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टेस्ट क्रिकेट इतिहास में भारतीय कप्तानों की 10 सबसे यादगार पारियां

देवांश अवस्थी

क्रिकेट में हम अक्सर एक जुमला सुनते रहते हैं, 'कप्तानी पारी'। अब सवाल उठता है कि कप्तानी पारी का मतलब किस तरह की पारी से है। दरअसल, जब कप्तान जरूरत के समय और परिस्थिति के हिसाब से अपनी पारी को गढ़ता है और पूरी टीम के मनोबल में इजाफा करता है, तब उसकी पारी को कप्तानी पारी की संज्ञा मिलती है। आज हम बात करने जा रहे हैं, भारतीय कप्तानों द्वारा टेस्ट क्रिकेट में खेली गईं, ऐसी ही 10 यादगार पारियों के बारे में। खासतौर पर वे पारियां, जो विदेशी धरती पर खेली गईं।

#10 महेंद्र सिंह धोनी- दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 90 रन (सेंचुरियन - 2010)

एम एस धोनी, भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक हैं। वैसे तो आंकड़ों के हिसाब से धोनी के नाम पर सिर्फ 6 टेस्ट शतक हैं और सारे घरेलू जमीन पर ही हैं, लेकिन फिर भी बड़ी जरूरत के मौकों पर धोनी ने हमेशा पारी का नेतृत्व किया है। 2010/11 में भारत, दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर था। उस वक्त टीम इंडिया टेस्ट में नंबर 1 थी। दक्षिण अफ्रीका के पिचें बेहद तेज हैं और हमेशा से ही भारतीय बल्लेबाजों के लिए चुनौतीपूर्ण रही हैं। पहले टेस्ट की पहली पारी में नंबर 1 टीम इंडिया बुरे प्रदर्शन के साथ 136 रनों पर ही सिमट गई। जिसके जवाब में दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी में 620 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। दूसरी पारी में भी भारत संघर्ष करता ही दिख रहा था। सचिन क्रीज पर थे और मध्यक्रम में उनका साथ देने उतरे धोनी। पिछली पारी में धोनी सिर्फ 33 रन ही बना सके थे। जब धोनी, सचिन का साथ देने उतरे, तब तक भारत, दक्षिण अफ्रीका से 200 रन पीछे था। धोनी ने तेज पारी खेलते हुए 106 गेंदों में ही 90 रन बना डाले और सचिन के साथ मिलकर 172 रनों की साझेदारी की। धोनी के यह बेहद खास 90 रन फैन्स के जहन में ताजा नहीं रह पाए क्योंकि इस मैच में ही सचिन ने अपने टेस्ट करियर का 50वां शतक जड़ा। भारत मैच हार भी गया, लेकिन बोलिंग के लिए मददगार पिच पर और दक्षिण अफ्रीका के तेजतर्रार बोलिंग अटैक के सामने धोनी की यह 90 रनों की पारी अपनी खास जगह बना गई। इस पारी को विदेशी धरती पर धोनी की सर्वश्रेष्ठ पारियों गिना जा सकता है।

#9 सुनील गावस्कर - न्यूजीलैंड के खिलाफ 116 रन (ऑकलैंड - 1976)

1971 में सुनील गावस्कर ने क्रिकेट में अपना पदार्पण किया था। 1970 का दशक भारत के लिए काफी अच्छा जा रहा था और भारत विदेशी जमीन पर जीत हासिल करने में कामयाब रहा था। इस साल भारत ने न्यूजीलैंड का दौरा किया। पहले टेस्ट में कप्तानी गावस्कर के पास थी और बतौर कप्तान यह उनका पहला मैच था। न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। कीवी टीम पहली पारी में 266 रन ही बना सकी। सुनील गावस्कर ने टीम का शानदार नेतृत्व किया। दिलीप वेंगसरकर का विकेट गिरने के बाद गावस्कर ने सुरिंदर अमरनाथ (124) के साथ मिलकर पारी की कमान संभाली। गावस्कर ने क्रीज पर 6 घंटे बिताए और 116 रनों की बेहतरीन पारी खेली। गावस्कर और सुरिंदर की शतकीय पारियों की बदौलत भारत ने 414 रनों का स्कोर खड़ा किया और दूसरी पारी में भी बेहतरीन प्रदर्शन को जारी रख, मैच अपने नाम किया।

