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भारतीय क्रिकेट के 4 दिल तोड़ने वाले पल जो सौरव गांगुली की कप्तानी में आये

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16   //    13 Aug 2018, 13:33 IST

20वीं सदी के अंत में, भारतीय क्रिकेट मुश्किलों से गुज़र रहा था। मैच फिक्सिंग प्रकरण ने पूरी क्रिकेट की दुनिया को हिलाकर रख दिया था और भारतीय क्रिकेट भी प्रभावित हुआ था। मोहम्मद अजहरुद्दीन और अजय जडेजा को टीम से हटा दिया गया और सौरव गांगुली को कप्तान बनाया गया।

गांगुली की कप्तानी में भारत एक ऐसी टीम बन गई जो विदेशों में लड़ सके। 2000 से 2005 के बीच भारत ने वेस्टइंडीज (पोर्ट ऑफ स्पेन , 2002) में एक टेस्ट जीता, 2002 में इंग्लैंड के साथ सीरीज बराबरी की (1- 1) और 2004 में पाकिस्तान में टेस्ट और एकिदवसीय श्रृंखला दोनों जीती।

लेकिन, गांगुली की राह इतनी आसान नही थीं और उनकी कप्तानी में कई ऐसे पल आये जो यादगार नहीं रहे।

आइये एक नज़र डालते हैं सौरव गांगुली की कप्तानी में भारत के ऐसे ही 4 दिल तोड़ने वाले पलों पर:

 

# 4 आईसीसी क्रिकेट विश्व कप, फाइनल, 2003



भारतीय टीम का 2003 विश्वकप का अभियान डच टीम के खिलाफ कड़ी मेहनत करने के बाद मिली जीत से हुआ। इसके बाद 125 रनों से ऑस्ट्रेलिया के हाथों एक बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। विश्व चैंपियंस के खिलाफ इस हार ने गांगुली की टीम को झकझोरा और इसके बाद लगातार 9 मैच जीत कर फाइनल में जगह बनाने में सफल रहे।

फाइनल में गांगुली ने टॉस जीता और वह एकमात्र चीज रही जिसे उस दिन भारत ने जीता। ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू हेडन और एडम गिलक्रिस्ट ने पहले 15 ओवरों में ही अपनी आक्रामक बल्लेबाज़ी से अपने इरादे स्पष्ट कर दिये। लेकिन वह रिकी पोंटिंग थे जिन्होंने एक पारी ऐसी पारी खेली जिसने टीम इंडिया से मैच छीन लिया। 140 रनों की शानदार पारी में, पोंटिंग ने मार्टिन (88) के साथ गेंद को मैदान के हर कोने में पहुँचाया और ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवर में 359 रन बना डाले।

लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की जीत की पहले ओवर में खत्म हो गयी जब सचिन तेंदुलकर ग्लेन मैकग्रा की गेंद पर टॉप एज थमा बैठे। सहवाग ने 81 रनों के साथ कुछ देर संघर्ष करते रहे, लेकिन मैक्ग्रा, ब्रेट ली और बिकल की जोड़ी के खिलाफ जीत भारत के लिए दूर ही थी। आखिरकार भारत 234 रनों पर सिमट गया और 125 रन से मैच हार गया।

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