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INDvSL: भारत के वनडे कप्तान के रूप में रोहित शर्मा के सामने ये हैं 5 चुनौतियां

सौम्या तिवारी
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‘मैने कभी किसी को बॉल को इतने बेहतर तरीके से खेलते नहीं देखा है’ विराट कोहली ने हाल ही में रोहित शर्मा के बारे में ये बयान दिया। जिसमें उन्होंने आगे बताया कि हर उभरता खिलाड़ी मुंबई के इस तेजस्वी उभरते हुए क्रिकेट से एक दशक पहले भारतीय टीम में एंट्री के कारण जल रहा था। कोहली तब इस बात से अज्ञात थे। अपने डेब्यू के 5 साल बाद रोहित शर्मा ने विराट कोहली के टीम में आने की वजह से अपना स्थान खो दिया था और उनके करियर पर एक सवालिया निशान सा लगने लगा था। एक और 5 साल बाद रोहित के जीवन एक बार फिर पूरी तरह से घुमाव आ चुका है। जिसमें कोहली को विश्राम देने के कारण उनकी अनुपस्थिति में रोहित को भारत का 24वां वनडे का कप्तान घोषित किया गया है और वह एक नई यात्रा शुरू करने का प्रयास करेंगे। लेकिन भारतीय टीम की कप्तानी का ताज चुनौतियों से भरा हुआ है। पहली बार कप्तानी का पदभार संभालने जा रहे रोहित शर्मा को मिल सकती है ये पांच चुनौतियां: #5 मध्यक्रम के संकट को दूर करना

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भारतीय चयनकर्ता द्वारा कौन सा खिलाड़ी किस जगह फिट बैठता है, यह पता लगाने के लिए म्यूजिक चेयर का खेल जारी है, जिस वजह से सीमित ओवर में भारतीय टीम का मध्यक्रम काफी कमजोर नजर आ रहा है। मनीष पांडे, के एल राहुल, युवराज सिंह, केदार जाधव और दिनेश कार्तिक सभी को आजमाया गया है, श्रेयस अय्यर टी20 टीम के बाद अब एकदिवसीय टीम में भी शामिल हो गए हैं। 2019 के विश्व कप के लिए नेतृत्व में मजबूती प्रदान करने के साथ रोहित को यह सुनिश्चित करना होगा कि टीम में स्थिरता भी बनी रहे। एमएस धोनी और हार्दिक पांड्या अपने अनुभव और फॉर्म की वजह से अपने दो स्थान सुरक्षित रखते हैं। फिर शिखर धवन और रोहित शर्मा ओपनिंग जोड़ी के लिए तय हैं और बाकी मध्यक्रम में बचे तीन स्थान को जाधव, पांडे, कार्तिक और अय्यर के बीच भरे जायेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन किस स्थान पर नज़र आता है, खासकर नंबर 3 स्लॉट में।

#4 स्पिन के लिए सही संयोजन खोजना

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रविचंद्रन अश्विन और रविंद्र जडेजा अब सीमित ओवरों के दृश्य से दूर हो गए है। वर्तमान में कुलदीप यादव, यजुवेन्द्र चहल और अक्षर पटेल के बीच गेंदबाजी लाइन-अप में दो स्लॉट पर कब्जा करने के लिए प्रतियोगिता रहती है। कोहली ने पटेल के लिए अपनापन दिखाया है, जो दूसरे दो खिलाड़ियो से बेहतर बल्लेबाज हैं लेकिन कुलदीप ने सभी प्रारूपों में प्रशंसा बटोरी है, खासकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हैट्रिक के बाद।तो वहीं चहल ने मध्य के ओवर में एक नियमित अंतराल पर विकेट लेते हुए अपनी भूमिका निभाई है। कुछ महीनों पहले भारत के श्रीलंका दौरे के दौरान एकदिवसीय मैचों में तीन में से अक्षर सर्वाधिक सफल रहे, जबकि चहल ने एक टी20 में तीन विकेट लिए। दक्षिण अफ्रीका के साथ होने वाली हाई प्रोफाइल सीरीज के पहले रोहित को आदर्श स्पिन संयोजन का पता लगाना होगा, बैकग्राउंड को ध्यान में रखते हुए कि कुलदीप यादव जसप्रीत बुमराह के साथ टेस्ट में जगह बना सकते हैं। #3 एमएस धोनी एक पहेली

