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2016 के टॉप 5 टी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैच

सावन गुप्ता
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2016 खत्म होने में बस कुछ ही दिन बचे हैं और दुनिया भर की टीमों ने इस साल कई टी-20 मैच खेले। इस साल भारत में छठा टी-20 विश्व कप भी खेला गया, जिसे वेस्टइंडीज की टीम ने जीता। कोलकाता में खेले गए फाइनल मैच में कैरिबियाई टीम ने इंग्लैंड को बेहद रोमांचक मुकाबले में मात दी। इसके साथ ही वेस्टइंडीज 2 टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली दुनिया की पहली क्रिकेट टीम बन गई। भारतीय टीम के टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने इस साल टी-20 मैचों में खूब रन बनाए। कोहली ने इस साल 106.83 के शानदार औसत से 13 पारियों में 641 रन बनाए। इस दौरान कोहली का स्ट्राइक रेट 140.26 रहा। उनकी शानदार बल्लेबाजी का अंदाजा हम इसी बात से लगा सकते हैं कि इस साल वो टी-20 मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। वहीं अगर सबसे ज्यादा विकेट की बात करें तो भारत के ही जसप्रीत बुमराह 21 मैचों में 28 विकेट लेकर टॉप पर हैं। बुमराह ने इस साल 18.82 की औसत से गेंदबाजी की और इस दौरान उनका इकोनॉमी रेट महज 6 रहा। 2016 में कुल 99 टी-20 मैच खेले गए। जिसमें 3629 ओवर डाले गए और 7.74 प्रति ओवर के हिसाब से 28113 रन बने। इन 99 मैचों में से कई मैच बेहद रोमांचक रहे। आइए नजर डालते हैं 2016 के इन्हीं 5 रोमांचक टी-20 मुकाबलों पर। 1.दक्षिण अफ्रीका बनाम इंग्लैंड, केपटाउन matchhh 2015 के अंत में इंग्लैंड की टीम ने दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया। 4 टेस्ट मैचों की सीरीज में इंग्लिश टीम ने प्रोटियाज को 1-2 से हरा दिया। वनडे सीरीज में भी पहले 2 मैचों में अफ्रीकी टीम की हालत पतली रही और वो सीरीज में 0-2 से पिछड़ गई, लेकिन बाकी के 3 मैचों में डिविलियर्स एंड कंपनी ने जोरदार वापसी करते हुए इंग्लिश टीम को हराकर 5 मैचों की सीरीज 3-2 से अपने नाम की। इसके बाद बारी थी फटाफट क्रिकेट यानी टी-20 सीरीज की। चुंकि 2016 का टी-20 वर्ल्ड कप शुरु होने में कुछ ही दिन बचे थे इसलिए दोनों ही टीमें टी-20 सीरीज की तैयारियों में जोर-शोर से जुट गईं। जैसा कि उम्मीद थी केपटाउन में दोनों ही टीमों के बीच खेला गया पहला टी-20 मैच बेहद रोमांचक रहा। टॉस जीतकर दक्षिण अफ्रीका की टीम ने पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लिया और प्रोटियाज गेंदबाजों ने अपने कप्तान के फैसले को सही साबित करते हुए इंग्लैंड की टीम को 20 ओवरों में महज 134 रन बनाने दिया। लेग स्पिनर इमरान ताहिर ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 ओवरों में 21 रन देकर 4 विकेट चटकाए। जोस बटलर ने 32 रनों की नाबाद पारी खेलकर इंग्लिश टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। जवाब में दक्षिण अफ्रीका के सलामी बल्लेबाजों ने टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई। क्रिस जोर्डन और बेन स्टोक्स ने पावरप्ले के आखिर के 2 ओवरों में एबी डिविलियर्स