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Hindi Cricket News: आईसीसी का बड़ा फैसला, परीक्षण के तौर पर अब टीवी अंपायर करेंगे नो बॉल का फैसला

Rahul Pandey
ANALYST
न्यूज़
07 Aug 2019, 18:27 IST

फ्रंट फुट नो बॉल पर अब टीवी अंपायर करेंगे फैसला
फ्रंट फुट नो बॉल पर अब टीवी अंपायर करेंगे फैसला

मौजूदा अंपायरिंग मानकों के लिए हाल फिलहाल में बढ़ती आलोचना के बीच, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने घोषणा की है कि वो थर्ड अंपायर द्वारा फ्रंट-फ़ुट नो-बॉल का फैसला देने का परीक्षण शुरू करेंगे। आईसीसी अगले छह महीनों में कुछ चुनिंदा सीरीज़ में इस नई प्रणाली का परीक्षण करेगा और अगर यह सफल साबित होता है, तो आईसीसी इसे अंपायरों के लिए एक स्थायी व्यवस्था बनाने की संभावनाओं पर गौर करेगा।

दिलचस्प बात यह है कि इस पद्धति का परीक्षण तीन साल पहले इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच एक श्रृंखला के दौरान किया गया था। आईसीसी के जनरल मैनेजर ज्योफ एलरडाइस ने क्रिकइंफो को बताया 'तीसरे अंपायर को आगे का पांव पड़ने के कुछ सेकेंड के बाद फुटेज दी जाएगी। वह मैदानी अंपायर को बताएगा कि नो बॉल की गई है। इसलिए गेंद को तब तक मान्य माना जाएगा जब तक अंपायर कोई अन्य फैसला नहीं लेता।'

उन्होंने बताया "क्रिकेट समिति ने सिफारिश की थी कि हम इसे सभी एकदिवसीय मैचों और टी20 मैचों में लागू करें। 2018 में पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन प्रारूपों में दुनिया भर में लगभग 84,000 गेंदें फेंकी गई थीं। इसलिए प्रत्येक डिलीवरी पर नो-बॉल की निगरानी करना एक बड़ा कार्य है। इसलिए सभी मैचों में इसे लागू करने से पहले इसकी चुनौतियों को समझना जरुरी है।"

आईसीसी ने पिछले साल घोषणा की थी कि सदस्य देशों के बीच सभी मैचों को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा प्राप्त होगा इसलिए अब मैचों की संख्या भी अधिक होगी। इसलिए, यह योजना एक सामान लागू करने में मुश्किलें होंगी क्योंकि सभी स्थानों पर प्रसारण के उच्च स्तर के लिए आवश्यक व्यवस्था नहीं है। इन जगहों पर टेलीविजन कवरेज के विभिन्न स्तर हैं, इसलिए कुछ मैचों में दूसरों की तुलना में इसे लागू करना मुश्किल होगा।

आम तौर पर थर्ड अंपायर तभी नो बॉल चेक करते हैं जब कोई विकेट गिरता है लेकिन हर गेंद पर नो बॉल थर्ड अंपायर द्वारा नहीं चेक की जाती है। जब मैदान पर मौजूद अंपायर की नजर पड़ती है तभी वो नो बॉल देता है। इसी वजह से कई बार बहुत सारे नो-बॉल नियमित रूप से छूट जाते हैं। ऐसा हमें कई मैचों में देखने को मिला है। यही वजह है कि आईसीसी ये परीक्षण करना चाहती है। आईसीसी को उम्मीद है कि यह नया परीक्षण सफल होगा और ऑन-फील्ड अंपायरों के ऊपर से इससे बोझ कम होगा।

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