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रणजी ट्रॉफी 2017-18: 10 अनजाने नाम जिनका इस सत्र में प्रदर्शन शानदार रहा

Rahul Pandey
ANALYST
Modified 21 Sep 2018, 20:27 IST
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हर साल की तरह, इस बार भी रणजी सीजन में ऐसे नए नाम उभर कर आये है, जिनका प्रदर्शन अपेक्षाओं से परे रहा है, अपने संबंधित विभागों में बेहतरीन प्रदर्शन कर वो क्रिकेट जगत की नज़रों में आये हैं। हालांकि आधुनिक क्रिकेटर टी-20 क्रिकेट खेलते हुए बड़े हुए हैं, लेकिन अभी भी प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उपलब्धि हासिल करना सर्वोच्च प्राथमिकता रहती है और कुछ युवा क्रिकेटरों ने यह सुनिश्चित किया है कि वे सबकी नज़रों में आयें।

# 1 अनमोलप्रीत सिंह, पंजाब

4c9c0-1514181027-800 5 मैच में 125.50 के औसत से 753 रन पंजाब अंडर -16 और अंडर -19 टीम के सदस्य, शीर्ष क्रम के बल्लेबाज अंमोलप्रीत सिंह बड़े मंच पर तब छाए जब उन्होंने भारत के लिए अंडर -19 विश्वकप के सेमीफाइनल में 72 रन की एक समझदारी भरी पारी खेली। हालांकि वेस्टइंडीज के खिलाफ फाइनल में भारत जीत न सका। इससे पहले, उसी टूर्नामेंट में नामीबिया के खिलाफ 41 उनकी पारी में उन्होंने दिखाया था कि आने वाले समय में वह एक बड़े खिलाड़ी बनेंगे। इसके बाद जल्द ही, अनमोलप्रीत को पंजाब की तरफ से खेलने का मौका मिला, और 2016-17 विजय हजारे ट्राफी में अपना लिस्ट-ए पदार्पण करते हुए 41 गेंदों में 58 रन की पारी खेली, जिसमें 4 चौके और 3 छक्के शामिल थे। हालाँकि यह प्रयास बेकार गया, फिर उन्होंने अगले सीजन में रणजी पदार्पण किया और अपने पहले मैच में अर्धशतक लगाने के बाद, 3 शतक लगाये। गोवा के खिलाफ 113 रन की पारी ने टीम को पारी की जीत दिलायी, छत्तीसगढ़ के खिलाफ उनकी 267 रन की पारी के बूते उनकी टीम फिर से पारी से जीती और सर्विसेज के खिलाफ 252 रन की नाबाद पारी जिसने मैच ड्रा कराने में टीम की मदद की, इन पारियों के साथ उन्होंने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

# 2 धर्मेंद्र सिंह जडेजा, सौराष्ट्र

6 मैचों में 26.02 की औसत से 34 विकेट बाएं हाथ के स्पिनर धर्मेंद्रसिंह जडेजा 2012-13 की रणजी सीज़न में पदार्पण के बाद सौराष्ट्र की टीम के प्रमुख सदस्य रहे हैं। रविंद्र जडेजा के साथ इस बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज़ ने टीम के लिए एक उपयोगी गेंदबाज़ी जोड़ी बनाई है। 2015-16 में घरेलू क्रिकेट में अपने चौथे सत्र में जडेजा ने केवल 8 मैच में 24.40 के औसत से 27 विकेट लेकर शीर्ष विकेट लेने वालों की सूची में अपनी जगह बनाई। यह एक ऐसा सत्र था जिसमें सौराष्ट्र फाइनल तक पहुंचा था, और अंत में मुंबई के हाथों हार के चलते अपना पहला रणजी खिताब जीतने से चूक गये। सिर्फ दो साल बाद, जडेजा ने छह मैचों में 26.02 से 34 विकेट लिए और एक कदम आगे बढ़ते हुए अपने जादू को दोहराया। हालांकि इस बार सौराष्ट्र क्वार्टर फाइनल में भी जगह नहीं बना पाया था, लेकिन जडेजा ने भविष्य में खुद के लिए एक मजबूत उम्मीदवारी पेश की।
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Published 27 Dec 2017, 17:30 IST
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