Create
Notifications

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आशीष नेहरा के 5 बेहतरीन प्रदर्शन

देवांश अवस्थी
visit

आशीष नेहरा, भारतीय टीम का एक ऐसा गेंदबाज, जिसके अंदर एक संपूर्ण लेफ्ट आर्म तेज गेंदबाज की सारी खूबियां हैं। नेहरा ने 1999 में श्रीलंका में अंतरराष्ट्रीय टेस्ट करियर की और 2001 में जिम्बाब्वे में वनडे करियर की शुरूआत की। अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरूआत के साथ ही, नेहरा को नई गेंद से कमाल दिखाने वाले दुनिया के बेहतरीन तेज गेंदबाजों में गिना जाने लगा, लेकिन फिटनेस की वजह से नेहरा अपने प्रदर्शन को उसी स्तर पर जारी नहीं रख सके। एक गेंदबाज, जो 12 सर्जरी से गुजर चुका हो, उसके लिए खेल में वापसी करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि, नेहरा इस चुनौती को न सिर्फ केवल पार कर सके, बल्कि जरूरत के लगभग हर मौके पर वह टीम इंडिया के काम आए। 36 साल की उम्र में नेहरा ने टी-20 के लिए टीम इंडिया में जगह बनाकर सभी को चौंका दिया। इतना ही नहीं, उम्र के इस पड़ाव में नेहरा ने खुद को खेल के इस तेजतर्रार प्रारूप में भी कारगर साबित करके दिखाया और वह 2016 में वर्ल्ड टी-20 के सबसे बेहतरीन गेंदबाजों में शुमार हुए। हाल ही में, नेहरा ने एक बार फिर टी-20 टीम में वापसी की है, लेकिन वह आगामी 1 नवंबर को न्यूजीलैंड के खिलाफ दिल्ली में होने वाले टी-20 मैच के बाद संन्यास लेने की तैयारी में हैं। #5 जिम्बाब्वे के खिलाफ, 3/23 और 2/77 (बुलावायो - 2001) d619e-1507745796-800 2001 में भारत, दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए जिम्बाब्वे दौरे पर था और इसके बाद भारत को एक त्रिकोणीय श्रृंखला खेलनी थी। 15 साल से टीम इंडिया ने भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर कोई भी टेस्ट नहीं जीता था और उसके पास मौका था, इस सूखे को खत्म करने का। 22 वर्षीय नेहरा का यह पहला दौरा था और वह अपने करियर का दूसरा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने जा रहे थे। पहली पारी में नेहरा ने शानदार गेंदबाजी की और महज 23 रन देकर उन्होंने 3 विकेट झटके और जिम्बाब्वे पहली पारी में 173 रनों पर सिमट गया। उस सीरीज में नेहरा ने जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों को अपनी गति और स्विंग से खूब छकाया। पहली पारी में उनके अच्छे प्रदर्शन की बदौलत भारत 15 साल के सूखे को खत्म कर सका। #4 पाकिस्तान के खिलाफ, 2/33 (मोहाली – 2011 विश्व कप) 111148416-ashish-nehra-of-india-celebrates-after-gettyimages-1486052091-800 2009 के बाद से, जहीर खान की नियमित अनुपलब्धता में नेहरा ने वनडे टीम के गेंदबाजी की की कमान संभाली। उन्होंने 2011 विश्व कप टीम में भी अपनी जगह बनाई। हालांकि, वह सिर्फ तीन ही मैच खेल सके। साउथ अफ्रीका से हारने के बाद नेहरा को सभी जरूरी मैचों में जगह दी गई। पाकिस्तान के साथ सेमीफाइनल मैच में नेहरा ने भले ही शुरूआती विकेट न लिए हों, लेकिन उन्होंने 10 ओवर के स्पेल में सिर्फ 33 रन ही दिए और बाद में 2 विकेट भी झटके। पाकिस्तान इस अहम मैच में भारत को सिर्फ 260 रनों का ही लक्ष्य दे सका। # इंग्लैंड के खिलाफ, 3/28 (नागपुर - 2017) b5de7-1507745992-800 जनवरी, 2016 में नेहरा ने टीम इंडिया में वापसी की और टीम के भरोसेमंद गेंदबाज बने। 