इन 7 खिलाड़ियों ने दो देशों की तरफ से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेला

किसी भी खिलाड़ी को सबसे ज्यादा ख़ुशी तब मिलती है, जब वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने देश के लिए खेलता है। दुनिया के करोड़ों बच्चों को ये सपना होता है, कि वह अपने देश की क्रिकेट टीम का कैप हासिल करे, लेकिन दुर्भाग्यवश इन करोड़ों बच्चों में से कुछ चुनिंदा खिलाड़ी इतिहास में अपना दर्ज कराते हैं। हालांकि क्रिकेट में ऐसे भी मौके आये हैं, जब एक खिलाड़ी ने दो देशों का प्रतिनिधित्व किया है। उसके कई कारण भी रहे हैं। आज हम आपको इस लेख में ऐसे ही 7 खिलाड़ियों के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने वनडे और टी-20 में दो देशों की तरफ से खेला है: डर्क ननेस डर्क ननेस ने साल 2005 में अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की थी। जहां वह ऑस्ट्रेलिया की घरेलू टीम विक्टोरिया की तरफ से खेलते थे। बाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज़ ने जल्द ही वनडे और टी-20 में अपनी छाप छोड़ दी। ननेस अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जल्द ही खेलना चाहते थे इसलिए उन्होंने नीदरलैंड की टीम में शामिल होकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मैदान में उतर पड़े। अपने माता-पिता की मदद से ननेस ने डच देश की नागरिकता ली। जहां साल 2009 के टी-20 विश्वकप के लिए उन्हें टीम में चुना गया। उसके बाद अगले ही साल ननेस को ऑस्ट्रेलियाई वनडे और टी-20 टीम में शामिल किया गया। जहां अपनी बेहतरीन गेंदबाज़ी के बदौलत 15 मैचों में ननेस ने 27 विकेट लिए। रोलॉफ वेनडर मर्व मर्व ने साल 2006 में दक्षिण अफ्रीका के घरेलू सीजन में नार्थन की तरफ से डेब्यू किया था। बाएं हाथ के धीमी गति के स्पिनर मर्व ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन किया और उसके बाद साल 2009 में राष्ट्रीय टीम की तरफ से भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। मर्व ने वनडे में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरिज में अपना डेब्यू किया था। उन्हें टी-20 फॉर्मेट में शानदार प्रदर्शन का ये इनाम मिला था। जहाँ उन्होंने बेहतरीन ऑलराउंड प्रदर्शन किया था। लेकिन धीरे-धीरे उनकी विकेट लेने की क्षमता में गिरावट हुई। जिसकी वजह से उन्हें टीम बाहर कर दिया गया। 32 वर्ष की उम्र में उन्हें डच देश का पासपोर्ट मिला जहाँ उन्होंने साल 2015 में उन्हें नीदरलैंड की तरफ से खेलना का मुका मिला। उन्हें विश्वकप 2015 के क्वालीफ़ायर मुकाबलों के लिए 15 सदस्यीय टीम में चुना गया। नीदरलैंड की तरफ से उन्होंने 11 मैचों में 15 विकेट लिए थे। ल्युक रोंची ल्युक रोंची का जन्म न्यूज़ीलैंड में हुआ था लेकिन बचपन में ही वह पर्थ आ गए थे। घरेलू क्रिकेट में रोंची ने वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया की तरफ से डेब्यू किया और अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी और बेहतरीन कीपिंग क्षमता से सबको प्रभावित किया। दुर्भाग्यवश ब्रेड हैडिन को 2008 में चोट लग गयी और उन्होंने वेस्टइंडीज के साथ होने वाली सीरिज के लिए टीम में चुन लिया गया। इस विकेटकीपर बल्लेबाज़ ने 3 टी-20 और 4 वनडे में ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व किया। जिसके बाद न्यूज़ीलैंड चले आये जहाँ वह पैदा हुए थे। साल 2012 में उन्होंने कीवी टीम की तरफ से खेलने की इच्छा जाहिर की। उसी महीने में रोंची को वेलिंगटन क्रिकेट टीम की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेलने के लिए बुलाया गया। 