क्रिकेट के वह 11 महान खिलाड़ी जिनके हाथ न लग सकी कभी विश्व कप की ट्रॉफी

फीफा विश्वकप 2018 रूस में खेला जा रहा है, इस विश्वकप में रोनाल्डो और मेसी जैसे कई महानतम खिलाड़ी खेले, यकीनन वो विश्व के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक हैं। लेकिन ये अपनी टीम को विश्वकप दिलाने में अभी भी सफल नहीं हो पाए जबकि अब तक ये खिलाड़ी चार बार अपनी टीम की ओर से विश्वकप में खेल चुके हैं। तमाम खूबियों के बावजूद आपको कभी-कभी खेल में मायूसी ही हाथ लगती है। जेंटलमैन गेम कहे जाने वाले क्रिकेट के साथ भी कुछ ऐसा ही है। क्रिकेट में भी कई ऐसे महान खिलाड़ी हैं जो अपने पूरे करियर के दौरान बेहतरीन खेले लेकिन बात जब विश्वकप जीतने वाली टीम में उनके नाम की हो तो उनका नाम उस लिस्ट में नहीं दिखता है। विश्वकप जीतना शायद इतना आसान नहीं खुद क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को भी इस विश्वकप को अपने हाथ में थामने के लिए छह बार से ज़्यादा का इंतजार करना पड़ा था। इसी तरह कई ऐसे महान क्रिकेटर हैं जो शायद विश्वकप की ट्रॉफी को अपने हाथ में थामना चाहते थे लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाए। आइए ऐसे ही 11 क्रिकेटरों की प्लेइंग इलेवन बनाते हैं। जिन्होंने अपने पूरे करियर में बेहतरीन प्रदर्शन किया लेकिन क्रिकेट विश्वकप की ट्रॉफी उनके हाथ नहीं आ पाई। नोट- इस फ़ेहरिस्त में सिर्फ उन खिलाड़ियों को शामिल किया गया जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है।

सलामी बल्लेबाज़- तिलकरत्ने दिलशान और सौरव गांगुली (कप्तान)

आईसीसी विश्व कप न जीतने के लिए बहुत सारे शानदार सलामी बल्लेबाज दुर्भाग्यपूर्ण रहे। सईद अनवर, हर्शेल गिब्स, गैरी कर्स्टन इत्यादि ने अपना सबकुछ दिया लेकिन क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफी पर हाथ रखने में नाकाम रहे। हमारे ग्यारह खिलाड़ियों में सलामी बल्लेबाज भारत महान सौरव गांगुली होंगे, जो इस टीम के कप्तान भी हैं और उनका साथ देगे श्रीलंका के पूर्व कप्तान तिलकरत्ने दिलशान। गांगुली को तीन विश्वकप संस्करणों में शामिल किया गया और 2003 के संस्करण में फाइनल में अपनी टीम का नेतृत्व किया, जो कि विश्व कप में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। दूसरी तरफ दिलशान श्रीलंका के लिए बल्लेबाजी शुरूआत करने वाले आक्रमक खिलाड़ी रहे। दाएं हाथ के खिलाड़ी को विश्व कप के तीन संस्करणों में शामिल किया गया और दो बार फाइनल में हारने वाले पक्ष के साथ सफर समाप्त हो गया।संयुक्त रूप से कुल 21,653 रनों के साथ दोनों वनडे प्रारूप में एक मजबूत सलामी जोड़ी संयोजन बना सकते हैं।

मध्यक्रम बल्लेबाज- राहुल द्रविड़, महेला जयवर्धने और एबी डीविलियर्स

नंबर 3 पर बल्लेबाजी करने वाले महान क्रिकेटर राहुल द्रविड़ भी विश्वकप जीतने वाली टीम का हिस्सा नहीं बन सके। द्रविड़ को हाल ही में आईसीसी ने हाल ऑफ फेम में शामिल किया है। बता दें कि द्रविड़ का नाम उन क्रिकेटरों में शामिल हैं जिन्होंने टेस्ट और वनडे दोनों ही प्रारूपों में दस हजार से ज्यादा रन बनाए हैं। वैसे द्रविड़ विश्वकप 2003 में टीम इंडिया का हिस्सा थे जब भारत विश्वकप फाइनल में पहुंचा था लेकिन ट्रॉफी भारत की नहीं हो पाई थी। इसी तरह से श्रीलंकाई क्रिकेटर महेला जयवर्धने ने श्रीलंकाई टीम की ओर से पांच बार विश्वकप में हिस्सा लिया लेकिन दुर्भाग्यवश वो भी विश्वकप जीतने वाली टीम का हिस्सा नहीं बन पाए। जयवर्धने भी उन क्रिकेटरों में शामिल हैं जिन्होंने टेस्ट और वनडे दोनों ही प्रारूपों में दस हजार से ज्यादा रन बनाए हैं। विश्व के महान बल्लेबाजों में शामिल एबी डीविलियर्स को शायद ही कोई न जानता हो इस साउथ अफ्रीकन खिलाड़ी के फैन्स सभी जगह थे। हाल ही में उनके क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद सभी क्रिकेट प्रेमियों को झटका लगा। संन्यास लेने के बावजूद दुनिया भर में उनके लाखों फैन्स हैं। दुर्भाग्यवश डीविलियर्स का नाम भी उन खिलाड़ियों में आता है जो अपनी टीम को विश्वकप जीताने में असफल रहे हैं। डीविलियर्स, द्रविड़ और जयवर्धने इस टीम के मध्यक्रम बल्लेबाज होंगे।

