेंदुलकर की पहली श्रृंखला थी जो टेस्ट कप्तान के तौर पर घर से बाहर थी।
भारत ने एक सकारात्मक रूप से पहला टेस्ट शुरू किया। एक हरी सतह पर पहले गेंदबाज़ी करने के बाद, भारत ने पहले दिन 235 के स्कोर पर दक्षिण अफ्रीका को आल आउट किया। वेंकटेश प्रसाद ने शानदार गेंदबाजी की और 60 रन देकर 5 विकेट लिये। हालांकि, भारतीय बल्लेबाज गति और उछाल का सामना नहीं कर पाए, और एक गुणवत्ता वाले अफ्रीकी गेंदबाजी आक्रमण ने मात्र 100 रन के अंदर पूरी भारतीय टीम सिमटा दी।
भारतीय गेंदबाजों ने एक बार फिर अच्छी गेंदबाज़ी करते हुए मेजबान टीम को 259 रन पर रोक दिया। लेकिन 395 का लक्ष्य हमेशा भारतीय बल्लेबाजों को परेशान करने वाला था। जवाब में दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाजों ने खतरनाक गेंदबाज़ी का प्रदर्शन करते हुए, केवल 66 रनों पर भारत की पारी सिमटा दी।
पहली पारी की तरह भारतीय बल्लेबाज एक के बाद एक आउट हो जाते रहे, राहुल द्रविड़ (जो 27 पर नाबाद थे) को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज दोहरे अंकों तक नही पहुँच पाया। एलन डोनाल्ड, शॉन पोलॉक और लांस क्लूज़नर ने भारतीय बल्लेबाजी क्रम को निपटाने के लिए सिर्फ 34.1 ओवर लिये और मेजबान टीम को 3 मैचों की श्रृंखला में 1-0 की बढ़त दिला दी।

# 4 ब्रिजटाउन, वेस्टइंडीज़ - 1997

https://youtu.be/RMs22h6GaLo

भारत की पारी लडखडाई और दूसरी पारी में 120 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 81 पर आउट हुई
निराशाजनक दक्षिण अफ्रीका के दौरे के बाद, भारत ने कैरेबियाई दौरे की बहुत अच्छी शुरुआत की। वे ड्रा रहे पहले दो टेस्ट की पहली पारी में 300 से अधिक रन का आंकड़ा पार कर सके थे।
तीसरा टेस्ट ब्रिजटाउन में था और भारत ने घास वाली पिच पर पहले गेंदबाज़ी का फैसला किया था। वेंकटेश प्रसाद ने एक बार फिर प्रभावित करते हुए 82 रन दे 5 विकेट लिये, जिसके चलते भारत ने विंडीज को 298 रन पर समेट दिया था। भारत ने जवाब में बल्ले से अच्छा प्रदर्शन किया था। कप्तान सचिन तेंदुलकर के शानदार 92 और राहुल द्रविड़ की शानदार 78 रनों की परियों के बदौलत भारत ने 319 रन बनाए। भारतीय गेंदबाजों ने एक बार फिर से शानदार गेंदबाज़ी की थी और उन्होंने 140 रन पर मेजबान टीम को ऑल आउट कर दिया था और भारत को 120 रनों के लक्ष्य का पीछा करना था।
लेकिन एक बार फिर बल्लेबाजों ने निराश किया और सिर्फ 81 रन पर पूरी भारतीय टीम ऑल आउट हो गयी और विंडीज को एक यादगार जीत और 1-0 की सीरीज लीड मिली, केवल एक बल्लेबाज (वीवीएस लक्ष्मण) दोहरे आंकड़े तक पहुँच सके। कर्टली एम्ब्रोस, इयान बिशॉप और फ्रैंकली रोज़ ने सभी 10 विकेट लिए। भारत सिर्फ 35.5 ओवर में ऑल आउट हो गया। यह टेस्ट मैच निर्णायक भी साबित हुआ क्योंकि चौथा टेस्ट ड्रॉ हुआ और मेजबान टीम ने 1-0 से शृंखला जीत ली।

# 3 हैमिल्टन, न्यूज़ीलैंड - 2002

भारत पहली पारी में 99 रन और दूसरी पारी में 154 रन पर ऑल आउट 2002 में भारत ने न्यूजीलैंड का दौरा करने से पहले, उस साल 14 में 6 टेस्ट मैच जीते थे। अभ्यास मैच में खराब प्रदर्शन के बाद, भारत ने पहला टेस्ट भी 10 विकेट से गंवाया। हैमिल्टन में एक तेज़ गेंदबाजी के अनुकूल सतह पर, न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाज़ी का चयन किया। पहला दिन बारिश से पूरी तरह से धुल गया था, भारत के बल्लेबाज पहले टेस्ट की दोनो परियों में 200 रन तक पहुंचने में नाकाम रहे थे, श्रृंखला में लगातार तीसरी बार वे नाकाम रहे क्योंकि डेरिल टफी, शेन बॉन्ड और जैकब ओरम ने भारत को सिर्फ 99 रन पर समेट दिया। भारत 40/5 था और ऐसा लग रहा था कि वे ज्यादा देर नहीं खेल पाएंगे। लेकिन वीवीएस लक्ष्मण के 23 और हरभजन सिंह के 20 रन ने भारत को 99 तक पहुँचाया। हालांकि 99 पर सिमटने के बावजूद गेंदबाजों ने भारत की खेल में वापसी करायी और 94 रन पर कीवी टीम को ऑल आउट कर दिया। लेकिन भारतीय बल्लेबाज दूसरी पारी में 154 रनों पर ऑल आउट हो गये थे। न्यूजीलैंड ने 160 के लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रृंखला 2-0 जीत ली।

