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3 शानदार पारियां जिन्होंने भारतीय क्रिकेट के पैमाने को ही बदल दिया

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1.33K   //    04 Nov 2018, 16:01 IST

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भारतीय क्रिकेट टीम में ऐसी कई परफॉर्मेंस देखी गई हैं जिनके कारण भारतीय बल्लेबाजों ने अपनी बैटिंग के दम पर अपने फैंस के दिलों में जगह बनाई और दुनिया भर के एक्सपर्टों से तारीफें बटोरी हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाजों ने जिस तरह से खुद को पूरी दुनिया के सामने साबित किया है वो भी अपने आप में काबिल-ए-तारीफ है। ऐसी कई पारी है जिनमें भारतीय क्रिकेट टीम में अपनी दमदार बल्लेबाजी के दम पर दुनिया भर के लोगों को हैरान कर दिखाया है। खुद क्रिकेट के भगवान माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर भी मानते हैं कि दुनिया भर में किसी भी दूसरे देश की क्रिकेट टीम के मुकाबले भारतीय क्रिकेट टीम सबसे कम समय में सबसे ज्यादा मजबूत बनकर सामने आई है।


#3 सुनील गावस्कर की इंग्लैंड के खिलाफ 1979 में 221 रनों की पारी

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उन दिनों किसी भी बैट्समैन के जरिए खेली गई ये एक ऐसी पारी थी जिसकी चर्चा दुनिया भर में की जा रही थी। चौथे टेस्ट मैच में भारत को इंग्लैंड ने 438 रनों का लक्ष्य दिया था। धुरंधर बल्लेबाज सुनील गावस्कर मैदान में चेतन चौहान के साथ इस लक्ष्य का सामना करने उतरे। दोनों ने 213 रनों की साझेदारी की। इसके बाद बॉब विल्स ने चेतन चौहान का पहला विकेट झटक लिया लेकिन सुनील गावस्कर का बल्ला इसके बाद भी थमने का नाम नहीं ले रहा था।

इसके बाद नंबर तीन पर मैदान में उतरे बल्लेबाज दिलीप वेंगसकर के साथ साझेदारी करते हुए गावस्कर मे एक शतक और जड़ दिया। वेंगसरकर के साथ मिलकर गावस्कर ने 366 रनों का स्कोर बना दिया था। इस पारी के दौरान गावस्कर ने स्ट्रेट ड्राइव्स, स्कवायर कट्स और एपलोम्ब के साथ फ्लिक्स सभी शॉट्स खेले। 389 रनों का स्कोर बनाने के बाद बोथम की बॉल पर गावस्कर कैच आउट हो गए थे। गावस्कर ने इस दौरान 221 रनों की शानदार पारी खेली थी जिसने दुनिया भर के एक्सपर्टों को हैरान कर दिया था।

490 मिनट की इस पारी के दौरान गावस्कर ने 21 बाउंड्री शॉट्स खेले थे। ऐसी शानदार पारी के बाद उन्हें इंग्लिश टीम की ओर से स्टेंडिंग ओवेशन के जरिए सम्मान दिया गया था जो अपने में काफी अहम बात है। हालांकि ये टेस्ट मैच ड्रा हो गया था भारत ने पांचवें दिन 8 विकेट खोकर 429 रन बनाए थे। ये दूसरी बार था जब भारतीय क्रिकेट टीम 400 से ज्यादा रनों का लक्ष्य पाने के लिए मैदान में उतरी थी। इस इनिंग के बाद भारतीय क्रिकेट में पहले से कहीं ज्यादा आत्मविश्वास पैदा हो गया था क्योंकि टीम इतने बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के काफी करीब पहुंच चुकी थी।

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