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भारतीय क्रिकेट इतिहास की 8 यादगार साझेदारियां जो फ़ैन्स के ज़ेहन में आज भी हैं ज़िंदा

Modified 21 Sep 2018, 20:25 IST
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क्रिकेट हमेशा से ही साझेदारी का खेल रहा है। टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाना हो या फिर बड़े लक्ष्य को पाना हो, दोनों ही सूरतों में टीम के मुख्य बल्लेबाजों को पिच पर जमे रहकर लंबी पारियां खेलने की जरूरत होती है। हम बात करने जा रहे हैं, भारतीय बल्लेबाजों की कुछ ऐसी ही यादगार साझेदारियों के बारे में, जिन्होंने आने वाले सालों में क्रिकेट की दिशा निर्धारित की। इसके अलावा, ये पारियां भारतीय फैन्स के लिए इसलिए भी खास रहीं क्योंकि ये तब हुईं, जब भारत को इनकी बेहद जरूरत थी। आइए जानते हैं ऐसी 8 ऐतिहासिक और यादगार पारियों के बारे में:

#8 युवराज सिंह-मोहम्मद कैफ़, 2002

FEATURE   अगर आपने 2002 नैटवेस्ट ट्रॉफी में भारत और इंग्लैंड के बीच हुआ फाइनल मुकाबला देखा होगा, तो आपके जेहन में युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ की 121 रनों की निर्णायक साझेदारी जरूर ज़िंदा होगी। 90 प्रतिशत फैन्स ने पहले ही मैच देखना या सुनना बंद कर दिया था और बाकियों ने सचिन का विकेट गिरने के बाद। सब यही सोच रहे थे कि भारत यह मैच हार जाएगा और ये युवा बल्लेबाज अब खेल का रुख नहीं बदल सकते। हालांकि, कुछ फैन्स ने अभी भी चमत्कार की उम्मीद लगा रखी थी। इन फैन्स के साथ-साथ पिच पर मौजूद युवा खिलाड़ियों की इस जोड़ी ने भी अभी तक हार नहीं मानी थी। यह वक्त था फैन्स के विश्वास को जीतने का और युवी-कैफ ने फैन्स को निराश नहीं किया। इस पार्टनरशिप की खासियत सिर्फ इतनी नहीं थी कि इसमें 121 रन जोड़े गए बल्कि इस पारी ने अंत तक जूझने वाली भारतीय टीम की नींव रखी थी और जिस जज्बे को हम आजतक भारतीय टीम के अंदर देख रहे हैं। यह एक बेहतरीन साझेदारी नहीं बल्कि एक यादगार लम्हा तैयार हो रहा था।
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Published 14 Jan 2018, 18:45 IST
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