2016 में वह टीम के सबसे सफल टी-20 गेंदबाज बने, लेकिन इसके बाद चोटिल होने की वजह से वह खेल जारी नहीं रख सके। जनवरी, 2017 में उन्हें एक बार फिर इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए चुना गया। 145 रनों के लक्ष्य का बचाव करते हुए नेहरा ने इंग्लैंड के दोनों सलामी बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। इस मैच में 2 ओवरों के अपने पहले स्पेल में नेहरा ने 7 रन देकर, 2 विकेट चटकाए और इंग्लिश टीम पर खासा दबाव बनाया। 17वें ओवर में नेहरा अपना स्पेल पूरा करने आए और उस वक्त इंग्लैंड को आखिरी 4 ओवरों में 32 रनों की दरकार थी। उन्होंने सिर्फ 4 ही रन गंवाए और बेन स्टोक्स का महत्वपूर्ण विकेट भी लिया और भारत के लिए जीत का रास्ता साफ किया। #2 श्रीलंका के खिलाफ, 6/59 (कोलंबो - 2005) 99fb1-1507746083-800 इंडियन ऑयल कप के फाइनल में, भारत का सामना श्रीलंका से। श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। विकेट सपाट था और गेंदबाजों को बिल्कुल भी मदद नहीं मिल रही थी, लेकिन ऐसे विकेट पर भी नेहरा ने अपनी क्षमता साबित की और 6 विकेट लिए। इस स्पेल के साथ ही नेहरा पहले भारतीय गेंदबाज बने, जिन्होंने वनडे करियर में 2 बार 6 विकेटों का स्पेल किया। टूर्नामेंट के फाइनल मैच भारत की ओर से सिर्फ नेहरा ही विकेट ले पाए थे। श्रीलंका ने 9 विकेट खोकर 281 रन बनाए थे। बाकी सभी विकेट रन-आउट के तौर पर गिरे। भारत को फाइनल मुकाबले में हार जरूर मिली, लेकिन दोनों ही टीमों की गेंदबाजों पर गौर करें तो नेहरा का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ था। #1 इंग्लैंड के खिलाफ, 6/23 (डरबन– 2003 विश्व कप) nehra-durban-2003-england-1500192752-800 2003 विश्व कप के वक्त तक नेहरा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को बहुत अधिक समय नहीं दिया था। अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू किए हुए उन्हें सिर्फ 4 साल ही हुए थे और वनडे क्रिकेट में उन्होंने 2 साल का ही समय बिताया था। इतना ही नहीं, इतने कम वक्त में भी फिटनेस की वजह से वह ज्यादातर वक्त टीम से दूर ही रहे थे। भारत को सुपर-सिक्स में जगह बनाने के लिए लीग मैच में इंग्लैंड का सामना करना था। 250 रनों के लक्ष्य का बचाव करते हुए, जवागल श्रीनाथ और जहीर खान ने इंग्लैंड की शुरूआती पारी को डगमगाया और उन्हें सात ओवरों में 18/2 के पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया। इसके बाद कप्तान गांगुली ने 13वें ओवर में नेहरा को आजमाया और फिर नेहरा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। ओवर द विकेट गेंदबाजी करते हुए नेहरा ने औसत रूप से 140 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी की और बेहतरीन स्विंग गेंदबाजी की। नेहरा ने बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका ही नहीं दिया। एड़ी में चोट होने के बाद भी नेहरा ने पूरे 10 ओवरों का स्पेल किया और महज 23 रन देकर, 6 विकेट चटकाए। 6 में से पांच विकेट कीपर या स्लिप पर कैच की बदौलत लिए गए, जिससे साफ हुआ कि नेहरा ने कितनी सधी हुई गेंदबाजी की। नेहरा के इस बेजोड़ स्पेल की बदौलत भारत ने इंग्लैंड पर 82 रनों की शानदार जीत दर्ज की। लेखकः साहिल जैन अनुवादकः देवान्श अवस्थी

Edited by Staff Editor
Article image

Go to article
Fetching more content...
App download animated image Get the free App now