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स्टेडियम में दर्शकों के 6 बुरे बर्ताव, जिससे क्रिकेट शर्मिंदा हुआ

चोटिल माइकल क्लार्क
sehal jain

क्रिकेट जेंटलमैन का खेल है पर कई बार एेसे कुछ पल भी होते थे जो जेंटल नहीं होते थे। काफ़ी बार खिलाड़ी गंदा व्यवहार करते हैं पर दर्शकों ने भी काफ़ी बार बुरा व्यवहार किया है। उन्होंने अपने देश के बोर्ड और टीम को भी शर्मिंदा किया है। हाल ही में श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच हुए ओडीआई में दर्शकों द्वारा की गई हिंसा इसका एक उदाहरण है। यह मामला इतना बढ़ गया कि सुरक्षा बल को बीच बचाव करना पड़ा। इसी कारण स्टेडियम में सभी सामान ले जाना मना है। एक नज़र एेसे ही 6 मामलों पर जब दर्शकों ने बुरा बर्ताव किया: 1- 2001, नैटवेस्ट फ़ाइनल, लॉर्ड्स, पाकिस्तान vs ऑस्ट्रेलिया यह मैच जीतने के बाद ऑस्ट्रेलिया बहुत सदमे में था क्योंकि उन पर पूरा एक बीयर का कैन फेंक दिया गया था। ऑस्ट्रेलिया की टीम प्रेजेनटेशन के लिए बालकनी में थी तब माइकल बेवन के मुँह पर बीयर कैन पड़ा। इसके बाद स्टीव वॉ ने सेरेमनी ख़त्म कर दी। बाद में उन्होंने कहा कि अगर कुछ नहीं किया गया तो किसी की जान जा सकती थी। बेवन ने कहा,"यह बहुत दुखदाई है पर इसको सकारात्मक तरीके से देखा जा सकता है। पर साथ ही इसको रोकने के लिए कुछ किया जाना चाहिए।

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2- 1991, एशियन टेस्ट चैम्पियन्शिप, भारत और पाकिस्तान आक्रोशित जनता

भारत और पाकिस्तान के बीच के मैच में हमेशा ही लोगों के भाव बढ़े ही रहते हैं। सभी दर्शक ईंडन गार्डन में सचिन के लिए चीयर कर रहे थे पर तब वे शोएब अख़तर से भिड़ गए और विवादास्पद तरीके से रन आउट हो गए। स्क्रीन पर स्लो मोशन पर भिड़ंत दिखाने के बाद 70,000 दर्शकों ने मिलकर "चीट चीट" चिल्लाने लगे। सचिन जब पवेलियन की तरफ़ जाने लगे तो दर्शकों ने जूते और बोतलें फेंकने लगे। अंपायरों ने जल्दी से चाय के लिए खेल बंद किया और सचिन और डालमिया ने दर्शकों को शांत रहने को कहा। दर्शकों ने फिर से भारत के 231-9 पर हारने के बाद हिंसा शुरू कर दी। दर्शकों अख़बार और बोतल फेंकना शुरू कर दिया। अंततः दर्शकों को खेल शुरू करने से पहले बाहर निकालने पड़ा।

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3- 2015, तीसरा ओडीआई, कोलंबो, पाकिस्तान और श्रीलंका बाधा के कारण आई आर्मी

हाल ही में लोकल प्रशंसकों और पाकिस्तानी प्रशंसकों के बीच हुई भिड़ंत के कारण सुरक्षा बल को बुलाना पड़ा। दर्शकों द्वारा पत्थर फेंकने के बाद, उन्हें बाहर निकाल दिया गया और 30 मिनट तक खेल रोक दिया गया। एक पत्थर एक खिलाडी के पैर के पास जाकर गिरा। चार लोगों को पकड़ लिया गया। महेला जयवर्धने ने कहा,"खेल को सही तरीके से मज़े लेने चाहिए और यह फिर से नहीं होना चाहिए।" 4- 1999, सातवाँ ओडीआई, बार्बेडोस, वैस्ट इंडीज़ और ऑस्ट्रेलिया इस मैच को भी बीच में रोकना पड़ा था सचिन और शोएब की तरह वैस्ट इंडीज़ के ओपनर शर्विन कैंपबेल और ऑस्ट्रेलियन गेंदबाज ब्रैंडन जुलियन से भिड़ गए। इसके कारण दर्शकों ने तुरंत बोतल, कुर्सियाँ ,ब्लॉक और चिकन की हड्डियाँ फेंकने लगे। खेल को रोकना पड़ा और ऑस्ट्रेलियाई कप्तान के सर पर बोतल जाकर गिरी जब वे पवेलियन की तरफ़ जा रहे थे। कैंपबेल ने दर्शकों से शांत होने को कहा और बाद में दर्शकों के कहने पर कैंपबेल को खेल में वापस बुलाया गया। 5- 1999, पाँचवा ओडीआई, जार्जटाउन, वेस्ट इंडीज़ और ऑस्ट्रेलिया मैच रुकने पर पवेलियन जाते खिलाड़ी वेस्ट इंडीज़ के दौरे पर मैच ही रद्द करना पड़ा। इस मैच में दर्शकों ने सारी हदें पार कर दी और मैदान पर उतर आए और ऑस्ट्रेलिया को जीतने के लिए चंद जीतने वाले रनों को बनाने से रोकने की कोशिश करी। दर्शकों ने सात गेंदों में सात रन भी नहीं बनाने दिए। उन्होंने स्टीव वॉ और वार्न से बल्ला छीन लिया। अंततः गेम को ड्रॉ घोषित कर दिया गया। 6- 1996, कोलकाता, वर्ल्ड कप सेमी फ़ाइनल , भारत और श्रीलंका इस मैच को भारतीय दर्शक शायद ही कभी भूल पाएंगे भारत 35 ओवर में 251 रन का पीछा करते हुए 120-8 विकेट खो चुका था। दर्शकों को भारत की यह हार बर्दाश्त नहीं हुई और उन्होंने जलते अख़बार, बोतल आदि मैदान में फेंकना शुरू कर दिया। रेफ़री ने मैच श्रीलंका को दे दिया और विनोद कांबली क्रीज़ पर रोने लगे।

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लेखक-चाँदनी अहूजा, अनुवादक-सेहल जैन
Edited by Staff Editor

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