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एम एस धोनी और विराट कोहली की टेस्ट कप्तानी में ये हैं 5 बड़े अंतर  

Modified 25 Jan 2018, 11:45 IST
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भारत और दक्षिण अफ़्रीका के बीच जोहान्सबर्ग के वानडेरर्स मैदान में तीसरा टेस्ट मैच जारी है। विराट कोहली और उनकी टीम ये टेस्ट सीरीज़ पहले ही गंवा चुकी है और आख़िरी टेस्ट मैच में उनकी कोशिश होगी कि सीरीज़ में हार का फ़ासला थोड़ा कम हो। कोहली ने जिस तरह क्रिकेट के ज़रिए अपनी पहचान बनाई है और जैसा वो अनुभव रखते हैं, उस हिसाब से उन्हें अपनी टीम को ऊंचाइयों पर ले जाना होगा। उन्हें अपनी टीम को टेस्ट में और कामयाब बनाना होगा। कोहली को टेस्ट की कप्तानी मिले 3 साल बीत चुके हैं और वो हर तरह की क्रिकेट खेल चुके हैं और उनके फ़ैंस को उनसे काफ़ी उम्मीदें हैं। ऐसे में में ये सबसे सही वक़्त है कि कोहली और धोनी की कप्तानी के बीच के फ़र्क का पता लगाया जाए।

#5 खिलाड़ियों को ज़्यादा मौक़ा देना

  जब टीम इंडिया के पूर्व टेस्ट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया को लीड कर रहे थे तो अपने खिलाड़ियों को उनकी क्षमता के हिसाब से भरपूर मौक़ा देते थे। इसकी सबसे बड़ी मिसाल विराट कोहली और रोहित शर्मा हैं। कोहली और रोहित दोनों का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर अलग-अलग हालात में शुरू हुआ है, लेकिन अब दोनों खिलाड़ियों ने विश्व क्रिकेट में अपनी पहचान बना ली है। विराट और रोहित को अगर धोनी ज़्यादा मौक़ा नहीं देते तो शायद टीम इंडिया को ये दो बेहतरीन खिलाड़ी नहीं मिल पाते। विराट क्रिकेट के हर फ़ॉर्मेट के बेहतरीन खिलाड़ी बन चुके हैं, वहीं रोहित सीमित ओवर के खेल के विस्फोटक बल्लेबाज़ बन गए हैं। अगर कप्तान के तौर पर कोहली की बात करें तो उन्होंने धोनी से विपरीत तरीका अपना लिया है। जिस भी खिलाड़ी का फ़ॉर्म अच्छा नहीं रहता उन्हें विराट कोहली प्लेइंग इलेवन से निकाल देते हैं। अजिंक्य रहाणे को ड्रॉप किया जाना इस बात को साबित करता है वो किसी भी खिलाड़ी को ज़्यादा मौक़ा देना पसंद नहीं करते जब खिलाड़ी का प्रदर्शन बुरा रहता है। कोहली को अपने इस तरीके में थोड़ी ढील देने की ज़रूरत है।

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Published 25 Jan 2018, 11:45 IST
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