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टेस्ट क्रिकेट इतिहास में भारतीय क्रिकेट टीम की तरफ़ से हर विकेट के लिए बेहतरीन साझेदारियां

सौम्या तिवारी

भारतीय क्रिकेट ने अपने टेस्ट कार्यकाल के दौरान कई महान सितारों को जन्म दिया है, जिन्होंने इतिहास के सुनहरे पन्नों पर एक के बाद एक अपना नाम दर्ज करवाया है। खिलाड़ियों ने ना सिर्फ व्यक्तिगत सफलताएं प्राप्त की है बल्कि टीम की जरूरत के अनुसार कंधे से कंधे जोड़ कर भारतीय टीम को मुश्किल की घड़ी से उबारा है। साथ मिलकर रन बनाये है और साथ मिलकर समय समय पर टीम का सहारा बनकर आगे आये हैं। यह क्रिकेट का खेल है जहां खिलाड़ियों की व्यक्तिगत सफलताओं का जश्न मनाया जाता है, एक टीम की तरह खेल खेला जाता है। यहां आज हम बात करेंगे कि खिलाड़ियों ने किस तरह प्रत्येक विकेट के लिए एकजुट होकर साझेदारियां की हैं और टीम इंडिया को हर मुश्किल मौके पर मिलकर बाहर निकाला है। नजर डालते हैं टेस्ट में टीम इंडिया के लिए प्रत्येक विकेट के लिए सबसे अधिक साझेदारियों पर।

पहले विकेट के लिए – वीनू मांकड़ और पंकज रॉय- 413

एक रिकार्ड जो समय की कसौटी पर तब तक खड़ा रहा जब तक कि बांग्लादेश के खिलाफ में ग्रीम स्मिथ और नील मैकेंजी की जोड़ी ने 2008 में इसे तोड़ नहीं दिया था। वीनू मांकड़ और पंकज रॉय ने अपने द्वारा बनाई गयी उच्चतम साझेदारी के लिए सम्मान हासिल किया था। एक बार फिर से वापस जाते हैं 1956 के साल में जब इस जोड़ी ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ रिकॉर्ड साझेदारी निभायी थी। सीरीज के पांचवें मैच में जब भारत 1-0 से आगे था उस मैच में इस जोड़ी ने साझेदारी कर 413 रनों का पहाड़ खड़ा किया। इस जोड़ी को आखिरकार मैट पोरे ने तोड़ा, पोरे की लेग स्पिन पर रॉय के आउट होने के बाद इस साझेदारी का अंत हुआ। जबकि दूसरे छोर पर माकड़ ने 231 रनों का योगदान दिया।

दूसरे विकेट के लिए – मुरली विजय और चेतेश्वर पुजारा- 370

जब टेस्ट में बल्लेबाजों के बेहतरीन प्रदर्शन की बात आती है तो उसमें मुरली विजय और चेतेश्वर पुजारा की जोड़ी का नाम जरुर आता है। भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज के दौरान भारत ने ऑस्ट्रेलिया पर 4-0 से भारी भरकम जीत दर्ज की थी। उस सीरीज में हैदराबाद टेस्ट के दौरान खेली गयी पारी को कौन भूल सकता है जिसमें इस जोड़ी ने अपने नाम 370 की साझेदारी निभायी थी। हालांकि यह सीरीज महेन्द्र सिंह धोनी के द्वारा चेन्नई में बनाये गये 224 रन के उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और पूरी सीरीज में रविन्द्र जडेजा द्वारा माइकल क्लार्क को परेशान करने के लिए याद की जाती है। ना की पुजारा के दोहरे शतक और विजय की संघर्षपूर्ण 167 के लिए। इस साझेदारी की बदौलत भारतीय टीम ने एक बड़ा स्कोर खड़ा किया और जिसकी वजह से मेजबान टीम मेहमान टीम पर पारी और 131 रन की जीत दर्ज करने में कामयाब रही।

