Ashes 2017: क्या इंग्लैंड कर सकेगी एशेज़ में वापसी ?

एशेज के पहले टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को बुरी तरह से धोकर रख दिया। गाबा के मैदान में दूसरी पारी में इंग्लैंड टीम ने जिस तरह से आत्मसमर्पण किया, उसने एशेज में इंग्लैंड की वापसी कर पाने की सम्भावनों पर भी प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। इंग्लैंड टीम ऑस्ट्रेलिया को ब्रिस्बेन में पिछले 31 सालों में हराने में नाकाम रही है, इस बार भी उसकी ये तमन्ना अधूरी ही रह गयी। इस मैच का विश्लेषण किया जाये तो आंकड़े भले ही ये दिखाएं कि ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को इस मैच में आसानी से हरा दिया। लेकिन ऐसा नहीं है कि इंग्लैंड शुरू से ही इस मैच से बाहर हो गया हो। अपने सबसे महत्वपूर्ण खिलाडी बेन स्टोक्स के बिना खेलने के बावजूद भी उनके पास इस मैच में अपनी पकड़ बनाने के कई मौके आये। लेकिन इंग्लैंड इन मौकों को भुनाने में पूरी तरह नाकाम रहा। यदि इंग्लैंड ने इनमें से कुछ मौके भी लपक लिए होते तो मैच का ये परिणाम नहीं होता। इंग्लैंड ने अगर उसे मिले लगभग सभी अवसर ग्रहण किये होते तो वो इस मैच में विजयी टीम भी हो सकती थी। सभी न सही इंग्लैंड ने आधे अवसरों का भी लाभ उठाया होता तो परिणाम ड्रॉ हो सकता था। या यदि इंग्लैंड हारती भी तो कड़े संघर्ष के बाद, लेकिन इंग्लैंड टीम ने अपनी राह में आये लगभग सभी अवसर गंवा दिए। इसका कारण इंग्लैंड के नए खिलाडियों की अनुभवहीनता तो थी ही, साथ-साथ अनुभवी खिलाडियों का भी निराशाजनक प्रदर्शन करना रहा। इस मैच में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 302 रन बनाये, हालांकि अनुभवी ओपनर एलिस्टेयर कुक जल्द ही आउट हो गए, लेकिन फिर मार्क स्टोनमैन और जेम्स विंस शानदार बल्लेबाजी करते हुए एक समय टीम का स्कोर 1 विकेट पर 127 रन तक ले गए। दोनों ने ही शानदार अर्धशतक लगाए और ऑस्ट्रेलिया को दबाव में ले आए। लेकिन फिर जल्दी-जल्दी विकेट गिरने से टीम का स्कोर 4 विकेट के नुकसान पर 164 रन हो गया। हालांकि इसके बाद मोईन अली और डेविड मलान ने अच्छी साझेदारी करते हुए 83 रन जोड़े। एक ओर मलान ने जहां अर्धशतक लगाया वहीं दूसरी ओर मोईन अली भी अच्छी लय में दिखे। लेकिन इनके बाद कोई और खिलाडी टिक कर नहीं खेल सका और टीम अपेक्षा के अनुरूप स्कोर तक नहीं पहुंच सकी। इसका परिणाम ये हुआ कि टीम ने न सिर्फ बड़ा स्कोर कड़ा करने का एक अच्छा मौका गंवाया, बल्कि ऑस्ट्रेलिया को अपनी गिरफ्त से निकलने का अवसर भी दे दिया। ऐसा नहीं है कि ये इंग्लैंड को मिला आखिरी मौका था, क्योंकि जब ऑस्ट्रेलिया ने पारी शुरुआत की तो इंग्लैंड को मैच में पकड़ बनाने का एक और बढ़िया मौका मिला था। अपनी पारी की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया ने जल्दी-जल्दी 4 विकेट मात्र 76 रन के स्कोर पर ही खो दिए थे। लेकिन इसके बाद कप्तान स्टीव स्मिथ और शॉन मार्श ने 99 रन की सांझेदारी करके टीम को संकट से उबार लिया। अर्धशतक जमाने के बाद जब मार्श आउट हुए तो इंग्लैंड के पास मैच में वापसी का एक और मौका आया। ऑस्ट्रेलिया के मध्यम क्रम के खिलाडी कुछ खास नहीं कर सके, लेकिन कप्तान स्मिथ ने अपनी जुझारू बल्लेबाजी जारी रखी। उन्होंने पैट कमिंस, हेजलवुड और नैथन लॉयन के साथ महत्वपूर्ण साझेदारियाँ करके