अर्जुन तेंदुलकर का इंटर ज़ोनल टूर्नामेंट के अंडर 16 की टीम में चयन

भारत के महान क्रिकेटर राज चुके सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर को 24 मई से हुबली में शुरू हो रहे अंडर 16 इंटर ज़ोनल टूर्नामेंट के लिए वेस्ट जोन की टीम मे चुना गया है। अर्जुन पहले से ही मुंबई की अंडर 16 टीम के सदस्य है। उन्होंने नेशनल टीम के लिए अपना डेब्यू जनवरी 2011 में पुणे मे हुए कैडैंस ट्रॉफी के दौरान किया। ओएम भोसले टीम की कप्तानी करेंगे, 6 जून को खत्म होने वाले टूर्नामेंट अर्जुन अपना टैलेंट दिखाना चाहेंगे। टीम का ऐलान बडौदा क्रिकेट संघ के सेक्रेटरी स्नेहल पारिख ने किया, टीम का चयन ऑल इंडिया जूनियर सिलेक्शन कमेटी ने सोमवार को किया। सिलेक्शन कमेटी के चेयरमैन राकेश पारिख ने मीटिंग के बाद कहा सिलेक्शन में टीम के कोच तुषार अराठे, शानतनु सुगवेकर, समीर दिघे और जे क्रिसना राव भी मौजूद थे, जिनहोने टीम के लिए अपनी अपनी राय दी। आगामी टूर्नामेंट के लिए टीम इस प्रकार है। अंडर 16 वेस्ट जोन टीम ओएम भोसले(कप्तान), वसुदेव पाटिल , सुवेद पार्कर, स्मित पटेल, संप्रीत बग्गा, यशाशवी जैसवाल, दिवयांश सक्सेना, नील जाधव(विकेटकीपर), अर्जुन तेंदुलकर, योगेश डोंगरे, अथरवा अंकोलेकर, सूरज सूर्याल, सिद्धार्थ देसाई, आकाश पांडे और मुकुन्द सरदार। बाए हाथ के बल्लेबाज़ अर्जुन ने मुंबई क्रिकेट संघ अंडर 16 पाययेड ट्रॉफी में सुनील गावस्कर इलेवन के लिए खेलते हुए रोहित शर्मा इलेवन के खिलाफ शानदार (106) शतक लगाया और मैच के दूसरे दिन 73-4 विकटे भी ली। अर्जुन जो अपने पापा से अलग बाए हाथ के बल्लेबाज़ और बाए हाथ के ही तेज़ गेंदबाज है। वो 2015 मे इंग्लैंड क्रिकेट टीम के बल्लेबाजो को नेट्स में गेंद भी डाल चुके है। उन्हें सचिन ने महानत्म तेज़ गेंदबाज़ वसीम अक्रम से भी मिलवाया, जिन्होने इन्हें गेंदबाजी के टिप्स भी दिये। अक्रम ने अर्जुन के बारे में कहा उसमे क्रिकेट के लिए अलग ही जनून है, अगर हम भारत और पाकिस्तान मे किसी 15 साल के लड़के से तुलना करे तो। मैंने बस उसे बस फ़िटनेस और अपनी रिस्ट पर ध्यान देने के लिए कहा है। साथ ही में उसे गेंद को सीधे हाथ के बल्लेबाज़ के लिए गेंद को अंदर लाना बताया है और उसे कहा तुम तीन महीने इसका अभ्यास करो फिर मैं तुम्हें निश्चित ही गेंद को बाहर निकालना सिखाऊँगा। सचिन ने पहले ही मीडिया से अर्जुन पर अधिक दबाव ना बनाने को कहा था। उनपे कभी भी अच्छा खेलने के लिए ' मेरी उपलब्धियों का प्रैशर नहीं पढ्ना चाहिए।' लेखक- पल्लब चैटर्जी, अनुवादक- मयंक महता

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