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क्या 2019 विश्वकप को देखते हुए धोनी को टी20 टीम से बाहर करना सही फैसला है?

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209   //    04 Nov 2018, 15:16 IST

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महेंद्र सिंह धोनी एक ऐसा खिलाड़ी जिसने भारतीय टीम को कई यादगार जीत दिलाई है। यहां तक कि अपनी कप्तानी में भारत को तीनों फॉर्मेट में नंबर 1 तक भी लेकर गए। हालांकि फिर भी अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर उन्हें काफी आलोचना का सामना करना पड़ा है। शायद इसके पीछे की एक वजह उनकी मौजूदा फॉर्म भी है, जिसके वजह से उन्हें वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली टी20 टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। खराब फॉर्म के कारण उन्हें काफी आलोचना का भी सामना करना पड़ रहा है।

एक चीज़ जो समझनी बहुत जरूरी है कि धोनी को सिर्फ एक बल्लेबाज के तौर पर नहीं देखा जा सकता, बल्कि भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान इससे काफी ऊपर है। धोनी की समझ और कब क्या करना है यह उनसे बेहतर कोई और नहीं जानता। इसी वजह से पिछले कुछ सालों में भारत ने इतना अच्छा प्रदर्शन किया है।

गौर करने वाली बात यह भी है कि धोनी में अभी भी काफी क्रिकेट बाकी है, जरूरत है बस उन्हें मैदान पर समय बिताने की। धोनी टेस्ट क्रिकेट नहीं खेल रहे हैं और अब उन्हें टी20 टीम से भी बाहर कर दिया गया है। इसका मतलब है कि विश्वकप से पहले उन्हें खेलने के काफी कम मौके मिलेंगे।

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भारतीय टीम का टॉप ऑर्डर पिछले कुछ समय से शानदार प्रदर्शन कर रहा है, जिससे मध्यक्रम और निचले क्रम को ज्यादा बल्लेबाजी का अभ्यास नहीं मिलता। इसी वजह से शायद चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट ने धोनी को टी20 टीम से बाहर करने में थोड़ी जल्दबाजी दिखाई है।

भारत ने अपना आखिरी एकदिवसीय मुकाबला हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला और अब भारतीय टीम को अगला वनडे अगले साल 12 जनवरी को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलना है। इसका मतलब साफ है कि धोनी को दो महीने तक कोई भी उच्च स्तरीय क्रिकेट खेलने को नहीं मिलेगी। इससे निश्चित ही ना ही भारतीय टीम और खुद महेंद्र सिंह धोनी को कोई फायदा होगा। माही अगर बिना किसी मैच प्रैक्टिस के ऑस्ट्रेलिया में खेलते हैं और वो अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम होते हैं, तो उससे उनके ऊपर ही दबाव बढ़ेगा और शायद विश्वकप से पहले यह अच्छा संकेत नहीं होने वाला है।

भारत ने पिछले कुछ सालों में धोनी के विकल्प को तैयार करने में ज्यादा पहल भी नहीं की और विश्वकप में इतनी महत्वपूर्ण जगह लेने के लिए उनका विकल्प कोई भी नहीं है। इससे बेहतर होता कि धोनी को यह दोनों ही टी20 सीरीज में खेलने का मौका दिया जाता और अगर वो एक दो अच्छी पारियां खेलते, तो इससे उनको काफी आत्मविश्वास मिलता। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि टी20 विश्वकप अब 2020 में होना है और अभी उसमें काफी समय है। यह कदम या तो काफी पहले उठाना चाहिए था, नहीं तो 2019 विश्वकप के बाद भी ऐसा फैसला लिया जा सकता था।

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धोनी को इस समय मैच अभ्यास की सख्त जरूरत है, जोकि उन्हें लय प्राप्त करने में मदद कर सकता है। निश्चित ही नेट्स में इसका होना लगभग नामुमकिन है। धोनी ने साल 2018 में सिर्फ 275 रन बनाए और इससे भी ज्यादा शर्मनाक बात यह रही कि वो एक भी अर्धशतक लगाने में कामयाब नहीं हुए। आपको बता दें कि साल 2004 के बाद यह पहला मौका था, जब धोनी ने किसी साल में एक भी अर्धशतकीय पारी नहीं खेली। 

खैर अब धोनी को टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए 12 जनवरी का इंतजार करना होगा। हालांकि इस बीच देखना होगा कि धोनी किस तरह खुद को तैयार करते हैं और वो खुद भी ऑस्ट्रेलिया में अच्छा प्रदर्शन करते हुए अपने आप कोे साबित करना चाहेंगे।

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