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भारतीय बल्लेबाजों की 5 ऑल टाइम टी20 अंतरराष्ट्रीय पारियों पर एक नजर

21   //    18 Aug 2018, 13:28 IST
जब साल 2003 में इंग्लैंड में टी-20 क्रिकेट की शुरुआत हुई थी तब इसे महज़ एक मनोरंजन के तौर पर देखा जा रहा था। आज इस बात को 14 साल बीत चुके हैं, टी-20 फ़ॉर्मेट दौलत कमाने का एक बहुत बड़ा ज़रिया बन चुका है। भारत ने अपना पहला टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ खेला था, जहां उसे हार का सामना करना पड़ा था। भारत को साल 2007 में आईसीसी वर्ल्ड कप में पहले दौर में ही बाहर होना पड़ा था। इसके बाद उसी साल आईसीसी वर्ल्ड टी-20 टूर्नामेंट की शुरुआत हुई थी। टीम इंडिया के कई बड़े खिलाड़ियों ने इस टूर्नामेंट से दूरी बनाने का फ़ैसला किया ताकि युवाओं को मौका दिया जा सके।

सभी परेशानियों के बावजूद टीम इंडिया ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में वर्ल्ड टी-20 का ख़िताब जीत लिया था। इसके एक साल बाद आईपीएल का जन्म हुआ और फिर क्रिकेट की दुनिया ही बदल गई। आज आईपीएल दुनिया की सबसे मशहूर क्रिकेट लीग बन चुकी है जिसमें विश्व के नामी गिरामी खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। भारतीय क्रिकेट फ़ैंस के लिए टी-20 उनकी पहली पसंद बन चुकी है। मैदान या टेलीविज़न पर सिर्फ़ 3 घंटे बिताना और रोमांच से सराबोर हो जाना हर किसी को पसंद आता है। टी-20 की कल्पना भारतीय खिलाड़ियों के ज़िक्र के बिना अधूरी है।

हम यहां भारतीय खिलाड़ियों द्वारा खेली गई 5 सबसे बेहतरीन टी-20 अंतरराष्ट्रीय पारियों को लेकर चर्चा कर रहे हैं। यहां उन पारियों को शामिल किया जा रहा जो बेहद दबाव में खेली गई थी।

#5 युवराज सिंह 58 बनाम इंग्लैंड, डरबन, 2007



साल 2007 में आईसीसी वर्ल्ड टी-20 के सुपर-8 मुकाबले में भारत अपना पहला मैच न्यूज़ीलैंड के हाथों हार चुका था। एक और हार भारत को टूर्नामेंट से बाहर कर सकती थी। टीम इंडिया का सामना अब इंग्लैंड से हो रहा था। भारत ने पहले बल्लेबाज़ी शुरू की। गौतम गंभीर और सहवाग ने पहले विकेट के लिए 136 रन जोड़े। इस साझेदारी टूटने के बाद भारतीय पारी लड़खड़ाने लगी। 16.4 ओवर में भारत का स्कोर 115-3 हो चुका था। फिर युवराज सिंह बल्लेबाज़ी के लिए मैदान में आए। युवी ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय के इतिहास का सबसे तेज़ अर्धशतक बनाया। उन्होंने महज़ 16 गेंदों में 58 रन की पारी खेली। स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में उन्होंने 6 गेंदों पर 6 छक्के जड़ दिए। इसके साथ ही युवराज सिंह इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गए।
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