लोढ़ा समिति ने शिकंजा कसते हुए बीसीसीआई को धकेला बैकफुट पर

यह भारतीय क्रिकेट बॉडी के लिए एक अशुभ सप्ताह था। बीसीसीआई के लिए घर यानि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति और बाहर यानि ICC, दोनों तरफ से बुरी खबरें आ रही है। लोढ़ा समिति द्वारा बनाए नए नियमों को लागू करने में लंबे समय से आनाकानी कर रही बीसीसीआई के लिए लोढ़ा समिति ने सुप्रीम कोर्ट से पूर्व गृह मंत्री जी.के. पिल्लई को ऑब्जर्वर नियुक्त करने का निवेदन किया है। एक बार ऑब्जर्वर नियुक्त होने के बाद अनुराग ठाकुर और राज्य क्रिकेट संघों के ऑफिसों की शक्तियां खत्म हो जाएगी। जी.के. पिल्लई की देखरेख में बीसीसीआई के मौजूदा सीईओ राहुल जोहरी प्रबंधन और मैनेजमेंट से संबन्धित कार्यों के लिए सीधे जिम्मेदार होंगे, और उन्हें अध्यक्ष सहित किसी भी सदस्य की अनुमति की जरूरत नहीं होगी। जी.के. पिल्लई के पास कई प्रकार की नियुक्तियां करने के अधिकार होंगे, जिसमें बीसीसीआई के खातों और अनुबंधों की जांच के लिए ऑडिटर भी शामिल है। घरेलू, अंतर्राष्ट्रीय और आईपीएल जैसे सभी टूर्नामेंटों के वित्तीय मामलों के लिए सचिव स्तरीय नियुक्ति का अधिकार भी उनके पास होगा। 18 जुलाई के बाद से राज्य क्रिकेट संघों के पास धन की कमी हो गई है क्योंकि बीसीसीआई ने सदस्यों की नियुक्ति के लिए योग्यता के मापदंड तय करने की शर्त को नहीं माना है। बीसीसीआई और लोढ़ा समिति के बीच चल रहे मामले ने भारतीय क्रिकेट टीम को भी प्रभावित किया है। यह भी सामने आया है कि मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर नहीं होने की वजह से इंग्लैंड के खिलाड़ियों को इंडिया में एक दिन का भी भत्ता नहीं मिला है। बीसीसीआई की घर में खराब स्थिति के बाद अब आईसीसी में भी बुरी स्थिति हो चली है। बीसीसीआई से पद त्याग कर आईसीसी के चैयरमैन बने शशांक मनोहर का बोर्ड ने विरोध किया था। अब आईसीसी ने दूसरी बार बीसीसीआई को वर्किंग ग्रुप मीटिंग का निमंत्रण नहीं दिया है। यह मीटिंग इस सप्ताह एडिलेड में होनी है, इससे पहले भी सिंगापुर में हुई मीटिंग में भी बीसीसीआई को निमंत्रण नहीं मिला था। यह शशांक मनोहर ने जानबूझकर किया है। आईसीसी के एक अधिकारी के अनुसार “शशांक मनोहर ने बीसीसीआई को आईसीसी से दूर रखने के लिए ऐसा जानबूझकर किया है।“ इन सभी स्थितियों में बोर्ड का क्या रुख रहेगा, अगले कुछ दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा।