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2008 अंडर-19 विश्वकप के खिलाड़ी जो वर्तमान में अपनी टीम के प्रमुख सदस्य हैं

ऋषि
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आने से पहले युवा खिलाड़ियों को अंडर-19 और 'ए' टीमों में खेलने का मौका दिया जाता है ताकि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने से पहले उसी प्रकार के दबाव महसूस कर सकें और बड़े स्तर पर खेलने का अनुभव भी प्राप्त कर लें। मोहम्मद कैफ़ की अगुआई वाली भारत की अंडर-19 टीम 2000 का विश्वकप जीतने में सफल रही और उस टीम के कई खिलाड़ी भारतीय अंतरराष्ट्रीय टीम में जगह बनाने में सफल हुए थे और सीनियर स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन कर आने वाले खिलाड़ियों के लिए उदाहरण बने थे। उसके 8 साल बाद दिल्ली के आक्रमक युवा बल्लेबाज विराट कोहली की अगुआई में भारतीय टीम ने फाइनल मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को मामूली अंतर से हराकर विश्वकप अपने नाम किया। विराट कोहली अभी भारतीय टीम के कप्तान हैं और उनके अलावा ऑलराउंडर रविन्द्र जडेजा और बल्लेबाज मनीष पाण्डेय का करियर भी सही दिशा में जा रहा है। kohli इनके अलावा सौरभ तिवारी और अभिनव मुकुंद को अंतरराष्ट्रीय मैच में मौका तो मिला लेकिन वो ज्यादा समय तक अपनी जगह नहीं बचा पायें। वहीं तरुवर कोहली, फाइनल के हीरो अजितेश अरगल, आइन्स्टाइन नेपोलियन और तन्मय श्रीवास्तव अच्छी शुरुआत के बाद प्रथम श्रेणी क्रिकेट से आगे नहीं बढ़ पाये। यहाँ अन्य टीमों के खिलाड़ियों के बारे में आपको बताते है जिन्होंने 2008 अंडर-19 विश्वकप से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई है। न्यूज़ीलैंड new कोहली की तरह ही केन विलियमसन आज विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में गिने जाते हैं और न्यूजीलैंड टीम के कप्तान भी हैं। विलियमसन आजकल की बल्लेबाजों की तरह ऊँचे और बड़े शॉट नहीं खेलते हैं बल्कि 70 की दशक के बल्लेबाजों की तरह मैदानी शॉट खेलने में भरोसा रखते हैं। उन्होंने मेहनत से अपने आप को आजकल के परिदृश्य में ढाला है और आज न्यूज़ीलैंड की बल्लेबाजी की रीढ़ बने हुए हैं। 2008 का अंडर-19 विश्वकप उनके लिए कुछ खास नहीं रहा था। वहां उन्होंने 5 मैचों में 49 की स्ट्राइक रेट से सिर्फ 124 रन बनाए थे। वर्तमान समय में न्यूजीलैंड के 2 प्रमुख तेज गेंदबाज टिम साउथी और ट्रेंट बोल्ट उस समय से ही साथ गेंदबाजी कर रहे हैं। जहां विलियमसन ने 2010 में अपना अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया वहीं साउथी को विश्वकप से एक सप्ताह पहले ही टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में मौका मिल गया था। साउथी ने उस अंडर-19 विश्वकप में मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार भी हासिल किया था। इनके अलावा ऑलराउंडर कोरी एंडरसन और हमीश रदारफोर्ट भी उस टीम का हिस्सा थे जिन्हें न्यूज़ीलैंड की अंतरराष्ट्रीय टीम में खेलने का मौका मिला। ऑस्ट्रेलिया 7eb0c-1510671475-800 स्टीव स्मिथ के करियर में गजब का बदलाव हुआ है। एक समय लेग स्पिनर के तौर पर क्रिकेट की शरुआत करने वाले स्मिथ आज दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। स्मिथ 2008 में मलेशिया में हुए अंडर-19 विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया टीम का हिस्सा थे लेकिन उस समय भी वो गेंदबाज के तौर पर ही टीम में थे। उस विश्वकप में उन्होंने 4 मैचों में 28.50 की औसत से 114 रन बनाए थे और 7 विकेट भी हासिल किया था। स्मिथ के अलावा ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड और जेम्स पैटिंसन भी उस टीम का हिस्सा थे। अंतरराष्ट्रीय टीम का जबरदस्त शुरुआत करने वाले ऑलराउंडर जेम्स फॉकनर भी उस टीम का हिस्सा थे। 