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स्पोर्ट्सकीड़ा के 50 सर्वश्रेष्ठ भारतीय टेस्ट क्रिकेटर (1-10)

Modified 01 Nov 2017, 08:43 IST
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पिछले महीने के दौरान कई शीर्ष-स्तरीय खिलाड़ियों को सम्मानित करने के बाद, हम अपनी इस सीरीज के अंतिम भाग पर आ गये हैं। पिछले हफ्ते 20-11 रैंकों पर खिलाड़ियों को उनके आंकड़े और प्रदर्शन के आधार पर नवाजा गया था और अब बारी है भारतीय क्रिकेट के दिग्गज और महानतम खिलाड़ियों को 10-1 की रैंकिंग देने की। आज हम टेस्ट मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले दस महानतम क्रिकेटरों पर नजर डालेंगे। इस श्रेणी में भारतीय क्रिकेट के उन सितारों को जगह दी गई है जो क्रिकेट को धर्म समझने वाले इस देश की जनता और इस खेल के सबसे बड़े प्रारूप के इतिहास पर अपनी गहरी व अमिट छाप छोड़ने में कामयाब रहे। इन विशिष्ट खिलाड़ियों की गणना करने के लिए इन महत्वपूर्ण कारकों को ध्यान में रखा गया है- a) संपूर्ण करियर में निरंतरता b) जीते हुए मैच में प्रदर्शन c) भारत के बाहर टेस्ट मैच में प्रदर्शन d) भारतीय सरजमी पर मजबूत विरोधियों के खिलाफ बड़े मैचों में खेल को बदलने का प्रयास e) विश्व क्रिकेट में महानता, विरोधियों और विशेषज्ञों में राय f) पहले से मौजूद रूढ़िवादियों को तोड़कर नए ट्रेंड बनाना g) बल्लेबाजों के लिए 1000 रनों का न्यूनतम कट ऑफ / गेंदबाजों के लिए 100 विकेट/ विकेटकीपर के लिए 50 डिसमिसल अर्थपूर्ण नमूना आकार तैयार करने के लिए h) आंकड़ों को किसी खिलाड़ी के महत्व को दर्शाने के लिए ना आखिरी है और ना ही इन्हें अंतिम रूप कभी माना जायेगा। प्रत्येक क्रिकेटर के करियर के हर पहलू को जोडने के बाद एक आम सहमति बनाई गई है।

#10 हरभजन सिंह

harbhajan

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1998 में बैंगलोर टेस्ट के दौरान अंतरराष्ट्रीय टीम में आने के बाद हरभजन सिंह शुरूआत में उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। आलोचनाओं को झेलने के बाद हरभजन ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज से अपना शानदार कमबैक किया। भारत को 'द फाइनल फ्रंटियर' के रूप में लेबल करने के बाद, स्टीव वॉ की अगुवाई अजेय टीम हरभजन सिंह के आगे ढेर हो गई। 33.4 की स्ट्राइक रेट के साथ बेमिसाल 32 विकेट लेकर हरभजन ने भारत में खेले गए सबसे महान टीमों में से एक के खिलाफ सबसे यादगार टेस्ट सीरीज में जीत हासिल करने में भारत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तब से हरभजन ने वापस मुड़कर कभी नहीं देखा। 'टर्बनेटर' ने खुद को कप्तान सौरव गांगुली के प्रमुख हथियार के तौर पर स्थापित किया और यहां तक कि कई बार ऐसा हुआ कि जब टीम विदेश दौरे पर गई तब निपुण अनिल कुंबले की जगह प्लेइंग इलेवन में हरभजन को जगह दी गई। कुंबले के संन्यास लेने के बाद हरभजन ने भारत के प्रमुख स्पिनर की भूमिका निभाई और टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान निभाया।  रविचंद्रन अश्विन और रविंद्र जडेजा में जैसे विकल्पों के उभरने के बाद इस दिग्गज ने टीम से अपना स्थान खो दिया। फिर भी वह भारतीय टेस्ट इतिहास में तीसरे सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। करियर अवधि- 1998- वर्तमान  तक आंकड़ें- 103 मैच में 417 विकेट , 32.46 की औसत और 68.5 का स्ट्राइक रेट, 25 बार 5 विकेट लेने का कारनामा व 5 बार 10 विकेट अपने नाम किए ( नोट- हरभजन सिंह ने अभी टेस्ट क्रिकेट से आधिकारिक रूप से रिटायमेंट की घोषणा नहीं की है)
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Published 01 Nov 2017, 08:43 IST
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