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"भरत अरुण या शास्‍त्री नहीं, पूर्व ऑस्‍ट्रेलियाई ने बदली भारत में तेज गेंदबाजी की तस्‍वीर", पूर्व इंग्लिश खिलाड़ी का दावा

भारतीय टीम के तेज गेंदबाजों के बेहतरी को लेकर इंग्लिश दिग्गज ने प्रतिक्रिया
भारतीय टीम के तेज गेंदबाजों के बेहतरी को लेकर इंग्लिश दिग्गज ने प्रतिक्रिया
Prashant Kumar
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एक समय था जब भारत मात्र अपने स्पिन गेंदबाजों के लिए क्रिकेट जगत में जाना जाता था और उसके पास मध्यम गति के तेज गेंदबाज होते थे। लेकिन पिछले चार सालों में काफी बदलाव आया और आज भारत के पास मौजूदा समय में विश्व क्रिकेट कुछ बेहतरीन तेज गेंदबाज मौजूद हैं और भारतीय टीम की हालिया सफलता का प्रमुख कारण रहे हैं। काफी लोग इसका श्रेय पूर्व भारतीय कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) और पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री (Ravi Shastri) तथा पूर्व गेंदबाजी कोच भरत अरुण (Bharat Arun) को देते हैं। हालांकि इंग्लैंड के पूर्व तेज गेंदबाज डोमिनिक कॉर्क इस बात से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते और उन्होंने भारत में तेज गेंदबाजों की प्रगति का श्रेय ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज डेनिस लिली और उनकी MRF पेस एकेडमी को दिया है।

कॉर्क के मुताबिक डेनिस लिली और उनकी एमआरएफ पेस एकडेमी ने भारतीय तेज गेंदबाजी में बदलाव के बीज बोए।

The Hindu के हवाले से कॉर्क ने कहा,

उस समय भारत में तेज गेंदबाजी में इतनी गहराई नहीं थी। भारत तेज गेंदबाजी में काफी आगे आया है। डेनिस लिली और एमआरएफ ने यह सब शुरू किया। फिर एक कोच के रूप में डंकन फ्लेचर ने सुनिश्चित किया कि भारत के पास फायरपॉवर है।

इंग्लैंड के खराब प्रदर्शन के पीछे कॉर्क ने बताई बड़ी वजह

काफी लोगों ने इंग्लैंड के एशेज में हालिया खराब प्रदर्शन के पीछे आईपीएल और द हंड्रेड लीग को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि यह पूर्व खिलाड़ी इस बात को नहीं मानता। उन्होंने कहा कि एशेज में इंग्लैंड के खराब प्रदर्शन का कारण यह है कि उनके चार दिवसीय सेट-अप में अब 1990 और 2000 के दशक की तरह गुणवत्ता वाले विदेशी खिलाड़ी नहीं हैं।

उन्होंने कहा,

हम कुछ भी दोष देंगे। हम आईपीएल, द हंड्रेड को दोष देंगे। इसका कारण यह है कि हमने अभी टेस्ट क्रिकेट से नजरें हटा ली हैं। हमारे पास वह गुणवत्ता नहीं है जो हमारे पास 1990 के दशक में थी जब हमारे पास शीर्ष विदेशी खिलाड़ी थे। हमने मोहम्मद अजहरुद्दीन, सचिन तेंदुलकर, माइकल होल्डिंग, ब्रायन लारा और कई अन्य खिलाड़ी हुआ करते थे। वे पूरे दिन बल्लेबाजी कर सकते थे। मैं उस पीढ़ी में खेलने के लिए भाग्यशाली था।

Edited by Prashant Kumar
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