खिलाड़ियों को चोट से बचाने के लिए भारतीय क्रिकेट टीम लेगी तकनीक का सहारा

इसमें कोई शक नहीं कि क्रिकेट विश्व का सबसे लोकप्रिय खेल है। इस खेल का आनंद लेने के लिए लोग दूर दूर से स्टेडियम में जमा होते हैं। बाहर से देखने में ये खेल जितना आसान लगता है अंदर से उतना ही कठिन है। इस खेल में कई ऐसे मोड़ होते हैं जहां खिलाड़ियों को खेल के साथ साथ अपने शरीर पर भी पूरा ध्यान देना पड़ता है। साथ ही साथ खिलाड़ियों को मैच के दौरान या अभ्यास करते हुए भी चोट लग जाती है जिसकी वजह से उन्हें क्रिकेट से दूर होना पड़ता है। इसी को मद्देनज़र रखते हुए बीसीसीआई ने एक बेहतरीन तारीक अपनाया है जिससे खिलाड़ियों को चोटिल होने से बचाया जा सके। बीसीसीआई ने भारतीय खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए एक डिजिटल सिस्टम का सहारा लेने का सोचा है। जिससे खिलाड़ियों को होने वाली स्ट्रेन इंजरी को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। ये तकनीक खास कर तेज़ गेंदबाजों के लिए लाभदायक होगी। इसके अलावा ये डिजिटल सिस्टम खिलाड़ियों की चोट की संभावनाओं को तो कम करेगा ही साथ ही साथ उनके ऊपर बढ़ते वर्कलोड को भी संतुलित करेगा। इस डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में किया जा रहा है जो सफल भी साबित हो रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक बीसीसीआई ने कहा “बोर्ड ने खिलाड़ियों को होने वाली इंजरी पर अधिक ध्यान देने का सोचा है, इसलिए एक डिजिटल सिस्टम की मदद से सभी खिलाड़ियों का एक डिजिटल बैंक होगा जिसमें उनके वर्कलोड दर्ज किए जाएंगे”। भारतीय तेज़ गेंदबाज चोट की वजह से अपने करियर में कई बार जूझते नज़र आए हैं पर इस डिजिटल सिस्टम की मदद से ये परेशानी बहुत हद तक खत्म हो जाएगी। सूत्रों से ये भी पता चला है कि पहले इस सिस्टम का इस्तेमाल स्टेट टीम के खिलाड़ियों पर किया जाएगा। अब देखना ये है कि इस तकनीक का इस्तेमाल भारतीय टीम को कितना फायदा पहुंचा सकेगा।

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