वनडे क्रिकेट इतिहास में वेस्टइंडीज़ की 5 सबसे शर्मनाक हार

पहले दो विश्व कप टूर्नामेंट की विजेता टीम वेस्टइंडीज़ किसी समय दुनिया की सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट टीम थी। लगभग दो दशकों तक वेस्टइंडीज़ विश्व क्रिकेट में सबसे प्रभावशाली टीम बनी रही। हालांकि, पिछले डेढ़ दशक में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके प्रदर्शन में लगातार गिरावट आई है। इसके बावजूद, वेस्टइंडीज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण क्रिकेट टीमों में से एक है, खासकर वनडे क्रिकेट में। किसी भी अन्य क्रिकेट टीम की तरह, उन्हें वनडे क्रिकेट में कई मैचों में हार का सामना करना पड़ा है। वेस्टइंडीज के क्रिकेट इतिहास पर यदि हम एक नज़र डालें तो कई मैचों में उनकी पराजय बहुत ही नाटकीय ढंग से हुई हैं, जिनके बारे में जानना क्रिकेट प्रशंसक के लिए बहुत दिलचस्प होगा। तो, आइये वेस्टइंडीज के वनडे इतिहास में 5 ऐसे मैचों पर नज़र डालें जिनमें विडीज़ की बहुत ही शर्मनाक हार हुई है।

1993 में कोलकाता में हीरो कप फाइनल में भारत से 123 रनों की हार

1990 के दशक में, वेस्टइंडीज़ दुनिया की बेहतरीन टीमों में से एक थी। 1993 में कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर जब मेहमान टीम गेंदबाज़ी करने उतरी तो वो ख़िताबी जीत के प्रबल दावेदार थे। कर्टली एम्ब्रोस के गेंदबाज़ी नेतृत्व में, वेस्टइंडीज के तेज़ गेंदबाज़ों ने शुरुआत से ही भारतीय बल्लेबाज़ों पर अंकुश लगाकर रखा। मध्य क्रम के बल्लेबाज़ विनोद कांबली के 68 रनों की बदौलत भारत ने निर्धारित पचास ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 225 रन बनाए। यह लक्ष्य वेस्टइंडीज के लिए निश्चित रूप से मामूली लग रहा था और भले ही फिल सिमन्स जल्दी आउट हो गए लेकिन ब्रायन लारा और कप्तान रिची रिचर्डसन ने शानदार सांझेदारी की। लेकिन जैसे ही सचिन तेंदुलकर ने लारा को आउट किया, पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गयी। अनिल कुंबले ने वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी लाइन-अप को पूरी तरह से तहस नहस कर दिया। उस मैच में कुंबले ने 6.1 ओवरों में 12 रन देकर 6 विकेट लिए और वेस्टइंडीज 102 रन के मामूली स्कोर पर ढेर हो गयी। इस मैच में विंडीज़ की 123 रनों से शर्मनाक हार हुई थी।

2004 में केपटाउन में दक्षिण अफ्रीका से 209 रनों की हार

इस मैच में वेस्टइंडीज की 209 रनों से बहुत ही शर्मनाक हार हुई थी। 2004 में दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में खेले गए इस मैच में टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करने के लिए उतरी दक्षिण अफ्रीकी टीम ने महान ऑलराउंडर जैक्स कैलिस के नाबाद 109 रनों की बदौलत निर्धारित 50 ओवरों में 4 विकेट के नुक्सान पर 263 रन बनाये थे। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि वेस्टइंडीज के पास ब्रायन लारा, चंदरपॉल, क्रिस गेल और रामनरेश सरवन जैसे बल्लेबाज़ हैं , उनकी टीम जीत की प्रबल दावेदार थी। हालांकि, दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाज़ी तिकड़ी (शॉन पोलॉक, आंद्रे नेल और मखाया एनटिनी) के नेतृत्व में दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाजों ने मेहमान टीम की बल्लेबाज़ी लाइन-अप को पूरी तरह से तहस नहस कर दिया। मैच के पांचवें ओवर में पहले क्रिस गेल (10) का विकेट गिरा और उसके बाद लगातार विकेटों के गिरने का सिलसिला चलता रहा और अंततः मेहमान टीम 23.2 ओवरों में 54 रन पर आल-आउट हो गयी। वेस्टइंडीज के इतिहास में यह उनकी सबसे शर्मनाक हार थी।

