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भारतीय क्रिकेट टीम की शारजाह के रेगिस्तान से धुंधली यादें

Rahul Pandey
ANALYST
Modified 13 Feb 2018

 

शारजाह का भूत

  18 अप्रैल 1986 का दिन दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसकों के लिये कभी न भुला पाने वाला दिन है। उस दिन जो भी हुआ, उसने क्रिकेट के खेल को बदलकर रख दिया था। अब खेल के मैदान पर कुछ भी असंभव नही माना जाता और क्रिकेटरों और क्रिकेट प्रेमियों को उस दिन पता चला कि एक मैच चाहे कितना मुश्किल क्यों न हो, उसे जीता जा सकता है। हालांकि, भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए ये यादें उतनी अच्छी नही हैं, उस दिन की घटनाओं ने एक दशक तक एक नये तरह के क्रिकेट खेलने के ढंग का आगाज़ कर दिया। यह घटना थी जावेद मियांदाद का चेतन शर्मा की आखिरी गेंद पर छक्का जड़ने की। यह वह अवसर था जब पाकिस्तान ने एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में मुख्य रूप से शारजाह में भारत पर प्रभुत्व स्थापित किया। यह तब तक चलता रहा जब तक कि भारत सरकार ने इस स्थल पर प्रतिबंध लगा दिया और क्रिकेट बोर्ड को 2001 के शारजाह कप के लिए टीम नहीं भेजने का निर्देश दिया। आईसीसी वर्ल्डकप में भारत को न हरा पाने की पाकिस्तान की अक्षमता के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। पिछले एक दशक से भी अधिक समय से भारत को अपने पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों को खेल के छोटे संस्करण में जीत मिलना मुश्किल होता आया, लेकिन सभी विश्व कप के मुकाबले में पाकिस्तान को भारत हमेशा हराता रहा। शारजाह में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते बार बार खेल संदेह के घेरे में आता रहा था, लेकिन विश्लेषक आज भी उन दावों की सच्चाई से पुर्णतः सहमत नही है। लगभग 14 वर्ष की अवधि के दौरान शारजाह में पाकिस्तान ने सबसे अधिक मौकों पर जीत दर्ज की। इसमें कोई संदेह नहीं है कि पाकिस्तानी टीम में इमरान खान, वसीम अकरम, वकार यूनुस और अब्दुल कादिर जैसे शानदार गेंदबाज़ शामिल थे। मगर जावेद मियांदाद, सलीम मलिक, सईद अनवर और इंजमाम-उल-हक की बल्लेबाजी भी कम नहीं थी। आईये एक नज़र डालें भारत की शारजाह में परेशानियों से भरी धुंधली यादों पर ?

# 5 रेगिस्तान में क्रिकेट

  1980 के दशक के शुरुआती दिनों में संयुक्त अरब अमीरात के एक व्यापारी अब्दुल रहमान बुखारी, जो पाकिस्तान में पैदा हुए थे। उन्होंने अचल संपत्ति, व्यापार, होटल और बैंकों में विविध हितों के लिए एक नया और आकर्षक अवसर देखा। संयुक्त अरब अमीरात में भारत और पाकिस्तान से बड़ी प्रवासी जनसंख्या रहती थी। भारतीय और पाकिस्तान दोनों ही अपने क्रिकेट को प्यार करते थे, तो क्या टीम संयुक्त अरब अमीरात में एक-दूसरे को नहीं खेल सकते? बस इसी के साथ शारजाह का क्रिकेट स्टेडियम खाड़ी में क्रिकेट का घर बनता गया और अगले दशक के दौरान, उपमहाद्वीप और अमीरात में क्रिकेट प्रेमियों का पसंदीदा मैदान बन गया। यह सब 1984 में भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच खेले गये रोथमैन एशिया कप से शुरू हुआ, जहाँ भारत त्रिकोणीय राउंड-रोबिन प्रतियोगिता के अंत में विजयी रहा। 1985 में शारजाह ने रोथमैन फोर-नेशंस कप की मेजबानी की। यह टूर्नामेंट का पहला मैच था जो आज भी उपमहाद्वीप में कई क्रिकेट प्रशंसकों के लिए चर्चा का विषय रहता है। इमरान खान बेहतरीन फार्म में थे और 6 विकेट लेकर भारत को 125 रन पर रोक दिया। पाकिस्तान जीत के लिए 2.5 रन प्रति ओवर की दर से बल्लेबाज़ी जरूरत थी, लेकिन कपिल देव, रवि शास्त्री और शिवराम कृष्णन की शानदार गेंदबाजी के आगे 87 रनों के भीतर पूरी टीम निपट गयी। उन्होंने टूर्नामेंट जीतने के लिए फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराया। भारत रेगिस्तान में क्रिकेट के राजा थे, उनके प्रशंसकों के प्यार के बीच उन्होंने, शारजाह में लगातार दो जीत दर्ज की थी। 1986 में शारजाह में भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, बांग्लादेश और श्रीलंका की सहभागिता वाले ऑस्ट्रेलिया-एशिया कप की मेजबानी की। भारत ने फाइनल में पूरे भरे स्टेडियम के सामने पाकिस्तान का सामना किया। यहां से  कहानी में एक नाटकीय बदलाव आया जो लंबे समय तक जारी रहा।
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Published 13 Feb 2018
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