#8 राहुल द्रविड़ - पाकिस्तान के खिलाफ 103 रन (फैसलाबाद - 2006)

इस बात में कोई दोराय नहीं हो सकती है, राहुल द्रविड़ भारतीय टेस्ट क्रिकेट इतिहास के मसीहाई खिलाड़ियों में शुमार होते हैं। उनकी कप्तानी को हमेशा कम आंका गया, लेकिन आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते। कप्तानी के कार्यकाल के दौरान द्रविड़ का औसत 60 से अधिक का रहा है। इतना ही नहीं, अपने वक्त में वह विदेशी पिचों पर भारत के सबसे जिम्मेदार खिलाड़ी रहे और उन्होंने अपनी क्षमता को कई बार साबित किया। हाल में टीम को अंडर-19 विश्व कप में जीत दिलाने के बाद द्रविड़ ने एक बार फिर आलोचकों को गलत साबित करते हुए, अपनी नेतृत्व क्षमता को परोक्ष रूप से साबित करके दिखाया। साल 2006 की शुरूआत में भारत ने पाकिस्तान का दौरा किया। पहले टेस्ट में द्रविड़ 128 रनों की धमाकेदार पारी खेल चुके थे। दूसरे टेस्ट में उनका इरादा अपने प्रदर्शन को दोहराने का था। दूसरे टेस्ट की पहली पारी में पाकिस्तान ने 588 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया और भारत के ऊपर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन विरोधी टीम के मनसूबों को अपने धैर्य और इरादे से जो बड़ी आसानी से डिगा दे, उसी का नाम है द्रविड़। द्रविड़ अपनी तरह का खेल पूरे आत्मविश्वास से खेल रहे थे। उन्होंने 103 रनों की बेहतरीन पारी खेली। यह द्रविड़ का 23वां शतक था। द्रविड़ के बाद धोनी ने 148 रनों की बेहद आक्रामक पारी खेली और भारत ने 603 रनों का स्कोर खड़ा किया। मैच ड्रॉ रहा।

#7 कपिल देव – वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 100 रन (पोर्ट ऑफ स्पेन - 1983)

1983 का साल भारत और कपिल देव के लिए हमेशा ही यादगार रहेगा। भारत ने अपना पहला विश्वकप जीता और कपिल देव ने विजेता टीम की कप्तानी की। वैसे इस साल जून में विश्वकप से पहले ही भारत के लिए कई बड़े मैच हो चुके थे। सुनील गावस्कर से कप्तानी की जिम्मेदारी लेकर अब कपिल देव के हाथों में सौंपी गई थी। करियर के 50वें और बतौर कप्तान दूसरे टेस्ट में ही कपिल देव ने मैच जिताने वाली पारी खेली। वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के पहले टेस्ट में भारत हार चुका था। दूसरे टेस्ट में पहली पारी में भारत ने पहले बल्लेबाजी की और सिर्फ 175 रनों पर पूरी टीम आउट हो गई। कप्तान कपिल देव सिर्फ 13 ही रन बना सके। जवाब में वेस्टइंडीज ने 394 रन बना डाले और भारत 119 रनों से पिछड़ गया। मोहिंदर अमरनाथ की 117 रनों की पारी की बदौलत भारत 5 विकेट खोकर 325 रन बना सका। भारत के पास 106 रनों की बढ़त थी और इस वक्त ही कपिल देव मैदान पर आए। इस दौरान पारी को संभालना बेहद जरूरी था। कपिल ने मौके और जिम्मेदारी का मान रखा और 100 गेंदों पर 95 रनों की पारी खेली। कपिल ने इस पारी में 13 चौके और 3 छक्के लगाए।

