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सीमित ओवर क्रिकेट में कोहली और धोनी की 5 सबसे बड़ी साझेदारियां

Modified 20 Jan 2017
क्रिकेट में पार्टनरशिप का अहम रोल होता है फिर चाहे वो गेंद से हो या बल्ले से, दो खिलाड़ी अहम साझेदारी कर अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाते हैं। भारतीय क्रिकेट में हमेशा से ही बड़ी साझेदारियां हुई हैं फिर चाहे वो सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली के बीच हो, या फिर बाद में सिचन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग के बीच। भारतीय टीम के इन दिग्गज ओपनर्स ने ना जाने कितनी ही बार अहम साझेदारियां कर टीम इंडिया की जीत की नींव रखी। वहीं गेंदबाजों की बात की जाए तो 90 के दशक में तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद और जवागल श्रीनाथ की जोड़ी और स्पिन डिपार्टमेंट में हरभजन सिंह और अनिल कुंबले की जोड़ी ने भारतीय क्रिकेट तो कई यादगार लम्हे दिए हैं। सिर्फ ओपनर्स की नहीं मिडिल ऑर्डर और लोअर ऑर्डर की साझेदारियों का भी उतना ही महत्व होता है। भारतीय टीम में एम एस धोनी और युवराज सिंह के बीच मिडिल ऑर्डर में कुछ अच्छी साझेदारियां हुई हैं। यहां तक कि 2011 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में भी युवराज सिंह और धोनी के बीच हुई पार्टनरशिप जीत की अहम वजह रही लेकिन जब बात एम एस धोनी और विराट कोहली की पार्टनरशिप आती है तो इन दोनों का कोई सानी नहीं है। 5-भारत Vs ऑस्ट्रेलिया 31 मार्च 2016- मोहाली mohali   वर्ल्ड टी 20 के सेमीफाइनल मुकाबले में अपनी जगह पक्की करने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें आमने-सामने थी। ऑस्ट्रेलिया टी 20 में जीत दर्ज कर भारत से अपना 2011 वर्ल्ड कप का हिसाब भी बराबर करना चाहती थी। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 160 रन बनाए। इसके बाद जब धोनी विराट कोहली का साथ निभाने क्रीज पर उतरे तो उस समय टीम इंडिया 14 ओवर के बाद 94 रन पर 4 विकेट खो चुकी थी। अब इस समय कप्तान धोनी ने बैक सीट लेते हुए विराट को ज्यादा से ज्यादा मौके दिए और दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर 5.1 ओवर में 67 रन बनाए। भारत ने 5 गेंद रहते ही इस मैच में जीत दर्ज की। इस मैच में कोहली ने नाबाद 82 रन की पारी खेली। जो टी 20 क्रिकेट में उनकी बेस्ट पारियों में शुमार है।
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Published 20 Jan 2017
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