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एक बल्लेबाज के रूप में एमएस धोनी की मानसिकता बदल गई है। वह अब आते ही शॉट खेलने में आरामदेह महसूस नहीं करते हैं बल्कि गियर को बदलने से पहले कुछ समय लेते हैं। ऐसे परिदृश्य में, यह जरूरी है कि मध्य क्रम में भारत की तरफ से अच्छी साझेदारी हो और अच्छी दावेदारी देखी जाए। हालांकि, पूर्व भारतीय कप्तान ने टीम की लाइन अप को संवारने के लिए एक मैच फिनिशर के रूप में खुद को पीछे कर लिया है और इसके परिणामस्वरूप पारी के अंत में उनका दबाव बढ़ रहा है। अपने चारों ओर युवाओं के उदासीन रूप ने इस मामले को खराब बना दिया है। रोहित के लिए जिन्होंने धोनी के अंतर्गत चार साल पहले एक सलामी बल्लेबाज के रूप में एक नयी पारी शुरु की, यह पता लगाना है कि यह 36 वर्षीय बल्लेबाज कोहली की अनुपस्थिति में किस स्थान पर सही बैठता है और किस स्थान पर टीम की बल्लेबाजी में स्थिरता प्रदान कर सकता है। #2 प्रयोग के बावजूद जीतने की चुनौती

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भारतीय टीम की संरचना में बदलाव और प्रयोग की स्वतंत्रता का मुख्य कारण सीमित ओवरों के खेल में उनकी बेहतरीन फॉर्म है, जिसमें चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल के रन भी शामिल हैं। पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के हाथाों मिली हार के बाद वह लगातार ज़िम्बाब्वे, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज और श्रीलंका के खिलाफ श्रृंखला में अजेय रहे हैं, वो भी पर्याप्त मात्रा में हुए प्रयोग के साथ। रोहित के पास भी युवाओं को मौका देने और प्रयोग करने के लिए पर्याप्त गुंजाइश है लेकिन उन्हें पिछले ट्रैक रिकॉर्ड को दिमाग में रख कर सोचना होगा। श्रीलंकाई टीम कागज पर बहुत मजबूत नहीं दिख रही है लेकिन नये कप्तान को यह सुनिश्चित करना होगा कि टीम में जीत का आत्मविश्वास जगता रहे। प्रोटियाज़ दौरे पर जाने से पहले इस समय कोई भी हार टीम के लिए हानिकारक हो सकती है। #1 कप्तानी और बल्लेबाजी के बीच संतुलन

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रोहित तीन बार आईपीएल जीतने वाले कप्तान हैं: हरभजन सिंह और रिकी पॉन्टिंग से कप्तानी लेने के बाद से उन्होंने यह सुनिश्चित कर लिया है कि मुंबई इंडियंस आईपीएल में सबसे बेहतरीन टीमों में से एक है। हालांकि, भारतीय टीम की कप्तानी करना एक अलग खेल है और 30 वर्षीय खिलाड़ी इस बात से इसे अच्छी तरह से अवगत होगा। "यह बहुत दूर की सोच है। मैं बहुत आगे नहीं सोचता हूं। जब मौके आते है, आने देता हूं। मैं इसे दोनों हाथों से पकड़ लूंगा" उन्होंने यह मुंबई इंडियंस के 2017 के आईपीएल जीत के बाद कहा था, जब उनसे भारत के टी20 के कप्तान होने के बारे में पूछा गया था। विराट कोहली का भारतीय कप्तान के रूप में इतने हिट होने के पीछे का मुख्य कारण यह रहा कि वह कप्तानी मिलने के बावजूद भी अरने खेल में किसी तरह की कोई गिरावट नहीं लाए हैं। कप्तान के रूप में कोहली का एकदिवसीय औसत 74.51 रहा है जो कि उनके करियर औसत 55 से कहीं ज्यादा है। यह दर्शाता है कि उन्होंने कितने अच्छे तरीके से कप्तानी और बल्लेबाजी को संतुलन किया हुआ है। रोहित हाल ही में एक बड़ी छंटनी से बाहर आ गये है और तब से वह एक अच्छे फॉर्म में दिख रहे है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि कप्तानी का अतिरिक्त बोझ शीर्षक्रम में उनकी बल्लेबाजी को प्रभावित नहीं करता है। लेखक- आद्या शर्मा अनुवादक- सौम्या तिवारी

Edited by Staff Editor
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