और हाशिम अमला को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा। इसके बाद फॉफ डू प्लेसी और जेपी डूमिनी को रन बनाने में काफी संघर्ष करना पड़ा। डूमिनी को रशीद ने आउट किया। डू प्लेसी, राइली रूसो, डेविड मिलर और डेविड विसे भी जल्दी-जल्दी आउट हो गए। आखिरी ओवर में प्रोटियाज को जीत के लिए 15 रन चाहिए थे। रीस टोपली ने इंग्लिश टीम की तरफ से गेंदबाजी की कमान संभाली और सामने थे दक्षिण अफ्रीकी ऑलराउंडर क्रिस मोरिस। मोरिस ने दूसरी और तीसरी गेंद पर चौका और छक्का लगाकर प्रोटियाज को मैच में ला दिया। अब आखिर के 3 गेंदों पर दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए 4 रन चाहिए। टोपली ने चौथी गेंद पर कोई रन नहीं दिया लेकिन 5वीं गेंद पर मोरिस ने 2 रन ले लिया। अब अफ्रीकी टीम को आखिरी गेंद पर जीत के लिए 2 रन चाहिए थे। रोमांच चरम पर पहुंच चुका था, सबकी सांसे मानों थम सी गई थी। आखिरी गेंद पर क्या होगा ये देखने के लिए सब एकदम चुप बैठे थे। रीस टोपली ने आखिरी गेंद डाली और मोरिस ने लॉन्ग ऑफ की तरफ गेंद को खेला। फील्डर ने गेंद को उठाकर तेजी से थ्रो गेंदबाज के छोर पर किया लेकिन गेंदबाज गेंद थ्रो को पकड़ने में नाकाम रहे, नतीजा ये हुआ कि मोरिस ने तेजी से 2 रन पूरा कर लिया और अफ्रीका की टीम को इस रोमांचक मुकाबले में जीत दिला दी। इस मैच में कुछ भी हो सकता था दक्षिण अफ्रीका की टीम भी हार सकती थी और मैच टाई भी हो सकता था। लेकिन ये रोमांचक मुकाबला अफ्रीकी टीम के नाम रहा। 2. साउथ अफ्रीका बनाम ऑस्ट्रेलिया, जोहानिसबर्ग AUSSSS जोहानिसर्ग के वांडरर्स मैदान पर जब भी ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका की टीमें आमने-सामने होती हैं, तब दिमाग में इन दोनों टीमों के बीच खेले गए उस ऐतिहासिक वनडे मैच की याद खुद-ब-खुद आ जाती है, जब 438 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए अफ्रीकी टीम ने जीत हासिल की थी। 3 मैचों की सीरीज में पहला टी-20 मैच हारने के बाद दूसरे मैच में ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ ने टॉस जीतकर दक्षिण अफ्रीका को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। अफ्रीकी टीम ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और 20 ओवरों में 7 विकेट खोकर 204 रन बना डाले। पहले क्विंटन डी कॉक ने प्रोटियाज को धमाकेदार शुरुआत दिलाई फिर फाफ डू प्लेसी ने 41 गेंदों पर 79 रनों की पारी खेली और अंत में डेविड मिलर ने 18 गेंदों पर 33 रन बनाकर टीम का स्कोर 200 रन बनाने में मदद की। बड़े स्कोर का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत खराब रही और सस्ते में एरोन फिंच का विकेट गया दिया। उनके साथ बल्लेबाजी करने उतरे शेन वाटसन अच्छी तरह से गेंद नहीं खेल पा रहे थे। कप्तान स्टीव स्मिथ भी सस्ते में निपट गए इसके बाद वाटसन भी 15 गेंदों पर 9 रन बनाकर चलते बने। पहले 6 ओवरों में ऑस्ट्रेलियाई टीम 32 रनों के स्कोर पर 3 विकेट खोकर मुश्किल में थी। लेकिन इसके बाद डेविड वॉर्नर और ग्लेन मैक्सवेल ने मोर्चा संभाला। इन दोनों ने अपना स्वभाविक खेल खेलते हुए ऑस्ट्रेलियाई टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकाला। दोनों ही बल्लेबाजों ने अर्धशतक जड़ा। मैक्सवेल 43 गेंदों पर 75 रन बनाकर खेल रहे थे, वहीं वार्नर भी 40 गेंदों पर 77 रन बनाकर खेल रहे थे। कंगारुओं को जीत के लिए 7 गेंदों पर 12 रनों की जरुरत थी और ऐसा लगा कि ये दोनों बल्लेबाज आसानी से इस स्कोर को बना लेंगे। लेकिन तभी मैच में नया ट्विस्ट आ गया। ग्लेन मैक्सवेल 75 रन के स्कोर पर एबी डिविलियर्स को कैच थमाकर चलते बने । इसके अगले ही ओवर की पहली ही गेंद पर कगिसो रबादा ने वार्नर को भी पवेलियन भेज दिया। अफ्रीकी टीम की उम्मीदें एक बार फिर से इस मैच में जग गईं। अब ऑस्ट्रेलियाई टीम को 5 गेंदों पर 12 रन चाहिए थे और क्रीज पर थे जेम्स फॉकनर और मिचेल मार्श। दोनों बल्लेबाजों ने किसी तरह पहली 4 गेंदों पर 10 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया को मैच में बनाए रखा। आखिरी गेंद पर जीत के लिए 2 रन चाहिए थे। स्ट्राइक पर थे मिचेल मार्श और गेंदबाजी कर रहे थे कगिसो रबादा। मैच का रोमांच अपने चरम पर पहुंच चुका था। बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों के ही चेहरे पर प्रेशर साफ नजर आ रहा था। लेकिन मिचेल मार्श ने इस प्रेशर को झेल लिया और आखिरी गेंद पर 2 रन लेकर ऑस्ट्रेलियाई टीम की विजयगाथा लिख दी। 3. इंग्लैंड बनाम वेस्टइंडीज, कोलकाता kolkata match टी-20 वर्ल्ड कप शुरु होने से पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि इंग्लैंड की टीम इस इवेंट के फाइनल तक पहुंचेगी। लेकिन सभी की धारणाओं को गलत साबित करते हुए इंग्लिश टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार खेल दिखाया और फाइनल तक पहुंची। फाइनल में इंग्लिश टीम का मुकाबला था वेस्टइंडीज की टीम से। दोनों में से अगर कोई भी टीम जीतती तो 2 टी-20 विश्व कप जीतने का इतिहास बनाती। पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड की टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और उसने पहले 5 ओवरों में 23 रन पर 3 विकेट गंवा दिए। इसके बाद जोए रुट और जोस बटलर ने चौथे विकेट के लिएअच्छी साझेदारी निभाई। दोनों ने स्पिनरों के अनुकूल पिच पर समझदारी से बल्लेबाजी की और 61 रनों की अहम पार्टनरशिप की। ब्रेथवेट ने बटलर को ब्रावों के हाथों कैच कराकर इस साझेदारी को तोड़ा। बटलर ने 36 रनों की अहम पारी खेली। कुछ ओवर के बाद जोए रुट, मोइन अली और बेन स्टोक्स भी 4 गेंदों के अंदर चलते बने और जल्द ही इंग्लैंड का स्कोर 14.1 ओवर में 7 विकेट पर 111 रन हो गया। आखिर के ओवरो में डेविड विले ने आक्रामक पारी खेलकर इंग्लिश टीम का स्कोर 20 ओवरों में 155 रन बनाया। 156 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज टीम की भी शुरुआत अच्छी नहीं रही। वेस्टइंडीज ने दूसरे ओवर में ही जॉनसन चार्ल्स और क्रिस गेल का विकेट गंवा दिया। दोनों ही खतरनाक बल्लेबाजों को जोए रुट ने आउट किया।