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वनडे क्रिकेट इतिहास में टीम इंडिया के सबसे क़ामयाब नंबर-4 बल्लेबाज़

शारिक़ुल होदा Shariqul Hoda

50 ओवर के खेल में नंबर 4 क्रम पर बल्लेबाज़ी करना काफ़ी दिलचस्प होता है। इस पोज़ीशन के बल्लेबाज़ों का खेल इस बात पर निर्भर करता है कि टॉप ऑर्डर बल्लेबाज़ों ने कैसा प्रदर्शन किया है, उन्हें इस हिसाब से ख़ुद को ढालना होता है। कुछ मौक़े ऐसे आते हैं जब इन बल्लेबाज़ों को संभलकर खेलना पड़ता है, तो कई बार आक्रामक बल्लेबाज़ी भी करनी पड़ती है। वनडे के कुछ महानतम बल्लेबाज़ जैसे, एबी डिविलियर्स, महेला जयवर्धने, अरविंद डिसिल्वा, रॉस टेलर ने अपने करियर में हर ज़रूरी पोज़ीशन पर बल्लेबाज़ी की है। पिछले कुछ वक़्त से टीम इंडिया नंबर-4 बल्लेबाज़ की समस्या से जूझ रही रही है। अंजिंक्य रहाणे जो कभी ओपनिंग किया करते थे वो साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ सीरीज़ में टीम के 2 विकेट गिरने पर बल्लेबाज़ी करने आ रहे हैं। हम यहां उन बल्लेबाज़ों के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने नंबर-4 पर बल्लेबाज़ी करते हुए कामयाबी हासिल की है।

सचिन तेंदुलकर

दुनिया में बल्लेबाज़ी की शायद ऐसी कोई लिस्ट ही नहीं है जिसमें मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर शामिल न हों। सचिन को दुनिया का महानतम बल्लेबाज़ माना जाता है। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर में ज़्यादातर टीम इंडिया के लिए ओपनिंग की है। इस बात में कोई शक नहीं कि जब वो ओपनिंग करने पिच पर आते थे तो अच्छे-अच्छे गेंदबाज़ों के पसीने छूट जाते थे। हांलाकि जब सचिन ने अपना वनडे करियर शुरू किया था तब वो मध्य क्रम में ही बल्लेबाज़ी करते थे, कभी 2 विकेट गिरने पर तो कभी 3 विकेट गिरने पर। साल 1994 में वो टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर बल्लेबाज़ बन गए थे। उन्होंने 61 वनडे मैच में नंबर-4 पोज़ीशन पर बल्लेबाज़ी की है जिसमें उन्होंने 2059 रन बनाए हैं, इस दौरान उनका औसत 38.85 रहा है। हांलाकि ये आंकड़े सचिन की महानता को साबित करने के लिए नाकाफ़ी हैं। जब तक सचिन टीम इंडिया के सदस्य रहे हैं टीम को नई ऊंचाई हासिल हुई है। सचिन ने अपनी बल्लेबाज़ी से युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा दी है।

दिलीप वेंगसरकर

अगर 1980 के दशक में सुनील गावस्कर और कपिल देव को टीम इंडिया का महानतम मैच विनर कहा जाता था तो दिलीप वेंगसरकर भी किसी से कम नहीं थे। गावस्कर और कपिल क्रमश: टॉप और लोअर ऑर्डर के चैंपियन बल्लेबाज़ थे, तो वेंगसरकर मिडिल ऑर्डर के आधार थे। अपने 15 साल के लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में वेंगसरकर ने 120 वनडे मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 71 बार नंबर-4 पर बल्लेबाज़ी की थी। इस दौरान उन्होंने 37.51 की औसत से 2138 रन बनाए थे। वनडे करियर में दिलीप की बल्लेबाज़ी का औसत 34.73 रहा है जो कि उनके नंबर 4 पर बल्लेबाज़ी के आंकड़े से कम है। ये इस बात को साबित करता है कि वो टीम के 2 विकेट गिरने पर अच्छी बल्लेबाज़ी करते थे। वेंगसरकर के बारे में कहा जाता है कि वो वनडे के मुक़ाबले टेस्ट में ज़्यादा अच्छी बल्लेबाज़ी किया करते थे।

