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विवादों से जूझता क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया: वेतन को लेकर खिलाड़ी और बोर्ड आमने-सामने

Modified 21 Sep 2018, 20:30 IST
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ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट पर गहराया संकट ऐसा पहली बार है, जब ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर्स हड़ताल पर हैं और अपने ही बोर्ड के साथ उनका विवाद चल रहा है। अगर इस विवाद को सुलझाया नहीं गया तो ऑस्ट्रेलियाई ए-टीम का दक्षिण अफ्रीकी दौरा, पुरुष टीम का बांग्लादेश दौरा और फिर साल के आखिर तक एशेज के रद्द होने तक की स्थिति बन सकती है।  क्या है पूरा विवाद? बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच यह विवाद वेतन को लेकर है। बोर्ड द्वारा निर्धारित वेतन से खिलाड़ी संतुष्ट नहीं हैं और खिलाड़ियों के प्रस्ताव को बोर्ड पहले ही अस्वीकार कर चुका है।  क्या चाहते हैं खिलाड़ी? 1998 में टिम मे एक समझौता ज्ञापन के तहत रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल लाए थे, जिसके आधार पर पिछले 19 सालों से खिलाड़ियों को भुगतान किया जा रहा था। पहले मॉडल के हिसाब बोर्ड के रेवेन्यू का एक निर्धारित हिस्सा (फिलहाल 26%) अंतरराष्ट्रीय और घरेलू खिलाड़ियों के बीच बांटा जाता था। कोई सालाना मान निर्धारित नहीं था।
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 क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का पक्ष बोर्ड के मुताबिक, हालिया मॉडल के मारफत बोर्ड के पास जो हिस्सा आता है, वह खेल के सुयोचित विकास के लिए पर्याप्त नहीं है। बोर्ड खेल के जमीनी स्तर पर निवेश बढ़ाना चाहता है, इसलिए वह चाहता है कि शीर्ष खिलाड़ियों की सैलरी पहले से तय हो। शुरुआत में बोर्ड का कहना था कि अतिरिक्त रेवेन्यू का हिस्सा सिर्फ शीर्ष 20 खिलाड़ियों को ही दिया जाए, जबकि अन्य खिलाड़ियों को निर्धारित सैलरी पर ही संतुष्ट होना पड़ेगा। साथ ही, बोर्ड ने रेवेन्यू शेयरिंग समझौते से घरेलू क्रिकेटरों को दूर रखने का प्रस्ताव रखा था। बोर्ड का मानना था कि वे बोर्ड की कमाई में कोई योगदान नहीं करते। 12 दिसंबर को बोर्ड ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर्स असोसिएशन (ACA) और खिलाड़ियों को अपनी विस्तृत योजना भेजी, जिसके तहत घरेलू क्रिकेटरों को तयशुदा भुगतान किया जाए और मुनाफे का हिस्सेदार (20 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर) सिर्फ अंतरराष्ट्रीय पुरुष खिलाड़ियों को ही रखने का प्रस्ताव दिया गया। असोसिएशन ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा कि यह प्रस्ताव ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में घरेलू क्रिकेटरों के योगदान को नकारता है और साथ ही रेवेन्यू में महिला क्रिकेटरों की हिस्सेदारी के भी खिलाफ है।  मार्च में बोर्ड ने खिलाड़ियों को दिया यह प्रस्ताव - मुनाफे में से 20 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 20 शीर्ष खिलाड़ियों को दिया जाएगा, जिनमें से 16 पुरुष और 4 महिला खिलाड़ी होंगी। - इस करार के मुताबिक खिलाड़ियों को 2017-22 के बीच 419 मिलियन डॉलर की हिस्सेदारी मिलेगी, जबकि अब तक उनके लिए 311 मिलियन डॉलर की हिस्सेदारी तय थी। - अंतरराष्ट्रीय पुरुष खिलाड़ियों का औसत करार 2021-22 तक 816,000 डॉलर तक बढ़ जाएगा। - 2016-17 में 199,000 डॉलर के मुकाबले घरेलू (पुरुष) खिलाड़ियों का वेतन 2021-22 में 235,000 तक हो जाएगा। - महिला खिलाड़ियों की सालाना आय में करीब 150% का इजाफा होगा, जो 79,000 डॉलर से बढ़कर 179,000 डॉलर तक हो जाएगी। - घरेलू महिला क्रिकेटरों की सालाना आय में भी 150% का इजाफा होगा, जो 22,000 डॉलर से बढ़कर 52,000 डॉलर तक हो जाएगी। स्टेट क्रिकेट में महिला और पुरुष दोनों ही क्रिकेटरों को घंटों के हिसाब से बराबर मैच फीस का भुगतान होगा। कप्तान स्टीव स्मिथ इस पर चुप रहे, लेकिन उपकप्तान डेविड वॉर्नर ने इसके खिलाफ आवाज उठाई।  बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच पनपे विवाद की सभी जानने योग्य बातें- एक बार फिर बोर्ड के प्रस्ताव को खिलाड़ियों के असोसिएशन ने अस्वीकार कर दिया। जून में, बोर्ड ने खिलाड़ियों को मनाने का आखिरी प्रयास किया। बोर्ड ने मुनाफे की हिस्सेदारी में 20 शीर्ष खिलाड़ियों के बजाय सभी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों (पुरुष एवं महिला) को शामिल करने और घरेलू (पुरुष) क्रिकेटरों के वेतन में इजाफा करने का प्रस्ताव रखा। वेतन में इजाफे के बाद भी क्यों राजी नहीं हुए खिलाड़ी? खिलाड़ी 20 साल पुराना रेवेन्यू मॉडल ही जारी रखना चाहते थे। साथ ही, अगले साल क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के एक बड़ी ब्रॉडकास्ट डील साइन करने की संभावना है और साथ ही, बिग बैश लीग की शानदार सफलता के बाद बोर्ड को बढ़ा मुनाफ होने की भी पूरी संभावना है। खिलाड़ी डील में से अपनी हिस्सेदारी चाहते हैं। जबकि, बोर्ड के प्रस्ताव के मुताबिक, बोर्ड इस तरह के मुनाफे में खिलाड़ियों की हिस्सेदारी नहीं चाहता। मई में, बोर्ड ने अपने मुख्य मध्यस्थ वार्ताकार केविन रॉबर्ट्स का विडियो भी जारी किया था, जिसमें खिलाड़ियों को ऑफर्स के बारे में विस्तार से समझाया गया था। इसके बाद चैंपियन्स ट्रॉफी के दौरान एक और विडियो जारी किया गया। उपकप्तान डेविड वॉर्नर ने इस विडियो की कड़ी आलोचना की। विडियो में ग्राफिक्स के तहत जानकारी दी गई थी, कि बोर्ड से संबद्ध होने के 5 साल के समय में बिग बैश लीग से बोर्ड का 33 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। इसके बाद पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर और असोसिशन के प्रतिनिधि साइमन कैटिच ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि बोर्ड नई ब्रॉडकास्ट डील से होने वाले मुनाफे से खिलाड़ियों का ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है। खिलाड़ियों ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की मांगें मानने से इनकार कर दिया। खिलाड़ियों का मानना था कि पिछला रेवेन्यू मॉडल सभी स्तर के खिलाड़ियों का सम्मान करता था, जबकि नया मॉडल घरेलू क्रिकेटरों के लिए उपयुक्त नहीं है। क्या खिलाड़ियों ने बोर्ड को कोई प्रस्ताव दिया? ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट असोसिएशन ने बोर्ड के सामने अपना रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल रखा था, जिसे बोर्ड ने अस्वीकार कर दिया। मॉडल के मुताबिक, बोर्ड को जाने वाले 55% रेवेन्यू का 22.5% हिस्सा जमीनी स्तर से क्रिकेट के विकास और बचा हुआ हिस्सा पुरुष और महिला खिलाड़ियों को मिलना चाहिए। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के सामने अगली तस्वीर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों का पिछले 5 सालों का करार 30 जून को खत्म हो चुका है और महिला क्रिकेटरों का समझौता चल रहे विश्व कप के साथ ही खत्म हो जाएगा। बोर्ड ने क्रिकेटरों के लिए नए मॉडल को स्वीकार करने और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए 30 जून की समयसीमा तय की थी। जबकि खिलाड़ी अपने पक्ष पर डंटे रहे। बोर्ड के मैनेजर पैट हॉवर्ड ने सभी स्टेट्स को और असोसिएशन को एक पत्र भेजा, जिसमें कहा गया था कि जो खिलाड़ी 30 जून का समझौता स्वीकार नहीं करेगा, वह इस समयसीमा के बाद बेरोजगार होगा। जिसका मतलब है कि वह न तो खेल सकता है, न ट्रेनिंग जारी रख सकता है और न ही मीडिया के सामने प्रतिनिधित्व कर सकता है। Published 05 Jul 2017, 19:06 IST
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