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सचिन तेंदुलकर के 51 टेस्ट शतकों के सफ़र में एक नज़र 41 से 45 तक के शतकों पर

Himanshu Kothari
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सचिन तेंदुलकर का बल्ला एक बार बोलना शुरू करता है तो रुकने का नाम तक नहीं लेता। फॉर्म में आने के बाद सचिन तेंदुलकर के बल्ले से दनादन रन बरसने लगते हैं। एक बार जब सचिन तेंदुलकर रन बनाना शुरू करते तो विरोधी टीम की गेंदबाज भी फेल हो जाती थी। अपने टेस्ट करियर में सचिन तेंदुलकर 40 शतक लगाने के बाद भी नहीं रुके। सचिन तेंदुलकर हर दिन एक नई पारी खेलने और एक नया रिकॉर्ड कायम करने के लिए मैदान पर उतरते। अपने दनादन रन बनाने के कारण ही सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट इतिहास में नए कीर्तिमान कायम किए। इनमें सचिन तेंदुलकर के टेस्ट में लगाए गए 51 शतकों का कीर्तिमान भी स्थापित है। सचिन तेंदुलकर के नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा 51 शतकों का रिकॉर्ड दर्ज है। इन शतकों के दौरान सचिन तेंदुलकर ने कई बार बार मैच जिताऊ पारियां भी खेली। कई दफा ऐसे भी मौके आए जब पूरे मैच में सिर्फ सचिन तेंदुलकर का ही बल्ला चला और बाकि बल्लेबाज नाकाम साबित हुए। सचिन तेंदुलकर से लोगों की उम्मीदें बढ़ चली थी। जब मैदान पर सचिन तेंदुलकर बल्लेबाजी करने आते तो दर्शकों उनसे सिर्फ शतक की ही उम्मीद रखते थे। सचिन तेंदुलकर की बल्लेबाजी में तकनीक और टाइमिंग काबिलेतारीफ थी। कोई भी दूसरा बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की तरह धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी नहीं कर पाता था। ये सचिन तेंदुलकर ही थे जिन्होंने अपनी जिंदगी के 24 साल भारतीय क्रिकेट को समर्पित कर दिए। अपने इतन लंबे करियर में सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट में कई योगदान दिए। सचिन तेंदुलकर के 51 टेस्ट शतकों के सफर में 40 शतकों की यादें ताजा की जा चुकी है। अब बारी है सचिन के अगले 5 टेस्ट शतकों की यादें ताजे करने की। आइए अब सचिन तेंदुलकर के 51 टेस्ट शतकों के इस सफ़र में 41वें शतक से 45वें शतक पर एक नजर डालते हैं:

# 41 शतक, 103* चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ (2008)

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टेस्ट मैचों में 40 शतक लगा देने के बाद सचिन तेंदुलकर आगे बढ़ चले थे और एक और शतक लगाने वाले थे। साल 2008 में भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई में टेस्ट मुकाबला खेला। भारत में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई सीरीज का पहला टेस्ट मैच कई मायनों में अहम था। दरअसल भारत और इंग्लैंड के बीच नंवबर 2008 में पहले टेस्ट मैच खेला गया। ये टेस्ट मैच ऐसे समय हुआ जब भारत के मुंबई शहर में आतंकवादियों ने हमला कर दिया और 26/11 की घटना को अंजाम दी थी। मुंबई सचिन तेंदुलकर का होम टाउन है। ऐसे वक्त पर सचिन तेंदुलकर की खेली गई पारी काफी अहम रही। इंग्लैंड के खिलाफ इस पारी में सचिन तेंदुलकर ने शतकीय पारी खेली और अपने टेस्ट करियर का 41वां शतक ठोक दिया। सचिन तेंदुलकर की इस पारी के बदौलत टीम इंडिया ने क्रिकेट इतिहास में दूसरे सबसे ज्यादा रनों के लक्ष्य को हासिल कर जीत दर्ज करने में कामयाबी पाई। इस मैच में इंग्लैंड ने पहली पारी में भारत के सामने 316 रनों का स्कोर खड़ा किया। जिसके जवाब में भारतीय टीम सिर्फ 241 रन ही बना पाई। इसके बाद अपनी दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने आई इंग्लैंड की टीम ने एकबार फिर से शानदार बल्लेबाजी करते हुए भारत के सामने जीत के लिए 387 रनों का लक्ष्य रख दिया। 387 रनों के लक्ष्य के जवाब में भारत की ओर से इंग्लैंड के खिलाफ वीरेंद्र सहवाग ने टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। वीरेंद्र सहवाग ने मैदान पर आते ही दनादन रन बनाने शुरू कर दिए। इसके साथ ही वीरेंद्र सहवाग ने अर्धशतक लगाते हुए महज 68 गेंदों में ही 83 रनों की करारी पारी खेली। इस मैच में वीरेंद्र सहवाग एकदिवसीय मैचों की तरह रन बटोरे जा रहे थे। इसके बाद सचिन तेंदुलकर ने टेस्ट मैच के आखिरी दिन टीम की कमान संभाली। सचिन तेंदुलकर इस पारी में धैर्य धारण किए हुए थे और समय को ध्यान में रखते हुए भारत के लिए रन बटोरे जा रहे थे। सचिन तेंदुलकर भारतीय टीम को जीत दिलाने के इरादे से इस पारी में संयमित होकर स्कोर बोर्ड आगे बढ़ाए जा रहे थे। इस पारी में धीरे-धीरे खेलते हुए सचिन तेंदुलकर ने अपने टेस्ट करियर का 41वां शतक पूरा किया। उन्होंने 9 बाउंड्री की मदद से नाबाद 103 रनों की पारी खेली और टीम को आखिर में इंग्लैंड के खिलाफ जीत दिला के ही माने। इसके साथ ही सचिन तेंदुलकर की पारी की मदद से टीम इंडिया ने क्रिकेट इतिहास में दूसरे सबसे बड़े लक्ष्य को हासिल कर जीत दर्ज की। इस मैच में सचिन तेंदुलकर के साथ युवराज सिंह ने भी भूमिका निभाई। युवराज सिंह ने सचिन तेंदुलकर का साथ देते हुए इस पारी में नाबाद 85 रन बनाए।

# 42 शतक-160 हैमिल्टन में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ (2009)

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साल 1967/68 के बाद भारतीय क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड में साल 2009 में सीरीज जीती। हैमिल्टन में न्यूजीलैंड के खिलाफ साल 2009 में खेले गए टेस्ट मैच मे भारत को ये जीत नसीब हुई और न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई इस सीरीज पर भारत ने 1-0 से कब्जा किया। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए इस मुकाबले में पहले गेंदबाजी करते हुए भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को 300 रनों के स्कोर से पहले रोक दिया। न्यूजीलैंड की टीम पहली पारी में बल्लेबाजी करते हुए 279 रनों पर ही सिमट गई। इसके बाद बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने शानदार बल्लेबाजी की और न्यूजीलैंड पर बड़ी बढ़त हासिल की। टीम इंडिया ने बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में न्यूजीलैंड के 279 रनों के जवाब में 520 रन बना डाले। सचिन तेंदुलकर की शानदार बल्लेबाजी के कारण टीम इंडिया न्यूजीलैंड के सामने 520 रनों का स्कोर खड़ा पाई। इस मुकाबले में बल्लेबाजी करते हुए सचिन तेंदुलकर ने अपने टेस्ट करियर का 42वां शतक ठोक दिया। सचिन तेंदुलकर ने अपनी इस पारी में बेहतरीन 160 रन बनाए। सचिन तेंदुलकर की पारी में खेले गए शानदार शॉट की बदौलत ही ये मुमकिन हो पाया कि टीम इंडिया ने इस पारी में 3.4 रन प्रति ओवर की दर से स्कोर बोर्ड को आगे बढ़ाया। सचिन तेंदुलकर की ये पारी बेहतरीन पारियों में से एक थी। अपनी इस 160 रनों की पारी में सचिन तेंदुलकर ने 26 बाउंड्री लगाई। इस पारी में सचिन तेंदुलकर की स्ट्राइक रेट 61.53 रही। सचिन तेंदुलकर के अलावा इस पारी में गेंदबाज जहीर खान ने भी शानदार बल्लेबाजी की और अर्धशतक ठोका। जहीर ने इस मैच में 51 रन बनाए। इसके बाद दूसरी पारी में न्यूजीलैंड की टीम ने फिर से भारतीय गेंदबाजों के आगे घुटने टेक दिए। न्यूजीलैंड का बल्लेबाजी क्रम फिर से भारतीय टीम के आगे ढह गया और इस बार फिर से न्यूजीलैंड की टीम पहली पारी में बनाए स्कोर 279 रनों पर ही दूसरी पारी में भी सिमट गई। जिसके बाद आखिर में भारत ने इस मैच को 10 विकेट से अपने नाम कर लिया। इस मैच में सचिन तेंदुलकर को शानदार पारी खेलने पर मैन ऑफ द मैच भी मिला।