विकेटकीपर और ऑल राउंडर- कुमार संगकारा, शाहिद आफरीदी

एकदिवसीय प्रारूप में 14,234 रन बनाने वाले पूर्व श्रीलंकाई कप्तान कुमार संगकारा महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के बाद दूसरे नंबर पर हैं जिन्होंने वनडे मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाए हैं। बिना किसी शक के वो उन महान खिलाड़ियों में से एक हैं जो विश्वकप की ट्रॉफी के हकदार थे लेकिन अफसोस 2003, 2007, 2011 और 2015 में क्रिकेट के इस महाकुंभ में हिस्सा लेने के बाद ये ट्रॉफी उनके हाथ न लग सकी। हालांकि इस दौरान उन्होंने दो विश्वकप फाइनल जरूर खेले लेकिन उनकी टीम दोनों बार हार गई। पाकिस्तान की ओर खेलने वाले बेहतरीन ऑलराउंडर शाहिद आफरीदी ने 16 साल की उम्र में 1996 के विश्वकप के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना पदार्पण किया। तबसे लेकर अफ्रीदी ने 398 एकदिवसीय मैचों में आठ हजार से ज्यादा रन और 395 विकेट लिए। उन्होंने कुल पांच बार विश्वकप टूर्नामेंट में हिस्सा लिया लेकिन ये ट्रॉफी उनके भी हाथ न लग सकी। अधिकतम उन्हें भी विश्वकप फाइनल खेलकर ही संतोष करना पड़ा लेकिन विश्वकप में जीत उन्हें नहीं मिली। आफरीदी इस टीम के ऑलराउंडर और संगाकारा विकेटकीपर की भूमिका में होंगे।

स्पिनर- सकलैन मुश्ताक

शाहिद आफरीदी जिस टीम में हों वहां दूसरे स्पिनर की जरूरत ज्यादा नहीं पड़ती आफरादी खुद वनडे में एक खिलाड़ी के कोटे के 10 ओवर बड़ी आसानी से डाल सकते हैं। लेकिन टीम में एक ऑफ स्पिनर होने जिसके तरकश में कई किस्म की गेंदे हो वो उस टीम को और अधिक मजबूत बनाता है। जी हां पाकिस्तान के बेहतरीन ऑफ स्पिनर सकलैन मुश्ताक ने सिर्फ 169 एकदिवसीय मैच खेले और 21.7 के औसत से 288 विकेट लिए। सकलैन का नाम एक लंबे समय तक वनडे क्रिकेट सबसे तेजी से 100 विकेट लेने वाले गेंदबाजों में शामिल था। अपने करियर में सकलैन मुश्ताक ने तीन विश्वकप में हिस्सा लिया लेकिन अफसोस विश्वकप की ट्रॉफी उनके हाथ भी नहीं लग सकी। आफरीदी और सकलैन के साथ दिलशान भी छठे गेंदबाज के तौर पर गेंदबाजी कर सकते हैं जो कि ज़रूरत पड़ने पर किफायती ऑफ स्पिन डाल सकते हैं।

तेज गेंदबाज- शॉन पोलाक, वकार यूनिस, एलन डोनाल्ड

इस टीम में तेज गेंदबाजी के लिए पाकिस्तान के महान गेंदबाज वकार यूनिस, शॉन पोलाक और एलन डोनाल्ड होंगे। वकार जिनका एकदिवसीय करियर 1989 में शुरू हुआ था। वकार 1992 का विश्वकप खेल सकते थे जिसे पाकिस्तान ने जीता था लेकिन उस समय पाकिस्तान की टीम में काफी बेहतरीन तेज गेंदबाज थे जिसकी वजह से वकार की जगह नहीं बन पाई। उसके बाद वकार ने पाकिस्तान की ओर से तीन विश्वकप टूर्नामेंट में हिस्सा लिया लेकिन विश्वकप की ट्रॉफी उनके हाथ नहीं लग पाई और 2003 के बाद से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। बात पोलाक और डोनाल्ड की करें तो इन दोनों खिलाड़ियों ने चार विश्वकप टूर्नामेंट (डोनाल्ड ने 92, 96, 99, 2003 और पोलाक ने 96, 99, 2003 और 2007 विश्वकप) में हिस्सा लिया लेकिन दुर्भाग्यवश इन दोनों के हाथ विश्वकप की ट्रॉफी नहीं लगी। दोनों खिलाड़ियों ने कुल मिलाकर 665 एकदिवसीय विकेट लिए लेकिन दोनों को बिना विश्वकप जीते ही सन्यास लेना पड़ा। लेखक- नवीन अनुवादक- सौम्या तिवारी

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