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पूर्व ICC अध्यक्ष एहसान मनी ने पीसीबी की तुलना भिखारियों से की

FEATURED COLUMNIST
Modified 11 Oct 2018, 13:30 IST
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पूर्व आईसीसी अध्यक्ष एहसान मनी ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की तुलना भिखारियों से की है और उन्हें यह सलाह भी दी है कि वो अपने खर्चों पर लगाम लगाएं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, "जो पीसीबी ने किया वो बहुत ज्यादा शर्मनाक था। यह काफी निराशाजनक भी था, आईसीसी से मदद मांगने से अच्छा वो अपने खर्चों पर लगाम लगाते।" पाकिस्तान ने हाल ही में आईसीसी से एक स्पेशल फ़ंड की मदद मांगी, जिससे वो अपने नुकसान की भरपाई कर सके, जो उन्हें पाकिस्तान में मैच न होने की वजह से हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में जिस तरह ढाका में आतंकी हमला हुआ, उससे बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड भी, पीसीबी की तरह मैच होस्ट करने में दिक्कत आएंगी। पिछले हफ्ते ढाका में हुए हमले में 20 विदेशी लोग मारे गए और कई लोग घायल भी हुए। इस हादसे से सितंबर में इंग्लैंड के बांग्लादेश दौरे पर भी संदेह के बादल छा गए हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो एहसान मनी ने इंटरव्यू में कहा, "ढाका में जो कुछ भी हुआ, उसे देखते हुए तो यही लगता है कि पाकिस्तान की तरह अब बांग्लादेश को भी दूसरे देशों को अपने यहाँ बुलाकर खेलने में काफी मुश्किलात आने वाली है।" "कुछ साल पहले भी वेस्ट इंडीज की अंडर 16 टीम, बांग्लादेश से सुरक्षा को लेकर अपने घर लौट गई थी और ऑस्ट्रेलिया भी इस साल हुए अंडर 19 विश्व कप में से हट गई थी। मैंने पहले भी कहा है कि पाकिस्तान को अपनी सरकार से बिना मदद लिए, कुछ बड़े कदम उठाने की ज़रूरत हैं। जब तक बीसीसीआई पाकिस्तान के साथ खेलने को लेकर अपना वादा पूरा नहीं करती, उन्हें किसी भी आईसीसी इवेंट में भारत के साथ नहीं खेलना चाहिए।" मनी को ऐसा लगता है कि अगर बीसीबी दूसरे देशों को अपने यहाँ बुलाकर खेलने में कामयाब हो गई, तो यह पीसीबी के हालातों को संभालने के तरीकों पर भी सवाल उठाएगा। 2009 में जब से श्री लंकन टीम पर पाकिस्तान में आतंकी हमला हुआ हैं, तब से कोई भी देश पाकिस्तान जाने को राजी नहीं हैं। पूर्व आईसीसी अध्यक्ष ने कहा कि पीसीबी अपने खर्चें पर लगाम लगा सकता है, अगर वो अपनी सरकार को दखल ना देने दे तो। उन्होंने कहा, "अगर पीसीबी को सच्ची में पैसों की तंगी है, तो वो खुद कुछ कदम क्यूँ नहीं उठाती। उनके यहाँ लगभग 1000 कर्मचारी काम करते हैं, क्या उनकी ज़रूरत है।" लेखक- सौनक, अनुवादक- मयंक महता 
Published 06 Jul 2016, 18:39 IST
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