36 वर्षीय इस विकेटकीपर बल्लेबाज़ को साल 2013 में न्यूज़ीलैंड की टीम में शामिल किया गया। जहाँ वह छोटे प्रारूप में लगातार खेलते रहे। हाल ही में उन्होंने क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। गेरेंट जोंस ये विकेटकीपर बल्लेबाज़ पापुआ न्यू गिनी में पैदा हुआ था। इंग्लैंड की घरेलू टीम केंट की तरफ जोन्स ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की। जिसके बाद साल 2004 में उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ इंग्लैंड टीम में शामिल किया गया। जिसके बाद ग्रेंट जोन्स साल 2006 इंग्लैंड की टीम में नियमित बने रहे। जिसके बाद खराब प्रदर्शन के चलते उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। साल 2012 में यूनाइटेड अरब अमीरात में हुए आईसीसी टी-20 विश्वकप के क्वालीफ़ायर मैच में जोंस पापुआ न्यू गिनी के लिए में खेले थे। वह टीम के साथ साल 2014 तक जुड़े रहे। माइकल डी वेनुटो ऑस्ट्रेलिया के घरेलु क्रिकेट में बाएं हाथ के इस बल्लेबाज़ ने तस्मानिया टाइगर्स की तरफ से खेलता था। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के चलते माइकल को 1992 में दक्षिण अफ्रीका से होने वाली सीरिज के लिए ऑस्ट्रेलिया टीम में चुना गया। 9 मैचों में लगातार खराब प्रदर्शन के चलते साल 2012 में माइकल ने इटली की नागरिकता लेकर वहीँ बस गये। जहाँ वह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलते रहे। उनके इटली का पासपोर्ट भी है। साल 2012 के टी-20 विश्वकप के क्वालीफ़ायर मुकाबले में वह इटली टीम की तरफ से खेले थे। डी वेनुटो मौजूदा समय में सरे के कोच हैं, इसके अलावा वह साल 2016 में भारत दौरे पर आने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम के बल्लेबाज़ी कोच थे। रेयान कैम्पबेल सन 1995 में विकेटकीपर बल्लेबाज़ कैम्पबेल ने वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेला। लेकिन एडम गिलक्रिस्ट के टीम में होने पर उन्हें अपनी बारी का इन्तजार करना था। गिली जब भी टीम से बाहर होते तो विकेटकीपर की भूमिका में कैम्पबेल को मौका मिलता था। साल 2002 में न्यूज़ीलैंड के साथ सीरिज के दौरान गिलक्रिस्ट को चोट लगने की वजह से कैम्पबेल को टीम में शामिल किया। लेकिन गिली के आते ही उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। उसके बाद वह साल 2012 में हांगकांग चले आये जहाँ वह खिलाड़ी और कोच की भूमिका में टीम से जुड़ गये। 43 साल की उम्र में कैम्पबेल ने हांगकांग की तरफ से साल 2016 के टी-20 विश्वकप में ज़िम्बाब्वे के खिलाफ डेब्यू किया। जो एक रिकॉर्ड बन गया। ओइन मॉर्गन मौजूदा समय में इंग्लैंड के कप्तान और बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ओइन मॉर्गन ने साल 2006 अपने घरेलू क्रिकेट और अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत आयरलैंड में शुरू की थी। लेकिन एसोसिएट्स देशों को कम मौके मिलने की वजह से मॉर्गन ने साल 2009 में इंग्लैंड की तरफ से खेलने का रुख किया। जहाँ इस बेहतरीन खिलाड़ी को जल्द ही टीम में शामिल किया गया । मॉर्गन पहले ऐसे खिलाड़ी भी हैं, जिन्होंने दोनों देशों की ओर से खेलते हुए शतक बनाया है। वनडे टीम में नियमित सदस्य बनने के साथ ही मॉर्गन को साल 2014 में इंग्लैंड टीम का कप्तान बना दिया गया। जहाँ उन्होंने खुद को साबित किया है।