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INDvNZ: कानपुर में कीवियों की नज़र इतिहास रचने पर, तो कोहली एंड कंपनी का मक़सद है मिशन ग्रीन

Syed Hussain
ANALYST
Modified 21 Sep 2018, 20:28 IST
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मुंबई में हार, फिर पुणे में पलटवार, टीम इंडिया के लिए न्यूज़ालैंड के ख़िलाफ़ 3 मैचों की वनडे सीरीज़ के पहले दो मुक़ाबलों की तस्वीर कुछ ऐसी ही है। यानी अब तीसरा वनडे वर्चुअल फ़ाइनल हो चुका है, जहां जीतने वाली टीम के सिर बंधेगा सीरीज़ जीत का सेहरा।

मुंबई और पुणे के बाद अब आख़िरी लड़ाई के लिए दोनों ही टीमें कानपुर आ पहुंची हैं, जहां अब से कुछ ही घंटो बाद होगी इस वनडे सीरीज़ की अंतिम लड़ाई। न्यूज़ीलैंड ने इससे पहले तीन बार भारत में भारत के ख़िलाफ़ सीरीज़ जीतने के क़रीब पहुंची है, लेकिन हर बार आख़िरी लड़ाई में जीत मेज़बानों की हुई है। इस बार कीवियों के इरादे बुलंद हैं, और कानपुर में वे इतिहास रचने के लिए पहुंच चुके हैं।

इतिहास रचने की राह में है ‘’विराट’’ कठिनाई

पर ये इतना आसान नहीं होने वाला क्योंकि कीवियों की ही तरह भारतीय क्रिकेट टीम भी अपने कप्तान विराट कोहली की अगुवाई में मिशन ग्रीन पर है। ग्रीन पार्क पर होने वाले इस मुक़ाबले को जीत कर कोहली एंड कंपनी अपनी लगातार सीरीज़ जीत के रथ को और आगे बढ़ाने के लिए बेक़रार है। भारत को अपने घर में आख़िरी बार दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ 2015 में किसी द्विपक्षीय सीरीज़ में हार मिली थी। लिहाज़ा कोहली कतई नहीं चाहेंगे कि जीत के इस सिलसिले पर ब्रेक लगाया जाए, मिशन ग्रीन को क़ामयाब करने के लिए कोहली जी जान लगा देंगे।

ग्रीन पार्क में टॉस होते ही बनेगा इतिहास

कीवियों के लिए इतिहास बनाना भले ही मुश्किल हो, लेकिन कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में जैसे ही सिक्का उछाला जाएगा, इतिहास बन चुका होगा। ये पहला अवसर होगा जब कानपुर में कोई वनडे मैच दूधिया रोशनी में खेला जाएगा। ग्रीन पार्क में अब तक भारत ने 13 मुक़ाबले खेले हैं, जिनमें से 9 में टीम इंडिया को जीत हासिल हुई है, जबकि 4 मैचों में हार का सामना करना पड़ा है। न्यूज़ीलैंड पहली बार इस मैदान पर कोई वनडे अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने उतरेगी।

टीम कॉम्बिनेशन में बदलाव की गुंजाइश कम

भारतीय क्रिकेट टीम की कोशिश होगी कि अपने विनिंग कॉम्बिनेशन में कोई फेरबदल न किया जाए, इसका मतलब ये हुआ कि एक बार फिर कुलदीप यादव बाहर बैठ सकते हैं। क्योंकि पुणे में बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज़ अक्षर पटेल ने सभी को प्रभावित किया था, लिहाज़ा कोहली नहीं चाहेंगे कि उन्हें बाहर कर किसी तरह का जोखिम लिया जाए। दूसरी तरफ़ नंबर-4 पर मैज जिताऊ पारी खेलने वाले दिनेश कार्तिक की भी एक बार फिर इसी क्रम पर उतरने की संभावना है, टीम मैनेजमेंट चाहेगा कि कार्तिक एक और अच्छी पारी इसी क्रम पर खेलते हुए नंबर-4 की चली आ रही समस्या को ख़त्म कर दें।

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दूसरी तरफ़ मेहमान टीम भी किसी तरह का कोई परिवर्तन नहीं करना चाहेगी, भले ही पुणे में उन्हें हार मिली हो लेकिन इसी टीम के साथ कीवियों ने मुंबई में भारत पर शानदार जीत दर्ज की थी। टॉम लैथम पर कानपुर में भी कीवि टीम के मिडिल ऑर्डर को रॉस टेलर के साथ मज़बूती प्रदान करने की ज़िम्मेदारी होगी तो कॉलिन मुनरो और मार्टिन गप्टिल से अच्छे आग़ाज़ की उम्मीद होगी। न्यूज़ीलैंड के लिए चिंता का विषय उनके कप्तान और स्टार बल्लेबाज़ केन विलियमसन का फ़ॉर्म है, जिन्होंने अब दोनों पारियों (6 और 3) में मिलाकर भी दहाई का आंकड़ा पार नहीं किया है। हालांकि ऐसा माना जाता है कि बड़े खिलाड़ी बड़े मैच पर अपने रंग में दिखाई देते हैं, कीवियों को भी विलियमसन से कुछ ऐसी ही उम्मीद होगी।

कानपुर की पिच पर स्पिन का होगा कमाल या बल्लेबाज़ करेंगे धमाल ?

बात अगर ग्रीन पार्क स्टेडियम की पिच की करें तो ज़ाहिर तौर पर अपने नाम के हिसाब से पिच हरी तो होगी नहीं। क्योंकि पिच क्यूरेटर का मानना है कि ये बल्लेबाज़ों के लिए माक़ूल पिच होगी, जहां गेंद बल्ले पर आसानी से आएगी। लेकिन जैसे जैसे मैच आगे बढ़ेगा तो पिच धीमी हो सकती है, पर शाम में गिरती ओस इसके असर को कम भी कर सकती है। लिहाज़ा टॉस जीतने वाले कप्तान की नज़र चेज़ करने पर होगी, वैसे इस मैदान पर खेले गए आख़िरी मुक़ाबले में 600 से ज़्यादा रन बने थे। जब दक्षिण अफ़्रीका ने 303 रन बनाए थे और जवाब में रोहित शर्मा (150) के शतकीय पारी के बावजूद टीम इंडिया सिर्फ़ 5 रनों से मुक़ाबला हार गई थी। पर वह दिन का मुक़ाबला था जबकि ये दिन-रात्री मैच होगा, जहां रनों का पीछा करने वाली टीम को ओस का फ़ायदा मिल सकता है।

मौसम का मिज़ाज

बात अगर कानपुर के मौसम की करें, तो ये पूरी तरह से क्रिकेट के माक़ूल है। जहां दिन में तापमान 32 डिग्री के आस पास रह सकता है, लेकिन शाम में ठंडी हवा चलने की संभावना भी बताई जा रही है। अगर आद्रता को देखते हुए कीवी कप्तान टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का फ़ैसला करें, तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। क्योंकि दिन की तुलना में उनके गेंदबाज़ों के लिए शाम में रोशनी और ठंडी हवा में गेंदबाज़ी करना ज़्यादा अनुकूल हो सकता है।

Published 29 Oct 2017, 00:01 IST
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