# 2 पर्थ, ऑस्ट्रेलिया - 2012

भारत ने 161 और 171 रन बनाए 2011/12 में भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे की एक ख़राब शुरुआत रही थी। 2011 में इंग्लैंड में 4-0 से हारने के बाद, भारत श्रृंखला में 2-0 से पीछे (दो टेस्ट के बाद) था। तीसरा टेस्ट वाका (पर्थ) में था। ऑस्ट्रेलिया द्वारा बल्लेबाजी के लिये बुलाये जाने के बाद, भारत ने पहले दिन एक ख़राब शुरुआत की और एक समय 63/4 पर खुद को पाया। लेकिन वीवीएस लक्ष्मण और विराट कोहली के बीच 68 रनों की साझेदारी ने पारी को मजबूत कर दिया। हालांकि, जब कोहली 44 रन पर आउट हो गए, तो फिर विकेटो की पतझड़ लग गयी और 161 रन पर मेहमान टीम आउट हो गयी। चार तेज गेंदबाजों (रायन हैरिस, बेन हिल्फेनहॉस, पीटर सिडल और मिचेल स्टार्क) ने विकेट हासिल किये। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में डेविड वॉर्नर ने 180 रन बनाकर उन्हें 389 के स्कोर तक पहुँचाया।पहली पारी के स्कोर के आधार पर 228 रनों से पीछे खेलते हुए भारतीय बल्लेबाजों की असफलता का दौर जारी रहा और वे दूसरी पारी में भी 171 रन पर ऑल आउट हो गए जिससे ऑस्ट्रेलिया को पारी की विजय मिली और 3-0 से ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज में जीत हासिल की। केवल विराट कोहली ने इस मैच में कुछ संघर्ष दिखाया और उन्होंने दो पारी में 44 और 75 रन बनाए थे।

# 1 ओवल (लंदन), इंग्लैंड - 2014

भारत ने पहली पारी में केवल 148 और दूसरी पारी में केवल 94 रन बनाए 2014 में भारत का इंग्लैंड दौरा एक यादगार दौरा था, जो मुख्य रूप से लॉर्ड्स टेस्ट मैच की जीत के चलते याद रहता है। हालांकि, लॉर्ड्स के मैच (दूसरे टेस्ट) के बाद, सब कुछ भारत के खिलाफ गया। तीसरे टेस्ट में भारत आखिरी दिन खेलने में नाकाम रहा और 178 रन पर ऑल आउट हो गयी। चौथे टेस्ट में एक खराब पहली पारी (152) के बाद, वे तीसरे दिन दो सत्रों तक बल्लेबाजी करने में नाकाम रहे, जिससे उन्हें मदद टेस्ट ड्रा कराने में मदद मिलती क्योंकि तूफान के चलते उस टेस्ट के चौथे और पांचवे दिन के खेल होने की संभावना कम थी। इसके बाद फिर चीजें पांचवीं टेस्ट में और भी खराब हो गईं। इंग्लैंड द्वारा बल्लेबाजी करने के बाद, भारत जिसने पिछले तीन पारियों में 200 रनों का आंकड़ा भी पार नहीं किया था, वह एक बार फिर चूक गया क्योंकि पहली पारी में केवल 148 रन बने थे। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की 82 रन की पारी ने 44/6 से 148 रन तक पहुँचाया था। इंग्लैंड के सभी चार तेज गेंदबाजों ने विकेट लिये क्योंकि उन्होंने नियंत्रण के साथ गेंदबाज़ी की और भारत को भारी दबाव में डाल दिया। जो रूट की नाबाद 149 रन की पारी के बाद इंग्लैंड ने 486 रनों का स्कोर बनाया और 338 रनों की बढ़त हासिल कर ली। भारत को श्रृंखला की आखिरी पारी में कुछ लड़ाई दिखाने की जरूरत थी। लेकिन वह ऐसा नही कर सका और ताश के पत्तों की तरह विकेट गिरते चले गये और सिर्फ 29.2 ओवर में 94 रन बना पूरी टीम पवेलियन लौट गयी। इंग्लैंड ने मैच में पूरी तरह से भारत का सफाया किया और श्रृंखला 3-1 जीती। लेखक: साहिल जैन अनुवादक: राहुल पांडे

Edited by Staff Editor

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