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राहुल द्रविड़ ने बताया कि 2001 के ऐतिहासिक ईडन गार्डन टेस्ट में किस तरह उन्होंने स्टीव वॉ की स्लेजिंग का सामना किया था

सावन गुप्ता
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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ने 2001 की बॉर्डर-गावस्कर टेस्ट सीरीज के दौरान ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की स्लेजिंग की याद को साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के कप्तान स्टीव वॉ की स्लेजिंग का सामना करते हुए उन्होंने बेहतरीन पारी खेली। द्रविड़ ने बताया कि इडन गार्डन में खेले जा रहे टेस्ट मैच में स्टीव वॉ उनकी जमकर स्लेजिंग कर रहे थे लेकिन उनकी बयानबाजी से उन पर कोई असर नहीं पड़ा और वो विकेट पर टिके रहे और भारतीय टीम को एक यादगार टेस्ट जीत दिलाई। बेंगुलुरु में गो स्पोर्ट्स एथलीट के कार्यक्रम में द्रविड़ ने कहा कि कोलकाता के उस ऐतिहासिक टेस्ट मैच में पहले तीन दिन ऑस्ट्रेलियाई टीम पूरी तरह से भारतीय टीम पर हावी थी। व्यक्तिगत तौर पर मेरा फॉर्म भी अच्छा नहीं था। मुंबई में खेले गए मैच में मैंने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था। यहां पर भी पहली पारी में मेरे बल्ले से रन नहीं निकले थे। यहां तक कि मुझे नंबर 6 पर बल्लेबाजी के लिए भेज दिया गया था। द्रविड़ ने कहा कि दूसरी पारी में जब मैं बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतरा तो स्टीव वॉ ने मेरी स्लेजिंग की और कहा ' राहुल इस मैच में तुम्हे नंबर 6 पर बैटिंग के लिए भेजा गया है, अगले मैच में तुम्हारा क्या होगा, क्या तुम्हे नंबर 12 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा जाएगा'। राहुल द्रविड़ ने आगे कहा कि ये मेरे लिए काफी अजीब बयान था क्योंकि मैं काफी निराश हो चुका था। मैं उस स्थिति में नहीं था जहां से मैं भूत या भविष्य के बारे में सोच सकूं और क्रिकेट में एक समय पर सिर्फ एक ही गेंद पर ध्यान देना होता है। द्रविड़ ने बताया कि मैंने सोचा कि देखता हूं मैं कितनी गेंद खेल सकता हूं और इस तरह से मैं एक-एक गेंद खेलता गया और बड़ी पारी खेली। गौरतलब है 2001 के बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पहला टेस्ट मैच जीतकर 1-0 की बढ़त ले ली थी। कोलकाता में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में भी ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 445 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। जिसके जवाब में भारतीय टीम अपनी पहली पारी में महज 171 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। लेकिन दूसरी पारी में वीवीएस लक्ष्मण की ऐतिहासिक 281 रनों की पारी और राहुल द्रविड़ की 180 रनों की मैराथन पारी की बदौलत भारतीय टीम ने 7 विकेट के नुकसान पर 657 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। द्रविड़ और लक्ष्मण ने 376 रनों की मैराथन साझेदारी कर भारतीय टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाया। इस तरह से ऑस्ट्रेलियाई टीम को जीत के लिए 384 रनों का लक्ष्य मिला लेकिन कंगारू टीम दूसरी पारी में महज 212 रन बनाकर ऑल आउट हो गई और भारत ने ये मैच 171 रनों से जीत लिया। टेस्ट मैचों में राहुल द्रविड़ नंबर 3 पर बल्लेबाजी करते थे लेकिन पहली पारी में वो 82 गेंद पर सिर्फ 25 रन ही बना पाए थे। इसके बाद दूसरी पारी में उनको नीचे के नंबर 6 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया और उसके बाद वीवीएस लक्ष्मण के साथ मिलकर उन्होंने इतिहास रच डाला। ऑस्ट्रेलियाई टीम के कप्तान स्टीव स्मिथ ने द्रविड़ को उकसाकर आउट करने के लिए काफी स्लेजिंग की लेकिन वो दीवार की तरह मैदान पर डटे रहे और कंगारू टीम की हार सुनिश्चित की। कोलकाता की वो टेस्ट जीत भारतीय टीम की सबसे यादगार टेस्ट जीत में से एक है। वीवीएस लक्ष्मण का टेस्ट क्रिकेट में ये उच्चतम स्कोर था, वहीं द्रविड़ की पारी की भी सबने काफी तारीफ की थी। द्रविड़ इस वक्त भारतीय अंडर-19 टीम के कोच हैं जो कि न्यूजीलैंड में होने वाले विश्व कप में हिस्सा लेगी। वहीं स्टीव वॉ का बेटा भी ऑस्ट्रेलिया की तरफ से विश्व कप में हिस्सा ले रहा है। ऐसे में स्टीव वॉ की निगाह भी ऑस्ट्रेलियाई टीम और अपने बेटे के प्रदर्शन पर होगी।


Edited by Staff Editor
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