तीसरे विकेट के लिए - वीरेन्दर सहवाग और सचिन तेंदुलकर - 336

इन दो धुरंधर खिलाड़ियों ने 2000 के दशक में कई यादगार पारियां खेली जिसमें से इनके द्वारा खेली गयी 336 रन की साझेदारी सबसे बड़ी पारी थी, जिसमें मुल्तान के सुलतान वीरेन्दर सहवाग ने अपना पहला तिहरा शतक ठोका था जो किसी भी भारतीय खिलाड़ी द्वारा लगाया गया पहला तिहरा शतक था। पाकिस्तानी गेंदबाजों की खबर लेते हुए सहवाग ने अपना स्वभाविक अंदाज की तरह ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करके विरोधी गेंदबाजी को तहस नहस कर दिया। यह टेस्ट आज भी सबसे रोमांचक टेस्ट मैच में गिना जाता है जिसने पाकिस्तानी गेंदबाज सकलैन मुश्ताक का करियर खत्म कर दिया। हालांकि उस साझेदारी के अलावा सचिन की वह पारी विवादों में तब घिर गयी जब अपने दोहरे शतक के करीब खड़े सचिन तेंदुलकर को 194 रन के स्कोर पर कप्तान राहुल द्रविड़ ने पारी घोषित करके उन्हें वापस बुला लिया।

चौथे विकेट के लिए- विराट कोहली और अंजिक्य रहाणे- 365

न्यूजीलैंड की टीम 2016 में टीम इंडिया के नाबाद रथ को रोकने के लिए भारत आयी थी लेकिन उन्हें 3-0 से करारी हार का सामना करना पड़ा। तीसरे टेस्ट में भारतीय टीम के नायक रहे विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे, वह तब क्रीज पर आये जब भारत का स्कोर 100-3 रन था और अपनी साझेदारी की बदौलत भारत को 557-5 तक पहुंचा दिया कोहली ने 366 गेंदों पर 211 की शानदार पारी खेली जबकि रहाणे ने 188 रनों के साथ कीवी गेंदबाजों की जमकर क्लास ली। इंदौर में निभायी गयी 336 रनों की साझेदारी पूरे श्रृंखला में भारत की तरफ से सर्वश्रेष्ठ रही, इस पारी की ने किवियों को पूरे मैच से बाहर कर दिया। और आखिरकार भारत ने यह टेस्ट मैच 321 रनों के विशाल अंतर से जीत लिया।

पांचवें विकेट के लिए - वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ - 376

एक ना भूलने वाली साझेदारी। कोलकाता में लक्ष्मण-द्रविड़ की मैराथन साझेदारी ने अगले कुछ दशकों के लिए भारतीय क्रिकेट को परिभाषित कर दिया था और उस फाइटिंग स्प्रिट के साथ भारत का सफर अगले दो साल में नेटवेस्ट सीरीज जीत, चैंपियंस ट्रॉफी सीरीज जीत और 2003 विश्व कप उपविजेता तक जारी रही। वापस आते हैं उसी मैच पर जब आधा मैच अपनी मुठ्ठी में कर चुके ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ ने टेस्ट मैच की दूसरी पारी की शुरुआत कर दी थी। जहां पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया ने 445 रनों का विशाल स्कोर बनाया था तो वहीं उन्होंने भारतीय टीम को 171 रनों पर समेट दिया था। लक्ष्मण जिन्होंने पहली पारी में सर्वाधिक स्कोर बनाये थे, उन्होंने दूसरी पारी में शानदार स्ट्रोक्स से क्रीज पर अपने पैर जमा लिए, वहीं दूसरी ओर राहुल द्रविड़ जो खराब फॉर्म से जूझ रहे थे उन्होंने 180 रनों की बेहतरीन पारी खेलकर मैच का रुख पूरी तरह से पलट दिया। कहते हैं क्रिकेट अनिश्चितिताओं का खेल है और फिर वह हुआ जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी भारत को फॉलोऑन देने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया यह जीता हुआ मैच हार गया।

छठे विकेट के लिए – दिलीप वेंगसरकर और रवि शास्त्री - 298*

चैंपियन ऑफ चैंपियंस अवार्ड को जीतने के एक साल बाद रवि शास्त्री एक बार फिर से सुर्खियों में आ गये और इस बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुंबई में उन्हें साथ मिला दिलीप वेंगसरकर का। हालांकि मैच ड्रॉ समाप्त हो गया लेकिन मध्यक्रम में वेंगसरकर और शास्त्री की जोड़ी ने (9 चौकों और 6 छक्के) साझेदारी करते हुए नाबाद 298 रन बनाये। जब पारी घोषित की गई तब वेंगसरकर 164 रन बनाकर नाबाद रहे और शास्त्री ने 121 बनाये। शास्त्री ने इसके बाद दो विकेट भी अपने नाम किए लेकिन मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ और सीरीज 0-0 पर खत्म हो गयी।