राहुल द्रविड़

अगर राहुल द्रविड़ को टीम इंडिया की ‘दीवार’ कहा जाता था तो इसके पीछे कई वजहें हैं। वो अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत में टेस्ट के विशेषज्ञ बल्लेबाज़ थे, वो विपक्षी टीम के सामने किसी दीवार की तरह खड़े हो जाते थे। उनको आउट करना किसी भी गेंदबाज़ों के लिए आसान नहीं होता था। टेस्ट मैच के आलावा वो वनडे के भी सबसे कंसिस्टेंट बल्लेबाज़ बन गए थे। वो टीम इंडिया के मिडिल ऑर्डर के आधार बन गए थे। अपने करियर के आख़िर में वो 318 वनडे मैच खेल चुके थे और उन्होंने 39.14 की औसत से 10,889 रन बनाए थे। नंबर-4 पर बल्लेबाज़ी करना इनके करियर का अहम पड़ाव था। उन्होंने 102 दफ़ा नंबर 4 पर बल्लेबाज़ी की है जिसमे उन्होंने 3301 रन बनाए हैं। कई नाज़ुक मौक़ों पर उन्होंने टीम इंडिया को मुश्किलों से निकाला है। आज वो अंडर-19 टीम इंडिया के चैंपियन कोच हैं। इससे पहले वो आईपीएल की रॉयल चैंलेंजर्स बैंगलौर और राजस्थान रॉयल्स टीम का हिस्सा रह चुके हैं।

युवराज सिंह

कुछ ही भारतीय क्रिकेटर ऐसे हैं जिन्होंने टीम इंडिया के सीमित ओवर के खेल में युवराज सिंह से ज़्यादा छाप छोड़े हैं। युवराज सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ आईसीसी नॉकआउट टूर्नामेंट में अपने वनडे करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वो टीम इंडिया के सबसे कंसिस्टेंट मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़ बन गए थे। अपने करियर की शुरुआत में युवी नंबर-5 या नंबर-6 पोशीज़न पर बल्लेबाज़ी करते थे, धीरे-धीरे वो चौथे नंबर के अहम बल्लेबाज़ बन गए थे। युवराज ने 278 वनडे पारियां खेली हैं जिसमें 108 बार नंबर 5 पर बल्लेबाज़ी की है। इस दौरान उनका औसत 35.12 और स्ट्राइक रेट 90 के आसपास रहा है। उनके करियर का बेस्ट स्कोर 150 है जो उन्होंने साल 2017 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ नंबर-4 पर बैटिंग करते हुए बनाया था। युवराज ने ये साबित किया है कि वह टीम इंडिया के लिए कितनी अहमियत रखते थे। उन्होंने साल 2011 के वर्ल्ड कप में अपने शानदार प्रदर्शन की बदौलत न सिर्फ़ टीम इंडिया को ट्रॉफ़ी दिलाई थी, बल्कि ‘मैच ऑफ़ द सीरीज़’ का भी ख़िताब जीता था। आने वाले आईपीएल सीज़न में वो अपनी पुरानी टीम किंग्स इलेवन पंजाब के लिए बल्लेबाज़ करने उतरेंगे। इससे पहले वो पुणे वॉरियर्स, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलौर, दिल्ली डेयरडेविल्स और सनराइज़र्स हैदराबाद को अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

मोहम्मद अज़हरुद्दीन

जब भी टीम इंडिया में महानतम बल्लेबाज़ों की बात होती है तो सभी के ज़ेहन में सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर और राहुल द्रविड़ जैसे बल्लेबाज़ों का नाम आता है। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन को अकसर एक बल्लेबाज़ के तौर पर कम ही याद किया जाता है क्योंकि 1990 के दशक में वो टीम इंडिया के कप्तान थे। उन्हें कप्तान के तौर पर ज़्यादा याद किया जाता है। हांलाकि उनको हमेशा एक बल्लेबाज़ के तौर पर हल्के में लिया जाता रहा है, लेकिन ये बात भी याद रखनी होगी कि वो मध्य क्रम के एक मज़बूत बल्लेबाज़ रहे हैं। वो टीम के 2 विकेट गिरने पर बल्लेबाज़ी करने आते थे। अपने वनडे करियर में उन्होंने 137 बार नंबर पर बल्लेबाज़ी की है। इस दौरान उन्होंने 40 की औसत से 4605 रन बनाए हैं, जो उनके करियर के एवरेज (36.92) से ज़्यादा है। वो वनडे में टीम इंडिया की जान थे, जब उन्होंने साल 2000 में आख़िरी बार भारत के लिए वनडे खेला था तब वो विश्व में सबसे ज़्यादा वनडे रन बनाने वाले खिलाड़ी थे। बाद में उनका रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर ने तोड़ा था। लेखक – कार्तिक सेठ अनुवादक – शारिक़ुल होदा

Edited by Staff Editor

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