# 43 शतक- 100* अहमदाबाद में श्रीलंका के खिलाफ (2009)

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साल 2009 में भारत ने श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट मैच खेला। इस मैच में श्रीलंका भारतीय टीम पर हावी हो गई। पहले बल्लेबाजी करते हुए इस मैच की पहली पारी में भारत ने 426 रनों का स्कोर खड़ा किया। जिसके जवाब में श्रीलंका के बल्लेबाजों ने जमकर भारतीय गेंदबाजों की धुनाई की। टीम इंडिया के गेंदबाज श्रीलंका की बल्लेबाजी के आगे बेदम नजर आए। जिसका फायदा उठाते हुए श्रीलंका ने पहली पारी में 760 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर भारत के सामने खड़ा कर दिया। श्रीलंका के 760 रन बना देने के कारण श्रीलंका को भारत पर 334 रनों की बढ़त भी हासिल हो गई। 760 रन बना देने के कारण इस मैच में भारत पर दबाव बन गया था और ये दबाव तब और भी ज्यादा बढ़ गया जब मैच के चौथे दिन ही भारत के 190 रनों के स्कोर पर दो विकेट पैवेलियन लौट गए थे। भारत और श्रीलंका के बीच खेला गया ये मैच पांचवें दिन तक जा चुका था। पांचवें दिन 209 रनों के स्कोर पर भारत का तीसरा विकेट गिर जाने के बाद सचिन तेंदुलकर मैदान पर बल्लेबाजी करने आए। सचिन तेंदुलकर के मैदान पर आने तक टीम इंडिया श्रीलंका से 125 रन पीछे थी। इस मैच में भारतीय टीम को अब अपनी हार बचानी थी और सचिन तेंदुलकर से टीम इंडिया को काफी उम्मीदें थी। मैच में भारत को बनाए रखने के लिए सचिन तेंदुलकर ने एक छोर संभाले रखा और संभलकर स्कोर बोर्ड को आगे बढ़ाने लगे। दूसरे छोर से गौतम गंभीर का भी सचिन तेंदुलकर को बखूबी साथ मिला। आखिरी में सचिन तेंदुलकर ने अपने टेस्ट करियर का 43वां शतक भी पूरा कर लिया। इस पारी में सचिन तेंदुलकर ने 100 रनों की नाबाद पारी खेली। अपनी इस पारी के दौरान सचिन तेंदुलकर श्रीलंका की खतरनाक गेंदबाजी आक्रमण का डटकर सामना कर रहे थे। सचिन तेंदुलकर क्रीज पर एक तरफ अपना विकेट भी बचाए हुए थे और दूसरी तरफ स्कोर बोर्ड भी बढ़ा रहे थे। श्रीलंकाई गेंदबाजी सचिन तेंदुलकर के आगे नाकाम साबित हुई। सचिन तेंदुलकर की बल्लेबाजी के कारण भारतीय टीम ने श्रीलंका के हाथों मैच गंवाने से बचा लिया और आखिरी में मैच ड्रॉ कराने में भारतीय टीम को सफलता हासिल हुई।

#44 शतक-105* चिट्टागोंग में बांग्लादेश के खिलाफ (2010)

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साल 2010 में भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली। इस सीरीज में भारत ने चिट्टागोंग में खेले गए पहले टेस्ट की पहली पारी में कुछ खास रन स्कोर नहीं किए और 243 रन बनाकर ही सिमट गई। बांग्लादेश की टीम ने भारतीय बल्लेबाजों के नाक में पहली पारी में दम करके रखा और भारतीय टीम के जल्दी विकेट झटकते गए। हालांकि बांग्लादेश की टीम सचिन तेंदुलकर की बल्लेबाजी के आगे कमजोर नजर आई। बांग्लादेश का गेंदबाजी आक्रमण सचिन तेंदुलकर का विकेट झटकने में नाकाम रही। टीम इंडिया के 79 रनों के स्कोर पर दो बल्लेबाज पैवेलियन लौट चुके थे। इसके बाद मैदान पर सचिन तेंदुलकर बल्लेबाजी करने आए। सचिन तेंदुलकर ने बांग्लादेशी गेंदबाजों की जमकर खबर ली और गेंदबाजों के घातक गेंदों पर भी रन बटोरे। हालांकि सचिन तेंदुलकर के अलावा टीम इंडिया के दूसरे बल्लेबाज बांग्लादेशी गेंदबाजी के आगे बेअसर नजर आए और बांग्लादेश के गेंदबाजों के आगे घुटने टेकते चले गए। सचिन तेंदुलकर ने इस पारी में शानदार शॉट खेले और अपने टेस्ट करियर में एक और शतक जोड़ लिया। इस पारी में लगाया गया शतक सचिन तेंदुलकर के टेस्ट करियर का 44वां शतक था। सचिन तेंदुलकर ने इस पारी में नाबाद 105 रनों की पारी खेली। सचिन तेंदुलकर के शतक के बदौलत ही टीम इंडिया का स्कोर पहली पारी में 243 रन हो पाया था। अगर इस मैच में सचिन तेंदुलकर नहीं होते तो बांग्लादेश जैसी कमजोर टीम के आगे टीम इंडिया के हालात और भी खराब हो सकते थे। सचिन तेंदुलकर ने अपनी 105 रनों की पारी में 62.25 की स्ट्राइक रेट के साथ 11 चौके और 2 छक्के लगाए। हालांकि आखिर में इस मैच का फैसला भारतीय टीम के पक्ष में रहा। भारत ने इस मैच में बांग्लादेश को हराकर 113 रनों से जीत दर्ज की। इस जीत के साथ ही सचिन तेंदुलकर को प्लेयर ऑफ द मैच भी चुना गया।

