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भारत-पाक की ख़िताबी भिड़ंत से ICC, PCB और BCCI के साथ-साथ भारत और पड़ोसी देश पर क्या होगा असर ?

Syed Hussain
ANALYST
Modified 21 Sep 2018, 20:30 IST
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चैंपियंस ट्रॉफ़ी की ख़िताबी भिड़ंत में अब कुछ ही घंटो का वक़्त बचा है, जहां दो कट्टर प्रतिद्वंद्वी भारत और पाकिस्तान आमने-सामने होंगे। जब इन दो देशों के बीच क्रिकेट के मैदान में जंग होती है तो वह किसी LoC की लड़ाई से कम नहीं मानी जाती। और वह भी तब जब मुक़ाबला क्रिकेट के दूसरे सबसे बड़े टूर्नामेंट चैंपियंस ट्रॉफ़ी के चैंपियन बनने का हो। रोमांच और टेंशन से भरे भारत-पाक के मुक़ाबले के लिए दोनों देशों की सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है, सिनेमा हॉल्स से लेकर मार्केट तक में लोगों का हुजूम कम हो जाता है। रविवार का दिन होने की वजह से भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ पूरी दुनिया के क्रिकेट फ़ैन्स टेलीवीज़न सेट पर नज़रे गढ़ाए बैठे होंगे। # भारत-पाक मुक़ाबला मतलब पैसों की बारिश मतलब ब्रॉडकास्टर की तो चांदी ही चांदी, जहां कुछ सेकंड्स के प्रचार के लिए पैसों की बारिश क्या सुनामी समझिए। बात पैसों की हो तो आईसीसी को भी इससे ज़्यादा और कोई मुक़ाबला मुनाफ़ा नहीं दे सकता था। लिहाज़ा भारत-पाक की ख़िताबी भिड़ंत से आईसीसी भी बहुत ख़ुश है, और ख़ुशी कंगाली की दौर से गुज़र रहे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड में भी है। तो क्रिकेट का पॉवर हाउस कहे जाने वाले बीसीसीआई के लिए भी ये मुक़ाबला सोने पर सुहागा जैसा होगा। एक अनुमान के मुताबिक़ भारत और पाकिस्तान के बीच मुक़ाबले से होने वाली कमाई दूसरे मुक़ाबलों से दोगुनी से भी ज़्यादा हो जाती है। फिर ये तो कोई मामूली मुक़ाबला भी नहीं चैंपियंस ट्रॉफ़ी की फ़ाइनल जंग है। # मुक़ाबला नहीं इज़्ज़्त और वर्चस्व की लड़ाई मैच भले ही लंदन के ओवल में खेला जाएगा लेकिन इसकी धमक, दबाव और रणनीति सिर्फ़ मैदान में मौजूद दोनों देशों के 22 खिलाड़ी नहीं बना रहे होंगे, बल्कि भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ पूरी दुनिया में मौजूद इन दोनों देशों के क्रिकेट फ़ैन्स के दिमाग़ में भी रणनीति बन रही होगी और मैच के बदलते लम्हों में दुआओं के लिए हाथ उठ रहे होंगे। हार तो न भारत को पसंद है और न ही पाकिस्तान को बर्दाश्त, एक लम्हें के लिए खिलाड़ी तो स्पोर्ट्समैनशिप के तहत हार और जीत को स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन फ़ैन्स के लिए ये खेल नहीं युद्ध का मैदान हो जाता है जहां जीत से कम कुछ गंवारा नहीं। भारतीय फ़ैन्स तो समय के साथ साथ हार पचा लेते हैं, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान की तस्वीर कुछ अलग है। फ़ैन्स का ग़ुस्सा जहां टीवी सेट पर निकलता है तो क्रिकेट बोर्ड अपने खिलाड़ियों और कोच पर निकालता है। # क्रिकेट की आड़ में राजनैतिक पार्टियां सेंकती हैं रोटियां क्रिकेट को लेकर भारत और पाकिस्तान में जुनून किसी से छिपा नहीं है और इसका बख़ूबी फ़ायदा राजनैतिक पार्टियां भी जम कर उठाती हैं। चैंपियंस ट्रॉफ़ी में हुए भारत-पाक के लीग मुक़ाबले में भी ये जमकर नज़र आया था जब कुछ पार्टियों और राजनेताओं के साथ साथ मीडिया हाउस ने भी भारत-पाक के मुक़ाबले को देश हित में न रखते हुए बहिष्कार करने का फ़ैसला