सातवें विकेट के लिए – रोहित शर्मा और रविचनद्रन अश्विन - 280

रोहित शर्मा को टेस्ट क्रिकेट में प्रवेश करने पर एक लंबा समय लगा, विशेष रूप से दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2010 में मैच के पहले चोट लगने के कारण, यह मैच भारत की तरफ से रोहित का पहला मैच हो सकता था। आखिरकार 2013 में जब शुरुआत हुई तब रोहित शर्मा ने सातवें विकेट के लिए मुश्किल 280 रन की साझेदारी करके अपने स्थान को सुनिश्चित कर लिया। अश्विन ने वेस्टइंडीज टीम की खबर लेते हुए, जोकि बल्लेबाजी के लिए उनकी पसंदीदा टीम है, इसके खिलाफ 124 रन बनाये वहीं रोहित ने 177 अपने नाम दर्ज करवाये। 83-5 रनों पर जूझ रही भारतीय टीम को मुश्किल से बाहर निकाला। क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप में रोहित की क्षमता पर सवाल जरूर उठते हैं, लेकिन कोलकाता में बनाये गये 177 रन उनके करियर का अबतक का सर्वोच्च स्कोर है।

आठवें विकेट के लिए – विराट कोहली और जयंत यादव - 241

2016 के पहले विराट कोहली को पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ बल्लेबाजी करते हुए बार बार नहीं देखा जा सकता था, इसका एक बड़ा कारण शतक को दोहरे शतक में ना बदल पाना भी था। मुरली विजय के 136 के साथ भारतीय टीम एक बड़ा स्कोर खड़ा करने का सोच रही थी लेकिन उसके आउट होने के बाद पूरा का पूरा मध्यक्रम धराशायी हो गया। लेकिन कप्तान विराट कोहली के साथ जयंत यादव की सराहनीय पारी की बदौलत भारत का स्कोर 600 के पार पहुंचा दिया। कोहली द्वारा बनाये गये 235 रन अगले साल तक उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर रहा, जिसके बाद वह समय के साथ और भी मजबूत होते गये। जबकि जयंत यादव के प्रदर्शन में लगातार गिरावट आती गयी और 2018 के साथ वह पूरी तरह से टीम से बाहर हो गये।

नौवें विकेट के लिए – नाना जोशी और रमाकांत देसाई - 149

1960 में पाकिस्तान के भारत दौरे के मुंबई टेस्ट में महान बल्लेबाज हनीफ मोहम्मद और सईद अहमद का पहली पारी में शतक लगाने का मतलब था कि मैच में पाकिस्तान का हावी होना। अपनी शानदार गेंदबाजी के दम पर पाकिस्तान ने भारत का स्कोर 300-8 कर दिया। फिर पुछल्ले बल्लेबाज नाना जोशी और रमाकांत देसाई ने नंबर 8 और नंबर 9 पर पहुंचकर क्रमशः 52 और 85 रन बनाकर 149 रन की साझेदारी निभा डाली और मेजबान टीम का स्कोर 450 के पास पहुंचा दिया। जल्द ही पारी घोषित करने की घोषणा आ गई लेकिन तब तक मैच एक ड्रॉ की ओर बढ़ गया था। यह मैच संयोगवश जोशी के लिए टीम इंडिया की तरफ से खेला गया आखिरी मैच था।

आख़िरी विकेट के लिए- सचिन तेंदुलकर और जहीर खान

सचिन तेंदुलकर का सर्वश्रेष्ठ टेस्ट स्कोर (और जहीर खान का भी) 2004 में भारत के बांग्लादेश दौरे में के ढ़ाका में खेले गये पहले गये पहले टेस्ट में आया था- इस पारी में एक समय 68-3 पर पहुंच गयी टीम इंडिया को मास्टर ब्लास्टर ने 526 के विशाल स्कोर तक पहुंचाया था जिसमें उन्होंने नाबाद 248 रन बनाये थे। जहीर जो बल्लेबाजी में बिल्कुल भी विशेषज्ञ नहीं थे, उन्होंने सचिन का साथ देते हुए भारत को बढ़त दिलायी और टीम इंडिया को 393-9 से 526 के स्कोर तक पहुंचाया। पार्ट टाइम गेंदबाज मोहम्मद अशरफुल के हाथों आउट होने के पहले उन्होंने 10 चौके और 2 छक्के लगाये। यह मैच भारत एक पारी और 140 रनों से जीत गया। लेखक- आद्या शर्मा अनुवादक- सौम्या तिवारी

Edited by Staff Editor

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