टीम इंडिया के कोच की दौड़ में आया 1983 विश्व विजेता टीम का ये खिलाड़ी

भारतीय क्रिकेट टीम के ख़ाली पड़े कोच के पद के लिए जारी दौड़ में एक और दिग्गज शामिल हो गए हैं। पूर्व भारतीय सीम गेंदबाज़ बलविंदर सिंह संधू ने भी बीसीसीआई को कोच पद के लिए आवेदन दिया है। संधू 1983 वर्ल्ड चैंपियन टीम इंडिया का अहम हिस्सा थे। 59 वर्षीय बलविंदर सिंह ने 7 मई को ही ईमेल के ज़रिए बीसीसीआई को कोच पद के लिए आवेदन दिया था और अब उन्होंने हार्ड कॉपी भी जमा कर दी है। संधू के अलावा 1983 वर्ल्डकप विजेता टीम के सदस्य संदीप पाटिल और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व निदेशक रवि शास्त्री ने भी इस पद के लिए अप्लाई किया है। यानी बलविंदर सिंह संधू ने इस दौड़ को अब त्रिकोणीय बना दिया है। बलविंदर सिंह संधू ने 1983 वर्ल्डकप के फ़ाइनल मुक़ाबले में टीम इंडिया को पहली विकेट दिलाई थी, जब उन्होंने अपनी इनस्वींग पर गॉर्डन ग्रीनीज को क्लीन बोल्ड कर दिया था। अंग्रेज़ी अख़बार मिड डे को दिए एक इंटरव्यू में संधू ने कहा, "मुझे पता है कि कोच पद के लिए मेरे अलावा मेरे पुराने साथी संदीप पाटिल और रवि शास्त्री ने भी आवेदन दिया है। मैं अपने साथियों को शुभकामनाएं देता हूं, संदीप को मैं बहुत सालों से जान रहा हूं और जहां तक रवि का सवाल है तो हम यूनिवर्सिटी के दिनों से साथ क्रिकेट खेल रहे हैं।" संधू ने टीम इंडिया के लिए डेब्यू पाकिस्तान के ख़िलाफ़ गुजरनवाला में 1982 में किया था। भारत के लिए बलविंदर सिंह संधू ने 8 टेस्ट और 22 वनडे खेले हैं, जिसमें उनके नाम 10 टेस्ट विकेट और 16 वनडे विकेट शामिल हैं। संधू ने अपना आख़िरी अंतर्राष्ट्रीय मुक़ाबला पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सियालकोट में 1984 में खेला था, उसके बाद उन्हें दोबारा फिर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने का मौक़ा नहीं मिला, लेकिन संधू ने 1987 तक मुंबई के लिए घरेलू क्रिकेट खेलना जारी रखा। प्रोफ़ेश्नल क्रिकेट छोड़ते ही संधू ने क्रिकेट कोच के तौर पर अपने आपको साबित किया, उन्होंने शुरुआत लोकल स्तर पर की और फिर बीसीए मफ़तलाल बॉलिंग स्कीम में 1990 तक एक सफल कोच के तौर पर ख़ुद को स्थापित किया। 1996-97 में बलविंदर सिंह संधू की ही कोचिंग के अंदर मुंबई रणजी चैंपियन बनी थी। अब इंतज़ार बीसीसीआई के फ़ैसले का है कि आख़िर इनमें से उनकी नज़र में कौन इस पद के लिए है क़ाबिल उम्मीदवार।

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