किया था। हालांकि इससे क्रिकेट फ़ैन्स के जज़्बे पर कोई असर नहीं पड़ा था और लोगों ने जमकर इसका लुत्फ़ उठाया था और फिर अब जब ख़िताबी मुक़ाबला है तो ज़ाहिर है अभी से ही राजनैतिक पार्टियां इसपर अपनी रोटी सेंकने की कोशिश में जुट गई हैं। # सोशल माडिया पर फ़ाइनल मुक़ाबला #FathersDay में  हुआ तब्दील     मैदान पर मुक़ाबला शुरू होने में तो अभी वक़्त है लेकिन सोशल मीडिया पर भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली ख़िताबी भिड़ंत से पहले ही जंग शुरू हो चुकी है। दोनों ही देशों के क्रिकेट फ़ैन्स के बीच हंसी मज़ाक के साथ साथ नोंक झोंक भी जारी है। कईयों ने तो भारत की जीत पहले ही पक्की कर दी है तो पाकिस्तानी फ़ैन्स को उम्मीद है कि लीग मैच में मिली हार का बदला पाकिस्तान फ़ाइनल में जीत के साथ पूरा कर लेगा। इतना ही नहीं भारतीय क्रिकेट फ़ैन्स तो इसे #FathersDay में तब्दील कर चुके हैं। दरअसल, 18 जून को फ़ादर्स डे के रूप में मनाया जाता है और उसी दिन मुक़ाबला भी होना है लिहाज़ा भारतीय फ़ैन्स ने भारत को बाप और पाकिस्तान को बेटा मानते हुए इस मैच को ही फ़ादर्स डे की संज्ञा दे दी है। सिर्फ़ फ़ैन्स ही नहीं दोनों देशों के पूर्व क्रिकेटर्स और क्रिकेट एक्सपर्ट के बीच भी ख़ूब तू तू मैं मैं जारी है। वीरेंद्र सहवाग और राशिद लतीफ़ का विवाद अभी ख़त्म ही नहीं हुआ था कि सहवाग ने एक और ट्वीट करते हुए इसे बाप और बेटे की लड़ाई क़रार दे दी।  

# पाकिस्तानी मीडिया और क्रिकेटर्स ने पहले ही टेक दिए घुटने भारत और पाकिस्तान की इस बड़ी और ख़िताबी भिड़त को लेकर एक चीज़ जो चौंकाने वाली दिख रही है वह है पाकिस्तानी मीडिया का द्रष्टिकोण। पाकिस्तानी मीडिया इस मैच को लेकर अपने देश को दावेदार न मानने की बजाए उन्हें हिदायत दे रही है कि ज़्यादा ख़ुश न होने की बजाए मैदान पर अच्छी क्रिकेट खेलने की ज़रूरत है। पाकिस्तान के अंग्रेज़ी अख़बार द डॉन ने तो साफ़ लिखा है कि पाकिस्तान का फ़ाइनल में पहुंचना 65 साल के क्रिकेट में शानदार है, लेकिन भारत के मौजूदा फ़ॉर्म को देखते हुए उन्हें हराना बेहद मुश्किल है। तो वहीं पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज सलामी बल्लेबाज़ आमिर सोहैल ने तो अपनी टीम पर सवाल खड़े करते हुए कह डाला, ‘’फ़ाइनल में पहुंचने के बाद ज़्यादा ख़ुश होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि ये सभी जानते हैं कि पाकिस्तान यहां तक अच्छी क्रिकेट से नहीं बाहरी ताक़तों की वजह से पहुंचा है।‘’ सोहैल के इस बयान के बाद पाकिस्तान में उनकी आलोचना भी हो रही है। बहरहाल, एक बात तो साफ़ है एशिया की इन दो महाशक्तियों के बीच होने वाली इस ख़िताबी भिडंत में क़ाग़ज पर क्या चल रहा है वह बस मैच के पहले ही मायने करेगा। रविवार को लंदन के ओवल में उतरते ही भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश एक दूसरे को ज़रा भी मौक़ा नहीं देने वाले। भारत जहां 2007 वर्ल्ड टी20 की ख़िताबी भिड़ंत के इतिहास को दोहराने के इरादे से उतरेगा तो पाकिस्तान बदले की आग के साथ टीम इंडिया पर टूटना चाहेगा। आप भी हो जाइए तैयार क्योंकि इस मैच का असर भले ही बीसीसीआई, आईसीसी और पीसीबी के लिए तिजोरी भरने का काम करे, लेकिन एक क्रिकेट फ़ैन के लिए ये मुक़ाबला उनके लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं। Published 17 Jun 2017, 10:01 IST
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