न सिर्फ टीम के स्कोर को 328 तक पहुंचाया, बल्कि अपनी टीम को 26 रन की बढ़त भी दिलाई। पुछल्ले बल्लेबाजों के सहयोग से जहां स्मिथ 141 रन बनाकर नॉट आउट रहे, वहीं कमिंस ने भी महत्वपूर्ण 42 रनों की पारी खेली। जिससे इंग्लैंड के हाथ से वापसी का ये मौका भी जाता रहा। बढ़त छोटी होने के कारण इंग्लैंड के पास अपनी दूसरी पारी में अच्छा स्कोर खड़ा करके ऑस्ट्रेलिया को दबाब में लाने का एक और मौका हाथ आया। लेकिन अपनी दूसरी पारी में इंग्लैंड की बल्लेबाजी बुरी तरह ढह गई और मात्र 195 रनों पर ही आउट हो गई। इंग्लैंड की तरफ से कप्तान जो रूट, मोईन अली और जॉनी बेयरस्टो ही कुछ प्रतिरोध कर सके, बाकी बल्लेबाज क्रीज पर नहीं टिक सके। जिसका नतीजा ये हुआ कि न सिर्फ इस मैच में वापसी का एक और अवसर इंग्लैंड के हाथों से फिसल गया, बल्कि ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 170 रनों का मामूली सा लक्ष्य मिला। इंग्लैंड के बल्लेबाजों की ही तरह उनके गेंदबाजों ने भी दूसरी पारी में बुरी तरह निराश किया। हालांकि लक्ष्य विशाल नहीं था, लेकिन ऐसा जरूर था कि इंग्लैंड के गेंदबाज ऑस्ट्रेलिया के सामने चुनौती अवश्य पेश कर सकते थे। लेकिन इंग्लैंड ने इस अंतिम अवसर को भी आसानी से गंवा दिया। नतीजतन ऑस्ट्रेलिया को इस लक्ष्य को हासिल करने में जरा भी दिक्क़त नहीं हुई, और ऑस्ट्रेलिया 10 विकेट से ये मैच जीत गया और सीरीज में 1-0 से आगे हो गया। पिछले कुछ समय में किया गया प्रदर्शन और इस मैच में इंग्लैंड टीम द्वारा बनाये गए अवसर बताते हैं कि इंग्लैंड को अभी पूरी तरह ख़ारिज करना ठीक नहीं होगा। आने वाले मैचों में यदि इंग्लैंड ने इस प्रकार के अवसर नहीं गंवाए तो वो अवश्य ही पलटवार कर सकता है। लेकिन ऐसा तभी सम्भव हो पाएगा जब इंग्लैंड के वरिष्ठ खिलाडी जो रुट, एलिस्टेयर कुक, जॉनी बेयरस्टो, स्टुअर्ट ब्रॉड, जेम्स एंडरसन आदि अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए अपनी भूमिका सही ढ़ंग से निभाएं। अन्यथा पिछले कुछ समय में ऑस्ट्रेलियाई टीम के खराब प्रदर्शन के बावजूद उनसे ये अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वो अपनी ओर से इंग्लैंड को वापसी करने का अवसर देंगे। इस एशेज सीरीज में इंग्लैंड को पूरी तरह ख़ारिज नहीं करना चाहिए, अभी भी उनमें वापसी करने का माद्दा है। इसके लिए उन्हें अपनी पूरी ताकत झोंकनी होगी। उन्हें एक यूनिट की तरह एकजुट होकर खेलना होगा, जैसे इस समय भारतीय टीम कर रही है। वैसे इतिहास गवाह है कि 90 के दशक में भी जब ऑस्ट्रेलियाई टीम इंग्लैंड पर बुरी तरह हावी रहती थी, इंग्लैंड तब भी कम से कम एक मैच में तो अवश्य ही पलटवार करते हुए जीत हासिल करती थी। उम्मीद है कि इंग्लैंड टीम पिछले मैच की अपनी गलतियों से सबक लेकर वापसी करेगी और एशेज को एकतरफा नहीं होने देगी। वैसे इंग्लैंड को ये नहीं भूलना चाहिए कि यदि सीरीज बराबर भी रही तो भी पिछली बार की विजेता टीम होने के कारण वही एशेज ट्रॉफी अपने पास रखने की हकदार होगी। इंग्लैंड इस बात को ध्यान में रखकर अच्छे प्रदर्शन की प्रेरणा पा सकती है। क्रिकेट प्रेमी भी यही चाहते हैं कि एशेज जीते भले ही कोई भी, लेकिन एशेज सीरीज रोमांचक होनी चाहिए और यदि परिणाम पिछली बार की तरह ही 3-2 हो, फिर तो कहना ही क्या।

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