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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए 5 यादगार एकदिवसीय मुकाबले

ऋषि
ANALYST
Modified 16 Sep 2017
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भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें क्रिकेट के मैदान पर एक-दूसरे की काफी कट्टर प्रतिद्वंद्वी हैं। जब भी दोनों टीमें आमने-सामने होती है दर्शकों को मैदान पर काफी धूम-धड़ाका देखने को मिलता है। पिछले कुछ समय से दोनों टीमों के बीच की प्रतिद्वंदिता किसी भी अन्य टीमों के मुकाबले काफी आगे निकल गयी है, चाहते वो खेल का कोई भी प्रारूप हो। दोनों टीमों के बीच होने वाले मुकाबले क्रिकेट जगह के सबसे बड़े मुकाबले के रूप में देखे जाते हैं। कुछ ही दिनों बाद दोनों टीमों के बीच 5 एकदिवसीय मैचों की सीरीज शुरू होने वाली है। अगर आमने-सामने के मुकाबलों की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा ही भारी रहा है लेकिन फिर भी दोनों टीमों के बीच कई ऐसे मुकाबले भी हुए हैं जिसने रोचकता की सारी हदें पार कर दी हैं। आज हम उन्हीं 5 यादगार मैचों की बात करेंगे जो आज भी खेल प्रशंसकों के दिलों में जिंदा है: #छठा मैच कोका-कोला कप, शारजाह (1998)

यह मैच उन मैचों में गिना जाता है जहाँ हार के बाद भी भारतीय प्रशंसकों को अपने टीम पर गर्व होता है। यह उस प्रतियोगिता के सबसे महत्वपूर्ण मैच था क्योंकि इस मैच के बाद फाइनल में पहुँचने वाली दूसरी टीम का नाम पक्का होने वाला था। जहाँ ऑस्ट्रेलिया पहले ही फाइनल में पहुँच चूका था इसलिए भारत के लिए यह काफी महत्वपूर्ण मैच था। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने माईकल बेवन के 101 नाबाद और मार्क वॉ के 81 रनों की पारी की बदौलत 50 ओवेरों में 284 रन बनाएं। नेट रन-रेट आधार पर भारतीय टीम को फाइनल में स्थान पक्का करने लिए 254 रन बनाने की जरूरत थी। उस समय के अनुसार यह आसान काम नहीं था और पूरी टीम सचिन तेंदुलकर के तरफ देख रही थी। वह धीरे-धीरे टीम को जीत की तरफ ले जा रहे थे तभी रेत की भारी आंधी की वजह से मैच को रोकना पड़ा। उस समय भारत का स्कोर 31 ओवर में 143/4 था। जब मैच दूबारा शुरू हुआ तो भारत को जीत के लिए 46 ओवर में 276 रन बनाने का लक्ष्य मिला और फाइनल में पहुँचने के लिए 237 रनों की जरूरत थी। जब भारत की बल्लेबाजी दूबारा शुरू हुई तो सचिन ने तेजी से रन बनाने का फैसला किया और उसके बाद जो हुआ वह इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। सचिन ने ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों को आड़े हाथों लिया और भारत ने अगले 11 ओवर में ही लगभग 100 रन बना दिए। इसके साथ ही भारत ने फाइनल में अपना स्थान पक्का किया। 43वें ओवर में आउट होने से पहले सचिन ने 131 गेंदों में 143 रन बनाएं। अंत में भारत उस मैच को नहीं जीत पाया लेकिन सचिन की वह पारी आज भी क्रिकेट की सबसे अच्छी पारियों में गिनी जाती है और आज उस पारी को सभी ‘रेत की आंधी’ के रूप में याद करते हैं।
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Published 16 Sep 2017, 17:15 IST
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