विश्व के 5 सर्वश्रेष्ठ चाइनामैन गेंदबाज

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श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के बीच हाल ही में संपन्न हुई टेस्ट सीरीज में बाएं हाथ के स्पिनर जिसे "चाइनामैन" भी कहते हैं, का उदय हुआ। 25 वर्षीय लक्षण संदाकन दुर्लभ चाइनामैन गेंदबाजों की फेहरिस्त में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई है। इस सूची में भारत का कोई खिलाड़ी शामिल नहीं है। हालांकि आईपीएल के माध्यम से कुलदीप यादव और शिविल कौशिक की पहचान हुई, लेकिन इन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना नाम बनाने की जरुरत है। इस कलात्मक गेंदबाजी की शुरुआत वेस्टइंडीज के एलिस अचोंग ने 1930 में की। एलिस ने वेस्टइंडीज के लिए 8 टेस्ट मैच खेले। टेस्ट खेलने वाले चीनी मूल के पहले क्रिकेटर अचोंग बाएं हाथ के स्पिनर थे। इंग्लैंड के खिलाफ मेनचेस्टर में 1933 में वाल्टर रॉबिन्स को उन्होंने ऐसी गेंद की जिसने सभी को चकित कर दिया। एलिस ने कलाई के बल पर गेंद फेंकी जो दाएं हाथ के बल्लेबाज के ऑफ स्टंप पर पड़कर बाहर चली गई। रॉबिन्स ने आश्चर्यजनक गेंद करने के बाद पवेलियन लौटते समय अंपायर से कहा, 'ब्लडी चाइनामैन ने शानदार गेंदबाजी की।' यही से चाइनामैन शब्द लोकप्रिय हुआ और फिर आगे चलकर इन्हें चाइनामैन कहा जाने लगा। आज हम विश्व के कुछ ऐसे ही शानदार चाइनामैन गेंदबाजों के बारे में जानने जा रहे हैं : #5) सर गारफील्ड सोबर्स sobers-1471283523-800 महान गैरी सोबर्स क्रिकेट के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में शामिल हैं। अच्छी बल्लेबाजी और बेहतरीन फील्डिंग के साथ ही उनकी गेंदबाजी भी अव्वल दर्जे की थी। उन्होंने वेस्टइंडीज टीम को एक मुकाम दिलाया और अपने टेस्ट करियर में 235 विकेट लिए। सोबर्स बाएं हाथ से धीमी गेंद करते थे और उनका स्तर भी चाइनामैन गेंदबाज का बन चुका था। वह कलाई के बल पर गूगली और चाइनामैन गेंदबाजी का सफल उपयोग करते थे। उन्होंने भारत के दौरे पर इसका काफी सफल प्रयोग भी किया। अचोंग और सोबर्स के अलावा वेस्टइंडीज की टीम में डेव मोहम्मद नाम का एक और चाइनामैन गेंदबाज था, जिन्होंने 2000 में कम समय के लिए राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। #4) जॉनी वार्ड्ले wardle-1471283617-800 क्रिकेट के इतिहास में इस इंग्लिश गेंदबाज को सबसे कौशलपूर्ण स्पिनर माना जाता था, लेकिन उन्हें भाग्य का ज्यादा साथ नहीं मिला क्योंकि एक और बाएं हाथ के स्पिनर टोनी लॉक को हमेशा उनपर तरजीह दी जाती थी। वार्ड्ले ने सिर्फ 25 टेस्ट खेले। जहां वार्ड्ले पारंपरिक बाएं हाथ की गेंदबाजी लॉक के समान भी कर लेते थे तो उनके पास चाइनामैन एक हथियार के रूप में मौजूद था। वह विशेषकर इसका प्रयोग इंग्लैंड में करते थे। उन्होंने अपनी काउंटी टीम यॉर्कशायर के लिए इस स्टाइल का बहुत प्रयोग किया। वार्ड्ले ने 1956-57 दक्षिण अफ्रीका दौरे में चाइनामैन का भरपूर उपयोग किया। उन्होंने 4 टेस्ट में 13।