#6 मोहम्मद अजहरूद्दीन – न्यूजीलैंड के खिलाफ 192 रन (ऑकलैंड - 1990)

अजहरूद्दीन ऐसे भारतीय खिलाड़ी रहे हैं, जिनका करियर लंबे वक्त तक और बार-बार विवादों में घिरता रहा। लेकिन इन सब विवादों के बावजूद, बतौर बल्लेबाज अजहर हमेशा फैन्स के दिलों पर राज करते रहे। उनके क्लास और स्टाइल की मिसालें आज भी दी जाती हैं। 1990 में न्यूजीलैंड दौरे के लिए उन्हें क्रिस श्रीकांत की जगह लाया गया और कप्तानी सौंपी गई। सीरीज का पहला टेस्ट भारत हार गया। दूसरे टेस्ट में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 391 रनों का स्कोर खड़ा किया। जवाब में भारत का ऊपरी बल्लेबाजी क्रम विफल रहा और टीम ने सिर्फ 71 रनों पर शीर्ष तीन बल्लेबाज गंवा दिए। इसके बाद 5वें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे अजहर ने खेल की दिशा बदल ली। उन्होंने 192 रनों की पारी खेली और भारत को 482 के स्कोर तक पहुंचाया। अजहर की इस पारी की बदौलत भारत मैच ड्रॉ कराने में कामयाब रहा।

#5 विराट कोहली – दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 153 रन (सेंचुरियन - 2018)

विराट कोहली हमेशा से ही ऐसे कप्तान रहे हैं, जिन्होंने टीम के सामने एक अच्छा उदाहरण पेश किया है। हाल ही में समाप्त हुई टेस्ट सीरीज के पहले टेस्ट में भारत को हार का सामना करना पड़ा और कोहली अच्छा खेल नहीं दिखा सके। दूसरे टेस्ट में पहली पारी में दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी में 335 रनों का स्कोर खड़ा किया। जवाब में भारत ने सिर्फ 28 रनों पर ही 2 विकेट गंवा दिए। बल्लेबाजी की कमान संभालने का मौका एक बार फिर कोहली के पास था। कोहली ने अपने ऊपर बने दबाव को दरकिनार करते हुए दूसरे टेस्ट में एकबार फिर अपनी काबिलियत को साबित किया। साथी खिलाड़ी आउट होते रहे, लेकिन कोहली की रफ्तार नहीं थमी। कोहली ने अपने टेस्ट करियर का 21वां शतक जमाते हुए 153 रनों की पारी खेली। हालांकि, मैच का परिणाम एकबार फिर भारत के पक्ष में नहीं रहा और दूसरी पारी में 287 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को हार झेलनी पड़ी।

#4 सौरव गांगुली – ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 144 रन (ब्रिस्बेन - 2003)

सौरव गांगुली की कप्तानी में भारत विदेशी पिचों पर अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, लेकिन 2001-2001 के दौरान गांगुली अपने बल्ले से कुछ खास कमाल नहीं दिखा पा रहे थे। इस वजह से गांगुली को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा रहा था, लेकिन 2003/04 में गांगुली ने वापसी करते हुए एकबार फिर आलोचकों का मुंह बंद किया। ऑस्ट्रेलिया दौरे के पहले टेस्ट में भारत ने पहली पारी में अच्छी गेंदबाजी करते हुए कंगारुओं को 323 रनों पर रोक दिया, लेकिन भारतीय बल्लेबाजी इस सफलता को आगे नहीं बढ़ा सकी और 62 रनों पर ही 3 विकेट गंवा दिए। सचिन और द्रविड़, दोनों ही पवेलियन लौट चुके थे। गांगुली 5वें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और 144 रनों की कप्तानी पारी खेली। भारत पहली पारी में 409 बनाने में कामयाब हुआ।

