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क्या मनीष पांडे ने टीम इंडिया की नंबर-5 पर चली आ रही समस्या का समाधान कर दिया ?

श्रीलंका में जारी 3 देशों की टी20 ट्राई सीरीज़ में टीम इंडिया ने कई सीनियर खिलाड़ियों को आराम देते हुए बेंच स्ट्रेंथ परखने की कोशिश कर रही है। जिसका शानदार फल भारतीय क्रिकेट टीम को मिलता हुआ नज़र आ रहा है, इनमें से कुछ नतीजे 2019 वर्ल्डकप की टीम चुनने में भी काम आ सकते हैं। यही वजह है कि टीम मैनेजमेंट इस सीरीज़ में सुरेश रैना, मनीष पांडे, दिनेश कार्तिक, वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ियों को पूरा मौक़ा दे रही है। इन मौकों का फ़ायदा उठाते हुए खिलाड़ी भी टीम इंडिया में अपनी दावेदारी मज़बूत कर रहे हैं। इन खिलाड़ियों में अगर किसी ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया है तो वह हैं दाएं हाथ के मध्यक्रम बल्लेबाज़ मनीष पांडे। जिनकी प्रतिभा पर किसी को कभी शक़ नहीं हुआ है, फिर चाहे डेब्यू वनडे में 71 रनों की शानदार पारी हो या सिडनी में मेज़बान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ 104 नाबाद रनों की दिलकश पारी। हालांकि इसके बाद भी मनीष ख़ुद को बदक़िस्मत ही कहेंगे कि आज तक वह टीम इंडिया का नियमित हिस्सा नहीं बन पाए हैं, और दल में रहते हुए भी उन्हें प्लेइंग-XI में अपनी बारी के लिए काफ़ी इंतज़ार करना पड़ता है। दक्षिण अफ़्रीकी दौरे पर भी मनीष पांडे सीमित ओवर टीम का हिस्सा थे, लेकिन उन्हें वनडे में अंतिम एकादश में शामिल होने का मौक़ा नहीं मिल पाया। जिसकी कसक उन्हें ज़रूर थी, और यही वजह थी कि जैसे ही टी20 में उन्हें जोहांसबर्ग में शामिल किया गया तो उनपर दबाव साफ़ झलक रहा था। जहां उन्हें 29 रनों के लिए 27 गेंदों का सामना करना पड़ा, इस पारी के बाद पांडे की काफ़ी आलोचना हुई थी लेकिन उन्होंने अगली ही पारी में सभी का मुंह बंद कर दिया, जब केपटाउन टी20 में मनीष पांडे ने 48 गेंदों पर आतिशी 79 नाबाद रन बनाए और 28 गेंदों पर 52 नाबाद रन बनाने वाले महेंद्र सिंह धोनी का शानदार साथ दिया। इस पारी ने मनीष पांडे के आत्मविश्वास में काफ़ी इज़ाफ़ा किया, और इसकी झलक ट्राई सीरीज़ में भी देखने को मिल रही है। जहां टीम इंडिया को उन्होंने पिछले दो मैचों में नाज़ुक मौक़ों पर जीत दिलाई है और दोनों ही बार नाबाद लौटे हैं। मनीष पांडे की पिछली 6 अंतर्राष्ट्रीय पारी पर नज़र डालें तो उन्होंने 42*, 27*, 37, 13, 79* और 29* रन बनाए हैं। यानी 6 पारियों में 4 बार नॉट आउट रहते हुए 113.5 की बेमिसाल औसत से 227 रन। इतना ही नहीं जिन दो पारियों में मनीष आउट हुए थे वह उन्होंने नंबर-4 पर खेली थी, नंबर-5 पर तो वह पिछली 4 पारियों में लगातार नॉट आउट रहे हैं और टीम इंडिया के लिए एक शानदार मैच फ़िनिशर साबित हुए हैं। मनीष पांडे के इस लाजवाब लय ने कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली के लिए भी एक उम्मीद की किरण जगा दी है। दरअसल, सीमित ओवर क्रिकेट में ख़ास तौर से वनडे में भारत की नंबर-4 और नंबर-5 की समस्या का अब तक कोई ठोस हल नहीं निकल पाया है। नंबर-4 पर अंजिक्य रहाणे और दिनेश कार्तिक के तौर पर तो टीम इंडिया लगातार प्रयोग कर रही है, और अब इस क्रम पर वापसी कर रहे सुरेश रैना भी अपनी दावेदारी धीरे धीरे मज़बूत करते जा रहे हैं। लेकिन नंबर-5 पर केदार जाधव का ख़राब फ़ॉर्म निरंतरता की कमी भारत को हमेशा परेशान करती है। ऐसे में मनीष पांडे इस जगह को भरने के बड़े दावेदार मालूम पड़ते हैं, पांडे के लिए ये कोई नई भूमिका भी नहीं है। मनीष पांडे ने अब तक 22 वनडे मैचों की 17 पारियों में 39.27 की प्रभावशाली औसत के साथ 432 रन बनाए हैं, जिनमें 2 अर्धशतक और एक शतक शामिल है। लिहाज़ा विराट कोहली के ‘मिशन 2019’ में दाएं हाथ का ये बल्लेबाज़ नंबर-5 पर खेलते हुए टीम इंडिया को तीसरा विश्वकप दिलाने में अहम योगदान दे सकता है। ज़िम्बाब्वे, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ़्रीका में अपनी लाजवाब बल्लेबाज़ी से उन्होंने ये भी साबित किया है कि वह विपरित परिस्थितियों में भी टीम को संकट से निकालने की क़ाबिलियत रखते हैं।

Edited by Staff Editor
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