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भारतीय टेस्ट क्रिकेट इतिहास के पांच शानदार पल

Modified 28 Sep 2016, 21:56 IST
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भारत के 500वें टेस्ट के साथ ही, इस सफर के आगाज से लेकर अब तक की यात्रा को याद करना इतिहास दोबारा जिंदा करने जैसा है। 1932 में इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू करने से लेकर, भारतीय क्रिकेट को बुलंदियों तक पहुंचने में कई बार कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 82 वर्षों के दौरान, 32 खिलाड़ियों को अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला, जिसमें भारत ने 129 मैच जीते जबकि 157 मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा। अलग-अलग पीढ़ियों ने कई ऐसे यादगार पल दिए हैं जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता। इस भाग में, हम भारत के टेस्ट इतिहास के यादगार लम्हों पर नजर डालेंगे। हालांकि ऐसे बहुत सारे ऐसे वाक्ये हुए जो भारतीय क्रिकेट को महान बनाते हैं लेकिन ये पांच उनमें शीर्ष पर हैं: #5 1952, जहां से इस सफर का आगाज़ हुआ (मद्रास) 1-1474403499-800 20 वर्ष में 24 टेस्ट खेलने के बाद, भारतीय टीम ने जीत का मुंह नहीं देखा। एक ऐसे देश के लिए जिस पर ब्रिटिश ने शासन किया, उसको अपना अस्तित्व स्थापित करने के लिए, इंग्लैंड के खिलाफ जीत दर्ज कराने के लिए एक लम्बा सफर तय करना था। इंग्लिश टीम के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज में मेजबान के पास इतिहास रचने का अवसर था। इस सीरीज में भारतीय टीम में कई बड़े नाम शामिल थे। दिल्ली में हुए मुकाबले में भारत जीत के करीब पहुंचने के बावजूद, मैच का परिणाम जीत में तबदील नहीं हो पाया। सीरीज का आखिरी मैच मड्रास में खेला गया, विजय हजारे की टीम 0-1 से पिछड़ी हुई थी। हालांकि, लेफ्ट आर्म स्पिनर वीनू मांकड़ में मेहमान टीम के खिलाफ अपनी गेंदबाजी का खूब जलवा दिखाया। जिसके बाद पंकज रॉय और पोली उमरीगर के शतक ने टीम को बड़े अंतराल और एक पारी से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई और भावी पीढ़ी के लिए एक उदाहरण पेश किया।
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Published 28 Sep 2016, 21:56 IST
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