#3 मोहम्मद अजहरूद्दीन – इंग्लैंड के खिलाफ 179 रन (ओल्ड ट्रैफर्ड - 1990)

1990 का इंग्लैंड दौरा भारत के इसलिए भी खास है क्योंकि इस दौरान ही सचिन तेंदुलकर ने अपना पहला टेस्ट शतक जड़ा था। बतौर कप्तान अजहर के लिए यह सीरीज बेहद खास रही थी। अजहर ने पहले टेस्ट में शतक जमाया था और दूसरे टेस्ट में भी उनका इरादा कुछ ऐसा ही था। दूसरे टेस्ट की पहली पारी में इंग्लैंड ने 519 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया और भारत की शुरूआत अच्छी नहीं रही। भारत ने 57 रनों पर अपने शीर्ष 3 बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए। अजहर ने एकबार फिर कमान संभाली और 179 रनों की बेहतरीन पारी खेली। अजहर की इस पारी की बदौलत भारत पहली पारी में 432 रन बनाने में कामयाब रहा। तीसरे दिन लंच के बाद अजहर के नाम पर एक बड़ा रिकॉर्ड दर्ज हुआ। वह एक सत्र में 100 रन बनाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। साथ ही, 17 साल के सचिन की 119 रनों की पारी की बदौलत भारत मैच बचाने में कामयाब रहा।

#2 सचिन तेंदुलकर – दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 169 रन (केपटाउन - 1997)

1996/97 में दक्षिण अफ्रीका का यह दौरा, बतौर कप्तान सचिन के लिए पहला विदेशी दौरा था। सीरीज का पहला मैच भारत के लिए बहुत खराब रहा। टीम पहली और दूसरी पारी में क्रमशः 100 और 66 रन ही बना सकी थी। दूसरा टेस्ट भी भारत के लिए खराब ही जा रहा था। पहली पारी में मेजबानों ने 529 रनों का स्कोर बनाकर, 33 रनों पर भारत के 4 विकेट गिरा दए। हालात और भी खराब हुए और भारत ने 58 रनों पर 5 विकेट गंवा दिए। कप्तान सचिन 5वें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और उनका इरादा कुछ खास करने का था। उन्होंने अजहरूद्दीन (115) के साथ मिलकर 222 रनों की बेहद जरूरी साझेदारी की। सचिन ने बेहतरीन कप्तानी पारी खेलते हुए 169 रन बनाए और पहली पारी में भारत को फॉलो-ऑन से बचाया। पारी में सचिन ने 26 बाउंड्रीज लगाईं।

#1 विराट कोहली – ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 141 रन (ऐडिलेड - 2014)

फिलिफ ह्यूज की दुर्भाग्यपूर्ण मौत की वजह से सीरीज के पहले टेस्ट में देरी हुई। धोनी, चोट की वजह से पहले टेस्ट से बाहर हो गए और जिम्मेदारी आई कोहली के कंधों पर। पहले बल्लेबाजी करते हुए कंगारुओं ने पहली पारी में 517 रन बना डाले। कोहली की 115 रनों की पारी की बदौलत भारत ने भी करारा जवाब देते हुए पहली पारी में 444 रन बना डाले। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी के बाद भारत के सामने मैच जीतने के लिए 364 रनों का लक्ष्य था और मैच का आखिरी दिन था। सिर्फ 98 ओवर बाकी थे। भारत 57/2 के स्कोर पर था, जब कोहली मध्यक्रम की कमान संभालने उतरे। ऑस्ट्रेलिया, भारत पर हावी था, लेकिन कोहली के आने के बाद स्थिति पलट गई। विकेट गिरते रहे, लेकिन कोहली रुके नहीं। उन्होंने 141 रनों की यादगार पारी खेली। लेखकः साहिल जैन अनुवादकः देवान्श अवस्थी

Edited by Staff Editor

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