81 की औसत से 26 विकेट चटकाए थे और जबकि पूरे दौरे में कुल 90 विकेट लिए थे। वार्ड्ले इंग्लैंड के अब तक में एकमात्र चाइनामैन गेंदबाज रहे हैं। उन्होंने कुल 102 टेस्ट विकेट लिए। #3) पॉल एडम्स paul-adams-1471283682-800 इनके गेंदबाजी एक्शन को किसी परिचय की जरुरत नहीं है। हर क्रिकेट प्रशंसक एक बार पॉल एडम्स के एक्शन की नकल करने की कोशिश जरुर करता है। बहरहाल, पॉल ने 1995-96 में अपने एक्शन से सभी को चकित कर दिया। एडम्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने पहले वर्ष का भरपूर आनंद उठाया क्योंकि उनका एक्शन बल्लेबाज आसानी से समझ नहीं पाटा था। हालांकि चाइनामैन गेंदबाज का जलवा थोड़े ही समय में कम होता दिखा क्योंकि एडम्स चोटों से परेशान रहने लगे। इसके बाद निकी बॉय की वजह से भी प्रोटीज टीम में चाइनामैन गेंदबाज को मौका नहीं मिला। पॉल एडम्स ने अपना आखिरी टेस्ट 2014 में खेला। उन्होंने 45 टेस्ट में 134 जबकि 24 वन-डे में 29 विकेट लिए। बहुत लोगों को भरोसा नहीं था कि शीर्ष स्तर के क्रिकेट में दोबारा कभी एडम्स जैसा एक्शन देखने को मिलेगा। मगर आईपीएल में गुजरात लायंस के युवा चाइनामैन शिविल कौशिक ने इसे गलत साबित कर दिया। कौशिक और एडम्स का एक्शन बहुत समान नजर आता है। #2) चक फ्लीटवुड-स्मिथ fleetwood-smith-1471283792-800 क्रिकेट गेंद से शानदार टर्न हासिल करने वाले चक फ्लीटवुड-स्मिथ ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 1935-38 के बीच 10 टेस्ट में 42 विकेट लिए। फ्लीटवुड-स्मिथ का एक्शन कपटी था और स्कूल में अपना दायां हाथ चोटिल करने के बाद उन्होंने दूसरे हाथ से अपना अनोखा गेंदबाजी एक्शन शुरू किया। बाएं हाथ के स्पिनर ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 597 विकेट लिए और कई लोग मानते हैं कि उन्हें राष्ट्रीय टीम में ज्यादा मौके मिल सकते थे, लेकिन बिल ओ रीली और क्लेरी ग्रिमेट की प्रतिस्पर्धा के चलते उन्हें मौके नहीं मिले। हालांकि फ्लीटवुड-स्मिथ ने 1937 की एशेज सीरीज में बड़ी भूमिका अदा की थी। उन्होंने डॉन ब्रैडमैन की टीम को सीरीज में 0-2 से पिछड़ने के बाद 3-2 से जीत दिलाई थी। #1) ब्रैड हॉग hogg1-1471283902-800 विश्व क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल चाइनामैन गेंदबाजों में से एक ब्रैड हॉग ऑस्ट्रेलिया की 2003 और 2007 विश्व कप विजेता टीम के महत्वपूर्ण सदस्य थे। हॉग की गेंदबाजी को समझना बल्लेबाज के लिए काफी मुश्किलभरा होता है और 45 वर्ष के होने के बावजूद भी वह अपना कमाल कई टी20 प्रतियोगिताओं में दिखा रहे हैं। अपने शुरुआती करियर में मध्यक्रम के बल्लेबाज हॉग ने पहली बार स्पिन अपने वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया टीम के साथियों के साथ की थी। तब उन्होंने न्यू साउथ वेल्स के स्पिनर डेविड फ्रीडमैन से निपटने के लिए टीम के साथियों को अभ्यास कराया था। ऑस्ट्रेलिया के लिए डेब्यू करने के बाद हॉग हमेशा शेन वॉर्न की आड़ के चलते अपना दम खुलकर नहीं दिखा पाए। उनकी टीम में जगह भी मुश्किल रहती थी। हालांकि 2003 विश्व कप में वॉर्न डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए और हॉग को उनकी जगह मौका मिल गया। यहां से हॉग ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और शानदार प्रदर्शन करते रहे।