2015 में अपने पदार्पण के बाद से ऑस्ट्रेलिया टीम का प्रमुख सदस्य बन चुके मार्कस स्टोइनिस भी 2008 विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया की टीम में थे। स्वर्गीय फिलिप ह्यूज, जिनकी मौत 2014 में सिर में गेंद लगने की वजह से हुई थी वो भी इस टीम के सदस्य थे। पाकिस्तान 7916e-1510671579-800 पाकिस्तान की टीम ने वर्तमान कप्तान सरफ़राज़ खान की कप्तानी में 2006 अंडर-19 विश्वकप अपने नाम किया था लेकिन 2008 में उन्हें सेमीफाइनल में मजबूत दक्षिण अफ्रीका के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इस विश्वकप में पाकिस्तान की अगुआई वेल्स में जन्में ऑलराउंडर इमाम वसीम के हाथ में थी, जिन्होंने 2015 पाकिस्तान की सीनियर टीम की तरफ से खेलने का मौका मिला और आज वो टीम के प्रमुख खिलाड़ी हैं। उनकी टीम में जुनैद खान भी थे जिनका मुकाबला विराट कोहली से काफी चर्चा में रहता है (भारतीय कप्तान से इस साल चैंपियंस ट्रॉफी के पहले तक जुनैद की 22 गेंदों में सिर्फ 2 रन बनाए थे) और मोहम्मद आमिर के टूर्नामेंट से नाम वापस लेने की वजह से टीम के प्रमुख गेंदबाज बन गए थे। इनके अलावा उस टीम में पाकिस्तान के सबसे प्रतिभावान युवा बल्लेबाज माने जाने वाले उमर अकमल भी थे जिन्हें जल्द ही 2009 में पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका मिल गया। अन्य खिलाड़ियों में अहमद शहजाद और शान मसूद प्रमुख थे जिन्होंने पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में काफी नाम कमाया। श्रीलंका cfdd9-1510671846-800 भारत और श्रीलंका की टीमें लगातार एक- दूसरे के साथ खेलती ही रहती है। श्रीलंका के वर्तमान कप्तान दिनेश चांडीमल भी मलेशिया में हुए इस मिनी विश्वकप में श्रीलंका की टीम में थे लेकिन उनका प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा था। 5 मैचों में चांदीमल का औसत मात्र 4.40 का ही रहा था। इसके अलावा लहिरु थिरिमाने भी उसी टीम का हिस्सा थे, उसके बाद जल्द ही साल 2010 में श्रीलंका की सीनियर टीम का हिस्सा बन गए थे। सीमित ओवरों के खेल के विशेषज्ञ माने जाने वाले ऑलराउंडर थिसारा परेरा भी उस श्रीलंकाई टीम में थे और जल्द ही उन्हें 2009 में श्रीलंका की तरफ से अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका मिल गया। परेरा ने अभी तक करीब 200 एकदिवसीय मैच खेल लिए हैं। कुसल परेरा जो 2013 से श्रीलंका के लिए खेल रहे हैं वो भी उस टीम में थे। इन सब के बावजूद श्रीलंका की टीम पर पूर्व दिग्गजों के जाने का असर दिख रहा है और टीम का प्रदर्शन लगातार नीचे की तरफ गिर रहा है। वेस्टइंडीज westindies राष्ट्रीय बोर्ड द्वारा बाहर का रास्ता दिखाए जाने से पहले डैरेन ब्रावो वेस्टइंडीज के मध्यक्रम की दीवार थे। वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा के रिश्तेदार और ड्वेन ब्रावो के छोटे भाई डैरेन उस वेस्टइंडीज टीम का हिस्सा थे। उनके अलावा एड्रिअन बराथ, कायरन पॉवेल, डेवोन थॉमस और वीरसमी परमौल भी उस टीम में थे। इंग्लैंड 663a3-1510672700-800 इंग्लैंड के टीम द्वारा टी20 विश्वकप जीतने के 2 साल पहले इंग्लैंड की अंडर-19 टीम ने कई बड़े सितारे दिए। ये खिलाड़ी अंडर-19 विश्वकप और घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर अंतरराष्ट्रीय टीम का हिस्सा बने। इनमें स्टीवन फिन, जेम्स टेलर, लियाम डॉसन, स्टुअर्ट मिकर, क्रिस वोक्स और टॉम वेस्टले इंग्लैंड की टीम का हिस्सा बने। अन्य देशों के प्रमुख खिलाड़ी 35043-1510673474-800 बांग्लादेश के नासिर हुसैन, रुबेल हुसैन, सुभाशीष रॉय, सुह्रावादी शुवो; दक्षिण अफ्रीका के वेन पर्नेल, रिली रोसो, जेजे स्मट्स ज़िम्बाब्वे के पीटर मूर, सोलोमन मीर और काइल जार्विस को सीनियर टीम में खेलने का मौका मिला।

Edited by Staff Editor
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