1984 में मेलबर्न में त्रिकोणीय श्रृंखला में पाकिस्तान से 97 रनों की हार

मेलबर्न में 1984 में त्रिकोणीय श्रृंखला के तीसरे मैच में, पाकिस्तान ने वेस्टइंडीज के गेंदबाजी आक्रमण जिसमें महान गेंदबाज़ माइकल होल्डिंग, जोएल गार्नर और मैल्कम मार्शल शामिल थे, के सामने पहले बल्लेबाजी की। लेकिन विंडीज़ तेज़ गेंदबाज़ों ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए पाकि के 4 विकेट सिर्फ 87 रनों पर गिरा दिए लेकिन मध्य-क्रम के बल्लेबाज़ कासिम उमर के 78 गेंदों में शानदार 69 रनों की बदौलत पाकि ने निर्धारित 50 ओवरों में 8 विकेटों के नुक्सान पर 208 रन बनाए। यह एक मामूली स्कोर था और इसमें किसी को कोई संदेह नहीं था कि यह मैच वेस्टइंडीज़ ही जीतेगी क्यूंकि उनकी बल्लेबाजी लाइन-अप काफी मजबूत थी। सरफराज नवाज, रशीद खान और बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अज़ीम हफीज के गेंदबाज़ी नेतृत्व में पाकिस्तान ने डेसमंड हेनेस, विव रिचर्ड्स और क्लाइव लॉयड को मैच की शुरुआत में ही पवेलियन वापिस भेज दिया। वेस्ट इंडीज के शीर्ष क्रम का यह हाल था कि केवल 10 रनों के भीतर ही उनके 4 बल्लेबाज़ आउट हो गए। इसके बाद 42 वें ओवर में पूरी वेस्ट इंडीज़ टीम 111 रनों पर ढेर हो गयी और यह मैच सबसे नाटकीय तरीके से जीत की प्रबल दावेदार टीम की हार के साथ ख़त्म हो गया।

लॉर्ड्स में खेले गए 1983 के विश्वकप फाइनल में भारत से 43 रनों की हार

1983 में विश्वकप के फाइनल में भारत के हाथों 43 रनों की शर्मनाक हार वेस्ट इंडीज़ के क्रिकेट इतिहास में विश्व कप में उनकी सबसे शर्मनाक थी। उस समय लगातार दो विश्व कप जीतने वाली यह टीम दुनिया की सबसे मजबूत टीम थी। लॉर्ड्स में हुए 1983 विश्व कप के फाइनल में वे लगातार तीसरी बार ख़िताब जीतने के प्रबल दावेदार थे। भारतीय टीम ने उस विश्व कप में कई उतार- चढ़ाव देखे थे और पहली बार फाइनल में पहुंची थी। और जैसे की उम्मीद थी विंडीज़ गेंदबाज़ों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी भारतीय टीम को निर्धारित 50 ओवरों में सिर्फ 183 रन ही बनाने दिए। हालाँकि भारतीय टीम ने वापसी की कोशिश की लेकिन एंडी रॉबर्ट्स, जोएल गार्नर, माइकल होल्डिंग और मैल्कम मार्शल के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ी आक्रमण के सामने 200 रन भी ना बना पाई। हालांकि, इस पिच पर घास थी जिसका भारतीय गेंदबाज़ों ने भरपूर लाभ उठाया। भारत ने विंडीज़ के सलामी बल्लेबाज़ गॉर्डन ग्रीनिज को शुरुआत में ही चलता किया लेकिन उसके बाद विव रिचर्ड्स भारत के लिए मुसीबत बन गए। उनको कपिल देव ने एक शानदार कैच पकड़ कर पवेलियन वापिस भेजा। उन्होंने 33 रन बनाए जिसमें 7 चौके शामिल थे। इसके बाद भारतीय गेंदबाज़ों ने मैच पर पूरी पकड़ बना ली। एक समय में जहां विंडीज़ का स्कोर 2 विकटों के नुक्सान पर 57 रन था और वे जीतते हुए दिखाई दे रहे थे, उनकी पूरी टीम 140 के स्कोर पर आल आउट हो गयी और वे लगातार तीसरा विश्व कप जीतने में नाकाम रहे।

1996 के विश्व कप में केन्या से 73 रनों से हार

वेस्टइंडीज को 1996 के विश्व कप में अपने से कमज़ोर टीम केन्या के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी केन्याई टीम को कर्टली एम्ब्रोस, कोर्टनी वॉल्श, इयान बिशप और कैमरन कफी ने सिर्फ 166 रनों पर ढेर कर दिया। उसके बाद बल्लेबाज़ी करने उतरी वेस्टइंडीज के लिए यह लक्ष्य बहुत मामूली था। लेकिन सलामी बल्लेबाज शेरविन कैंपबेल के जल्दी आउट होने के बाद कप्तान रिची रिचर्डसन भी आउट हो गए। केन्या की शानदार गेंदबाज़ी के सामने उनके 4 विकेट सिर्फ 35 रनों पर ही गिर गए। ब्रायन लारा की गैरमौजूदगी में वेस्टइंडीज के लिए यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होता गया। मार्टिन सुजी और रजब अली ने शानदार गेंदबाज़ी की और विंडीज़ को केवल 93 रनों पर ढेर कर दिया। लेखक: एस समद्दर अनुवादक: आशीष कुमार

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