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श्रीलंका के दिग्गज गेंदबाज़ लसिथ मलिंगा को अपने गांव गए एक दशक बीत गए

मयंक पुरोहित

अक्सर देखा गया है कि माता पिता अपने बच्चे को डॉक्टर,इंजीनियर बनाना चाहते हैं और बच्चे ज़िन्दगी में और कुछ करना चाहते हैं। कुछ बालक अपने दिल की आवाज़ सुन लेते हैं और अपने सपने को हासिल करने में जुट जाते हैं और कुछ अपने माता पिता के कहने पर चलते हैं और सफल भी होते है पर कुछ बाद में पछताते है | ऐसी ही घटना सामने आयी जब श्रीलंका के तेज़ गेंदबाज़ लसिथ मलिंगा की माँ ने एक इंटरव्यू में कहा कि वो नहीं चाहती थी कि उनका बेटा क्रिकेटर बने वह अपने बेटे को बैंक में कर्मचारी के रूप में देखना चाहती थी। लसिथ मलिंगा गाला शहर के पास स्थित रथगामा गाँव में ही पले बड़े हैं और स्कूली शिक्षा भी उन्होंने यहीं से प्राप्त की थी। गाँव में कॉलेज न होने के कारण उन्हें शहर जाना पड़ा और उन्होंने महिंदा कॉलेज में दाखिला लिया। मलिंगा शुरुआत से ही गणित में अच्छे विद्यार्थी थे और इसी कारण उनकी माँ उन्हें चाहती थी कि वह भी उनकी तरह बैंक में काम करें। लेकिन होनी को कुछ और मंज़ूर था, कॉलेज में मलिंगा का ध्यान क्रिकेट की ओर बढ़ता ही जा रहा था। मलिंगा को गाँव का वातावरण अच्छा नहीं लगता था उन्हें शहर की दुनिया रास आ गयी थी। यहीं से उन्होंने क्रिकेट में अपना करियर बनाना शुरू कर दिया था और उन्हें लगातार सफलताएं भी मिलती गईं। और फिर 2004 में मलिंगा ने श्रीलंका की ओर से क्रिकेट में डेब्यू कर लिया, आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि तब से लेकर अब तक मलिंगा फिर अपने गांव नहीं गए। बता दें कि मलिंगा के माता और पिता अपने पुश्तैनी घर (गाँव) में ही रहते हैं। बेटा भले ही बड़ा और अरबपति क्रिकेटर बन गया हो लेकिन मलिंगा की मां रिटायर होने के बाद अब कपडे सिलने का काम करती हैं। हालांकि उनका मानना है कि वह यह काम शौक़ से करती हैं और उनके अनुसार उनके समय का इससे बेहतर उपयोग नहीं हो सकता है। मलिंगा अपनी गेंदबाज़ी के अंदाज़ से जाने जाते है और वह वर्ल्ड कप के सबसे सफल गेंदबाज़ भी हैं, इस बार आईपीएल में वह मुंबई इंडियंस में एक खिलाड़ी नहीं बल्कि मेन्टर के रूप में नज़र आएंगे।


Edited by Staff Editor

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