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"पिता की मौत के बाद टूट गया था, लेकिन रवि शास्त्री ने बड़े भाई की तरह दिया था सपोर्ट", भारतीय तेज गेंदबाज का बड़ा बयान

England v India - Fourth LV= Insurance Test Match: Day Five
England v India - Fourth LV= Insurance Test Match: Day Five

भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज ने दिसंबर 2020 में अपना टेस्ट डेब्यू किया और लगातार अच्छा प्रदर्शन करते आ रहे हैं। सिराज को डेब्यू से पहले एक दुखद खबर मिली थी। ऑस्ट्रेलिया में अपने टेस्ट डेब्यू का इंतजार कर रहे सिराज को पिता के निधन की खबर मिली थी। उस समय वह ऑस्ट्रेलिया में रुकने या घर लौटने को लेकर व्याकुल थे। अब उन्होंने खुलासा किया है कि पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री ने उस समय उनकी खूब मदद की थी।

सिराज ने कहा,

जब मेरे पिता का देहांत हुआ था तब रवि सर ने मेरी मदद की थी। उन्होंने मेरे पास आकर बोला था कि मियां तुम्हारे पिता भी चाहते कि तुम ऑस्ट्रेलिया में पांच विकेट लो। मैं काफी भावुक, परेशान और टूट चुका था। मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या हो रहा है। हम काफी कड़े क्वारंटाइन में थे।

सिराज ने आगे कहा कि वह निर्णय नहीं ले पा रहे थे कि वह घर जाएं या फिर ऑस्ट्रेलिया में ही रहकर अपने पिता का सपना पूरा करें। उन्होंने कहा,

फिर मैंने सोचा कि यदि मैं वापस जाता भी हूं तो मुझे वहां भी क्वारंटाइन होना पड़ेगा। इसी कारण मैंने सोचा कि ऑस्ट्रेलिया में ही रहना और पिता का सपना पूरा करना उचित होगा। मैं पूरी तरह खो चुका था। क्वारंटाइन के कारण हमें एक ही कमरे में बंद रहना पड़ता था। मुझे याद है कि इसी चीज ने मुझे काफी सख्त बनाया है और सारी चीजों से पार पाने की ताकत दी है।

ब्रिसबेन में सिराज ने लिया था अपना पहला फाइव विकेट हॉल

सिराज ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में अपना टेस्ट डेब्यू किया था और डेब्यू टेस्ट की दोनों पारियों में मिलाकर पांच विकेट चटकाए थे। हालांकि, दौरे के आखिरी टेस्ट में उन्होंने पिता के सपने को पूरा किया था। सिराज ने ब्रिसबेन में खेले गए टेस्ट में अपना पहला फाइव विकेट हॉल लिया था। सिराज ने बताया,

मेलबर्न में जब मैं मैदान में उतरा था तो यह एक सपने जैसा था। लोगों ने हमेशा कहा था कि मेलबर्न में बॉक्सिंग-डे टेस्ट काफी बड़ा होता है और मैं इसका हिस्सा था। इसका हिस्सा होना और अपनी टेस्ट कैप हासिल करना सपने जैसा था। इसके बाद मैं लगातार सोच रहा था कि यदि मेरे पिता होते तो वह कितने खुश हुए होते।

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Edited by Prashant Kumar
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