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DRS के 5 ऐसे ख़राब फ़ैसले जिसने मैच का नतीजा बदल डाला

Syed Hussain
ANALYST
Modified 19 Jul 2016, 17:24 IST
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DRS यानी डिसीजन रिव्यू सिस्टम इसका इस्तेमाल किया जाए या नहीं, इसपर अभी भी एक राय नहीं बन पा रही है। भारतीय क्रिकेट टीम DRS  लेने के पक्ष में नहीं है और भारत जिस भी द्विपक्षीय सीरीज़ में खेलता है वहां DRS का इस्तेमाल नहीं होता। आईसीसी के नियमानुसार DRS का इस्तेमाल सीरीज़ में खेल रही टीमों के आपसी सहमति पर ही निर्भर है और जो टीम इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहती, वह इसके लिए आज़ाद है। DRS या UDRS की शुरुआत पहली बार 24 नवंबर 2009 को डुनेडिन में खेले गए न्यूज़ीलैंड और पाकिस्तान के टेस्ट मैच में हुई थी। टेस्ट के बाद वनडे में पहली बार DRS इस्तेमाल में आया था जनवरी 2011 में जब इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थी और फिर 2011 विश्वकप में भी DRS का इस्तेमाल हुआ था। ये पहला मौक़ा था जब भारतीय क्रिकेट टीम ने भी DRS का इस्तेमाल किया था। इस तकनीक का मक़सद ये है कि अगर फ़ील्ड अंपायर से कोई ग़लती हो तो बल्लेबाज़ या फ़ील्डिंग करने वाली टीम DRS का इस्तेमाल करते हुए फ़ैसले को चुनौती दे सके। ताकि क्रिकेट के इस खेल में पारदर्शिता लाई जा सके। तीसरे अंपायर के पास हॉट स्पॉट, हॉक आई, स्निकोमीटर जैसे उपक्रण होते हैं जिससे वह बारीक़ से बारीक़ चीज़ों को देख सकें और फिर उस आधार पर फ़ैसला कर सकें। इन सब चीज़ों के बाद भी DRS आज भी पूरी तरह से सही नहीं कहा जा सकता और यही वजह है कि भारत जैसे कई और देश भी इसके ख़िलाफ़ हैं। आपके सामने DRS के ऐसे 5 ख़राब फ़ैसले हम लेकर आए हैं, जिसने मैच के नतीजे को बदल डाला: #1 नाथन लॉयन: ऑस्ट्रेलिया vs न्यूज़ीलैंड, डे-नाइट टेस्ट, 2015, एडिलेड 3500-1468815023-800 हाल के दिनों में DRS का ये सबसे विवादास्पद फ़ैसलों में से एक है। 2015 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के बीच पहला डे-नाइट टेस्ट खेला जा रहा था, और जिस वक़्त ये फ़ैसला DRS  ने दिया वह मैच का बेहद अहम पल था और DRS के इस फ़ैसले ने मैच के नतीजे पर असर डाल दिया। न्यूज़ीलैंड के बाएं हाथ के स्पिनर मिचेल सांटनर ने राउंड द विकेट गेंद डाली थी, जिसपर नाथन लॉयन ने स्वीप करने की कोशिश की, गेंद बल्ले का ऊपरी किनारा लेते हुए उनके कंधे से टकराई और फिर गली में खड़े फ़िल्डर के हाथों में चली गई। फ़ील्ड अंपायर एस रवि ने इसे नॉट आउट करार दिया, जिसके बाद न्यूज़ीलैंड ने DRS लिया, लेकिन तीसरे अंपायर नाइजल लॉंग ने ये कहते हुए फ़ील्ड अंपायर के फ़ैसले को सही ठहराया कि बल्लेबाज़ को आउट देने के लिए उनके पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं। हॉट स्पॉट पर भी दिख रहा था कि गेंद लॉयन के बल्ले से लगी है, पर नाइजल लॉंग ने उसे नकार दिया और बल्लेबाज़ को नॉट आउट करार दिया। जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने इसका फ़ायदा उठाते हुए बड़ी बढ़त हासिल कर ली और मैच जीत गए।
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Published 19 Jul 2016, 17:24 IST
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