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विराट कोहली की बीसीसीआई अधिकारी जितनी पूजा करते हैं उतनी तो नरेंद्र मोदी की उनकी कैबिनेट भी नहीं करती है: रामचंद्र गुहा

SENIOR ANALYST
Modified 21 Sep 2018, 20:25 IST
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जून 2017 रामचंद्र गुहा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित 4 सदस्यों की समिति से इस्तीफा देकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को हैरानी में डाल दिया था। अब रामचंद्र गुहा ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड पर एक और निशाना साधा है। द् टेलीग्राफ में लिखे अपने एक आर्टिकल में भारतीय टीम के कप्तान  विराट कोहली के प्रति बीसीसीआई के प्यार को लेकर उन्होंने आलोचना की है। उन्होंने लिखा है कि भारतीय बोर्ड कोहली का जितना पक्ष लेता है उतना तो नरेंद्र मोदी का कैबिनेट भी मोदी का पक्ष नहीं लेता। अपने लेख में उन्होंने लिखा ' बोर्ड के अधिकारी कोहली की जितनी पूजा करते हैं उतनी तो मोदी कैबिनेट मोदी की पूजा नहीं करती है। उदाहरण के लिए भविष्य के दौरों को तय करने की बात हो या फिर राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के प्रबंधन की बात हो, हर बात में भारतीय कप्तान को शामिल किया जाता है। भ्रष्टाचार और फेवरिटज्म भारतीय क्रिकेट के अंदर आ गया है और सुपरस्टार सिंड्रोम भी सर चढ़कर बोल रहा है। इसमें कोई शक नहीं है कि कोहली एक बहुत ही बड़े खिलाड़ी और कप्तान हैं लेकिन संस्थानों की स्वायत्ता खत्म होने से वो और उनकी टीम सफलता की सीढ़ी नहीं चढ़ सकते हैं'। गौरतलब है जब जून 2017 में रामचंद्र गुहा ने इस्तीफा दिया था तो उन्होंने कई दिग्गज क्रिकेटरों पर निशाना साधा था और आर्थिक हितों के टकराव की बात कही थी। इसके अलावा भारतीय क्रिकेट में सुपरस्टार कल्चर को लेकर भी उन्होंने कड़ी आलोचना की थी। अनिल कुंबले के भारतीय टीम के कोच पद से इस्तीफा देने को लेकर भी उन्होंने निशाना साधा था। गुहा का मानना था कि कोहली इसलिए अनिल कुंबले को कोच के रुप में नहीं चाहते थे क्योंकि कुंबले ने अपने क्रिकेट करियर में कई रिकॉर्ड बनाए थे और नई ऊंचाइयों को छुआ था। वो विराट कोहली से ज्यादा बड़े खिलाड़ी थे जबकि रवि शास्त्री इतने बड़े खिलाड़ी नहीं हैं और ना ही उन्हें कोचिंग का कोई अनुभव है फिर भी उन्हें कोच बनाया गया।   Published 21 Jan 2018, 12:00 IST
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