#45 शतक-143 ढाका में बांग्लादेश के खिलाफ (2010)

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साल 2010 में भारत ने बांग्लादेश में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट मैचों की सीरीज खेली। इस सीरीज में भारत ने चिट्टागोंग में खेले गए मैच में बांग्लादेश को 113 रनों से हरा दिया था। जिसके बाद भारतीय टीम इस सीरीज में 1-0 से आगे थी। पहला टेस्ट मैच हारने के बाद बांग्लादेश की टीम भी दबाव में आ चुकी थी। भारत और बांग्लादेश के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच ढाका में खेला गया। दूसरे मैच में भारतीय टीम बांग्लादेश की टीम पर हावी दिखी। चिट्टागोंग में खेले गए टेस्ट मैच में बांग्लादेश ने पहली पारी में भारतीय टीम को सस्ते में निपटा दिया था लेकिन ढाका में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में इसका उल्टा हो गया। दूसरे टेस्ट मैच में बांग्लादेश ने पहले बल्लेबाजी की। भारतीय गेंदबाजी के आगे बांग्लादेश का कोई भी बल्लेबाज टिक नहीं पाया और पहली पारी में भारतीय गेंदबाजों मे 233 रनों के स्कोर पर बांग्लादेश की टीम को समेट कर रख दिया। इसके जवाब में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में शानदार बल्लेबाजी की और बांग्लादेश के सामने 544 रनों का स्कोर खड़ा दिया। 544 रनों की इस पारी में टॉप स्कोरर सचिन तेंदुलकर रहे। इसके साथ ही टीम इंडिया ने बांग्लादेश पर 311 रनों की बढ़त भी हासिल कर ली। बांग्लादेश पर 300+ रनों की बढ़त हासिल करने के बाद बांग्लादेश बांग्लादेशी टीम पर दबाव पूरी तरह से देखा जा सकता था। सचिन तेंदुलकर ने बांग्लादेश के खिलाफ लगातार दूसरे टेस्ट मैच में शतक ठोक डाला था। टेस्ट क्रिकेट में शतकों के मामले में सचिन तेंदुलकर काफी आगे बढ़ चले थे। साल 2010 में ढाका में बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में सचिन तेंदुलकर के बल्ले से अपने टेस्ट करियर का 45वां शतक निकला। अपनी इस पारी में सचिन तेंदुलकर ने बांग्लादेशी गेंदबाजों के खिलाफ शानदार शॉट खेले। अपने 45वें शतक की पारी में सचिन तेंदुलकर ने 143 रन बनाए। इस पारी में उन्होंने 182 गेंदों का सामना किया। इसके साथ ही उन्होंने इस पारी में 13 चौरे और 1 छक्का भी लगाया। सचिन तेंदुलकर की पारी के बदौलत टीम इंडिया की रन रेट 4.09 प्रति ओवर की रही। इसके बाद भारतीय टीम से जहीर खान ने शानदार गेंदबाजी की। जहीर खान की गेंदबाजी के आगे कोई भी बांग्लादेशी बल्लेबाज टिक नहीं पाया और अपना विकेट गंवाता गया। जहीर खान की इस पारी में खतरनाक गेंदबाजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है उन्होंने इस मैच में 7 विकेट हॉल लेकर बांग्लादेश की टीम को जल्दी समेटने में मदद की। इसके साथ ही भारतीय टीम ने इस मैच में जीत दर्ज की और सीरीज पर 2-0 से कब्जा कर लिया। लेखक: सोहम समद्दर अनुवादक: हिमांशु कोठारी

Edited by Staff Editor
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