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क्रिकेट के सभी प्रारूपों में टेस्ट क्रिकेट ही है सर्वश्रेष्ठ

पुनीत शर्मा
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क्रिकेट का चाहे कोई भी प्रारूप क्यों न हो, क्रिकेट अपने हर प्रारूप में क्रिकेट प्रेमियों को अपना दीवाना बना लेता है। वैसे तो क्रिकेट के कई सारे फ़ॉर्मेट हैं, लेकिन इस समय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट के तीन स्वरूप ही अधिक प्रचलित हैं। इनमें पहला है टी-20, दूसरा है वनडे और तीसरा है टेस्ट क्रिकेट। वर्तमान समय में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेलने वाली सभी टीमें एक-दूसरे के खिलाफ इन्हीं तीन प्रारूपों में क्रिकेट खेलती हैं। क्रिकेट के प्रारूपों में भी समय-समय पर मनुष्य की जीवन शैली के अनुसार परिवर्तन आते रहे हैं। क्रिकेट के सभी प्रारूपों में टेस्ट क्रिकेट सबसे पुराना और ऐतिहासिक है। क्रिकेट की शुरुआत होने के बाद लम्बे समय तक सभी टीमें सिर्फ टेस्ट मैच ही खेला करती थीं। लेकिन समय जैसे-जैसे आगे बड़ा, लोगों के पास समय की कमी होने लगी। समय की इसी कमी के कारण क्रिकेट का संचालन करने वालों को क्रिकेट के इससे छोटे प्रारूप की आवश्यकता महसूस हुई और इसी कारण पाँच दिन तक चलने वाले टेस्ट मैचों के साथ-साथ एक दिन में ही समाप्त हो जाने वाले सीमित ओवरों वाले वनडे क्रिकेट का जन्म हुआ। पिछले दस-पंद्रह सालों में तो लोगों की सोच और जीवन शैली में तेजी से बदलाव आया है, अब लोगों के पास समय नाम की कोई चीज बची ही नहीं है। समय की यही कमी क्रिकेट के एक और प्रारूप की जननी बनी, जिसे हम टी-20 के नाम से जानते हैं। 7-8 घंटे चलने वाले 50-50 ओवरों के वनडे क्रिकेट के लिए भी जब वक्त की कमी आड़े आने लगी तो और भी ज्यादा छोटे मात्र 3-4 घंटे में ही खत्म होने वाले प्रारूप टी-20 क्रिकेट की शुरुआत हुई। और टेस्ट क्रिकेट एवं वनडे क्रिकेट के साथ-साथ टी-20 क्रिकेट भी आधुनिक क्रिकेट का एक महत्वपूर्ण अंग बन गया है। खैर जो भी हो एक बात तो माननी ही पड़ेगी कि भले ही क्रिकेट के छोटे और नए स्वरूप आ गये हों, लेकिन फिर भी टेस्ट क्रिकेट का रुतबा अभी भी कायम है। टेस्ट क्रिकेट का आकर्षण अभी भी बरकरार है, इसमें कोई कमी नहीं आई है। टेस्ट क्रिकेट का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि आज भी किसी देश को टेस्ट खेलने वाले देश का दर्जा और किसी खिलाड़ी को टेस्ट कैप आसानी से नहीं मिलते, इसके लिए उन्हें कठोर परिश्रम करना पड़ता है। आज सौ से भी अधिक देशों में क्रिकेट खेला जाता है, लेकिन फिर भी टेस्ट मैच खेलने की मान्यता मात्र 12 देश ही हासिल कर सकें हैं। वैसे टेस्ट क्रिकेट की लोकप्रियता की एक वजह ये भी है कि टी-20 और वनडे में खिलाड़ी के पास अपनी प्रतिभा दिखाने के सीमित अवसर ही होते हैं, दबाब रूपी डोर उनकी प्रतिभा के पंखों को बांध देती है! जबकि टेस्ट क्रिकेट किसी खिलाड़ी की प्रतिभा को उड़ने के लिए खुला आकाश देता है। टेस्ट मैच में ही खिलाड़ी के धैर्य और प्रतिभा का असली टेस्ट होता है। टेस्ट क्रिकेट की एक और खासियत है जो इसे और भी अनूठा बनती है वो ये है कि जहां वनडे और टी-20 में यदि मैच में कोई व्यवधान न आये तो मैच का परिणाम अवश्य आता है, एक टीम या तो जीतती है या फिर हारती है, हां कभी-कभार अपवाद स्वरूप मैच टाई हो जाता है, जबकि टेस्ट मैच में मैच पूरा होने पर भी क्या परिणाम आएगा? इसकी कोई गारंटी नहीं होती। टेस्ट में हार, जीत और टाई ही परिणाम नहीं होते, बल्कि इन तीनों परिणामों के अलावा भी एक चौथा परिणाम और आ सकता है वो है मैच का ड्रॉ होना। कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो ड्रॉ मैच का भी अपना एक अलग रोमांच होता है। मैच बचाने के लिए बल्लेबाजों का संघर्ष करना हो या गेंदबाजों का उन्हें आउट करके मैच अपनी झोली में डालने का संघर्ष दोनों ही देखते ही बन पड़ते हैं। शायद इसीलिए अंग्रेजी में कहते भी है कि "ईस्ट और वेस्ट, टेस्ट क्रिकेट इज द बेस्ट" अर्थात पूरब हो या पश्चिम, टेस्ट क्रिकेट ही सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट है। टेस्ट मैचों का जलवा अभी भी कितना कायम है, टेस्ट मैच देखने के लिए आने वाली भीड़ इस बात की गवाह है। आज भी ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की बीच होने वाली एशेज सीरीज हो या भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के प्रति लोगों का जुनून देखते ही बनता है।


Edited by Staff Editor
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