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ग़लत युग में पैदा होने वाले खिलाड़ियों की एक ऐसी एकादश जिसमें सितारों की भरमार है

Modified 09 Jul 2018, 07:55 IST
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जब 5 जनवरी, 1971 को पहले अंतराष्ट्रीय वनडे मैच के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम इंग्लैंड के खिलाफ प्रतिष्ठित मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में उतरी, तो शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि वनडे प्रारूप इस खेल में एक नई क्रांति लाएगा। जबकि शुरुआती वनडे मैच 40 ओवरों का था, क्रिकेट का यह प्रारूप धीरे धीरे विकसित हुआ और आज यह क्रिकेट का सबसे लोकप्रिय प्रारूप है। हालाँकि, इस बात का अफ़सोस है कि कई महान क्रिकेट वनडे प्रारूप में नहीं खेल सके। इस लेख में, हम ऐसे खिलाड़ियों के बारे में जानेंगे जो महान खिलाड़ी होने के बावजूद शायद गलत काल-खंड में पैदा हुए और बहुत कम वनडे मैच खेल सके। इसके अलावा इस फेहरिस्त में उन खिलाड़ियों को भी शामिल किया गया है जो भारी प्रतिस्पर्धा के चलते अपनी वनडे टीम में जगह नहीं बना पाए और अगर इन खिलाड़ियों को मौका मिलता तो ये वनडे प्रारूप के महान खिलाड़ी बन कर उभर सकते थे:

सलामी बल्लेबाज़

  1960 के दशक और 1970 के दशक में भारतीय टीम के कुछ विश्व-स्तरीय क्रिकेटरों में से, फारूक इंजीनियर भारतीय टीम के एक अहम खिलाड़ी थे। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज़ ने अपने टेस्ट कैरियर में कई रिकॉर्ड बनाए है। अपने बेहतरीन समय में सीमित ओवरों की अनुपस्थिति के कारण वह एक टेस्ट खिलाड़ी बन कर रह गए। हालाँकि, अपने करियर के अंत में उन्हें पांच वनडे खेलने का मौका मिला। बेवन कांगडन न्यूज़ीलैंड के प्रथम महान कप्तान थे। 1970 के दशक के शुरुआती चरण के दौरान उनके मजबूत नेतृत्व कौशल ने किवी टीम को विश्व-स्तरीय टीमों की फेहरिस्त में ला खड़ा किया। अपनी बेजोड़ तकनीक और दृढ़ता के लिए जाने जाते इस बल्लेबाज़ ने अपने टेस्ट करियर में 7 शतक और 19 अर्धशतक लगाए। अपने क्रिकेट करियर के आखिरी दौर में उन्हें वनडे खेलने का मौका मिला और उन्होंने 11 वनडे मैचों में एक शतक और दो अर्धशतक के साथ 56.33 की बेहतरीन औसत से रन बनाए हैं।
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Published 09 Jul 2018, 07:55 IST
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