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कप्तान के तौर पर धोनी के 5 बड़े फैसले

SENIOR ANALYST
Modified 06 Jan 2017
भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी वनडे और टी-20 की कप्तानी छोड़ दी है। धोनी के अचानक लिए गए इस फैसले से सभी हैरान हैं। हमेशा से ही कैप्टन कूल लोगों के फेवरिट खिलाड़ी रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पर्दापण करने के साथ ही अपने खेल से उन्होंने सबको दीवाना बना लिया। 2007 में जब धोनी को भारतीय टीम की कमान सौंपी गई थी तब कई लोगों को शक था कि क्या धोनी कप्तानी का बोझ उठा पाएंगे ? लेकिन धोनी ने लोगों की उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया और उसी साल दक्षिण अफ्रीका में हुए पहले टी-20 वर्ल्ड कप में भारत को चैंपियन बनाया। इसके अलावा धोनी ने भारत को और कई अहम सीरीज और टूर्नामेंट में जीत दिलाई। 2013 में अपनी कप्तानी में उन्होंने भारत को चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब दिलाया। अपने फैसलों की वजह से धोनी ने सबका दिल जीत लिया। वहीं बल्लेबाजी में निचले क्रम में आकर शानदार बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम को कई नाजुक मौकों से निकालकर जीत दिलाया। उनकी तकनीक और कप्तान के तौर पर लिए गए फैसले ने हमेशा सबको हैरान किया है। धोनी लीक से हटकर फैसले लेते थे और हर बार बाजी मार ले जाते थे। आइए आपको बताते हैं कप्तान के तौर पर धोनी के 5 बड़े फैसलों के बारे में जिससे फैंस हैरान तो हुए लेकिन उस फैसले से भारतीय टीम को काफी फायदा हुआ। 5. 2007 टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल मैच में आखिरी ओवर जोगिंदर शर्मा से करवाना JOHANNESBURG, SOUTH AFRICA - SEPTEMBER 24:  The Indian Team celebrate their win with Misbah-ul-Haq looking on after the Twenty20 Championship Final match between Pakistan and India at The Wanderers Stadium on September 24, 2007 in Johannesburg, South Africa.  (Photo by Hamish Blair/Getty Images)   महेंद्र सिंह धोनी का कप्तान के तौर पर ये पहला बड़ा फैसला था। इस फैसले से भारतीय क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया। धोनी 2007 में ही भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान बने थे और 2007 में ही दक्षिण अफ्रीका में पहला टी-20 वर्ल्ड कप खेला गया। धोनी के सामने युवा टीम के साथ अच्छा प्रदर्शन करने की बड़ी जिम्मेदारी थी। इससे पहले इसी साल हुए 50 ओवरों के वर्ल्ड कप में भारतीय टीम पहले ही दौर में हार कर बाहर हो चुकी थी। ऐसे में धोनी के सामने चुनौतियां काफी ज्यादा थीं। लेकिन धोनी ने  टी-20 विश्व कप में जबरदस्त कप्तानी की और भारतीय टीम को फाइनल तक पहुंचा दिया। फाइनल मैच में भारत का मुकाबला चिर प्रतिद्वंदी टीम पाकिस्तान से था। वर्ल्ड कप का फाइनल और वो भी पाकिस्तान के खिलाफ, रोमांच अपने चरम पर था। जैसा कि उम्मीद थी दो चिर प्रतिद्वंदियों के बीच फाइनल मैच आखिरी ओवर तक चला। पाकिस्तानी टीम को आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रन चाहिए थे और विकेट मात्र एक बचा था। मिस्बाह-उल हक क्रीज पर और वो काफी अच्छे टच में दिख रहे थे, ऐसे में धोनी के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि 13 रन बचाने के लिए वो आखिरी ओवर किसे दें। अनुभवी स्पिनर हरभजन सिंह का एक ओवर बचा हुआ था। सब यही उम्मीद कर रहे थे कि धोनी गेंद हरभजन को थमाएंगे लेकिन धोनी के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। सभी को चौंकाते हुए उस नाजुक मौके पर धोनी ने गेंद मीडियम पेसर जोगिंदर शर्मा को सौंप दी। धोनी के इस फैसले से सभी हैरान रह गए, क्योंकि जोगिंदर शर्मा नियमित गेंदबाज नहीं थे और ना ही इतनी तेजी से गेंद करते थे कि बल्लेबाजों को परेशान कर सकें। लेकिन हरभजन सिंह महंगे साबित हो रहे थे और वो मिस्बाह स्पिनरों को काफी अच्छे से खिला रहे थे। इसीलिए शायद धोनी ने जोगिंदर से गेंदबाजी कराने का फैसला किया। जोगिंदर शर्मा ने पहली गेंद वाइड कर दी शायद ये दबाव का नतीजा था अब पाकिस्तान को 6 गेंदों पर 12 रन चाहिए थे। अगली गेंद पर मिस्बाह बीट हो गए लेकिन दूसरी गेंद पर उन्होंने शानदार छक्का जड़ दिया। अब पाकिस्तान को जीत के लिए 4 गेंदों पर महज 6 रन चाहिए थे। भारतीय फैंस की धड़कनें तेज हो गईं। सबको लगा कि मैच हाथ से गया, लेकिन ओवर की तीसरी गेंद को स्कूप करने के चक्कर में मिस्बाह गेंद को हवा में खेल बैठे और फाइन लेग में खड़े श्रीसंथ ने कैच पकड़कर पूरे भारत को जश्न मनाने का मौका दे दिया। बाद में जोगिंदर शर्मा ने बताया कि धोनी ने कहा था कि अगर भारत मैच हारा तो इसकी जिम्मेदारी मेरी होगी। ऐसे कप्तान को कौन नहीं पसंद करेगा ?
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Published 06 Jan 2017
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