इसके बाद विले ने लेंड्ल सिमेंड्स को जीरो पर आउट कर वेस्टइंडीज को तीसरा झटका दिया। कैरिबियाई टीम 11 रनों पर 3 विकेट गंवाकर संघर्ष कर रही थी। इसके बाद ड्वेन ब्रावो और मार्लोन सैमुअल्स ने 69 गेंदों पर 75 रनों की साझेदारी कर टीम को संकट से बाहर निकाला। आदिल रशीद ने ब्रावो को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा। ब्रावो ने 25 रन बनाए। इसके बाद आंद्रे रसेल और डैरेन सैमी भी सस्ते में आउट हो गए। अब वेस्टइंडीज की टीम को जीत के लिए 27 गेंदों पर 49 रनों की दरकार थी। इसी बीच मार्लोन सैमुअल्स ने अपना अर्धशतक भी पूरा किया। वो एक छोर से टीम को संभाले हुए थे। सैमुअल्स को युवा ऑलराउंडर क्रेग ब्रैथवेट का अच्छा साथ मिला। वेस्टइंडीज की टीम को इतिहास बनाने के लिए आखिरी ओवर में 19 रन की जरुरत थी। इंग्लैंड की तरफ से गेंदबाजी करने आए बेन स्टोक्स और उनके सामने थे कार्लोस ब्रेथवेट जिनको अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में उस वक्त तक कोई नहीं जानता था। लेकिन अगली 4 गेंदों पर ब्रेथवेट ने जो कारनामा किया उसकी धमक पूरी दुनिया में सुनाई दी। सबको लग रहा था कि वेस्टइंडीज की टीम के लिए आखिरी ओवर में 19 रन बनाना नामुमकिन होगा, लेकिन ब्रेथवेट ने स्टोक्स की पहली 4 गेंदों पर 4 छक्के लगाकर वेस्टइंडीज को ऐतिहासिक जीत दिला दी। किसी को यकीन ही नहीं हो रहा था कि वेस्टइंडीज ने 19 रन महज 4 गेंद पर बना लिए हैं। लेकिन ब्रेथवेट ने अपने छक्कों से क्रिकेट के पन्नों पर अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा लिया। भारत बनाम वेस्टइंडीज, फ्लोरिडा florida यूएसए में क्रिकेट को प्रमोट करने के लिए बीसीसीआई और डब्ल्यूआईसीबी ने फ्लोरिडा में टी-20 मैच खेलने का फैसला किया। टी-20 सीरीज को देखने के लिए बड़ी संख्या में क्रिकेट फैंस स्टेडियम पहुंचे। सभी मैच को लेकर काफी उत्साहित दिखे। महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और ड्वेन ब्रावो जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को देखकर उनकी खुशी की सीमा नहीं रही। सीरीज का पहला ही मैच बेहद रोमांचक रहा। सदियों तक ये मैच अपने रोमांच के लिए याद रखा जाएगा। वेस्टइंडीज की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए आतिशी बल्लेबाजी की। कैरिबियाई खिलाड़ियों ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर धुनाई करते हुए 20 ओवरों में 245 रन बना डाले। वेस्टइंडीज को सलामी बल्लेबाजों जॉनसन चार्ल्स और एविन ल्युईस ने वेस्टइंडीज को शानदार शुरुआत देते हुए पहले विकेट के लिए 126 रनों की साझेदारी की। जॉनसन चार्ल्स 79 रन बनाकर आउट हुए, वहीं लुईस ने शतकीय पारी खेली। इसके बाद आंद्रे रसेल, किरोन पोलार्ड और कार्लोस ब्रेथवेट ने भी छोटी-छोटी आक्रामक पारियां खेलकर वेस्टइंडीज का स्कोर 20 ओवरों में 245 रन कर दिया। भारत को 246 रनों का विशाल लक्ष्य मिला। भारतीय टीम को ये मैच जीतने के लिए इतिहास बनाना पड़ता। क्योंकि इससे पहले किसी भी टीम ने इतना बड़ा लक्ष्य हासिल नहीं किया था। महेंद्र सिंह धोनी और उनकी टीम के लिए ये काम बिल्कुल भी आसान नहीं था, क्योंकि वेस्टइंडीज की टीम में ड्वेन ब्रावो, सुनील नारायण, सैमुअल बद्री जैसे विश्वस्तरीय गेंदबाज थे। भारतीय सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने इंडियन टीम को तूफानी शुरुआत दिलाई लेकिन पहले 5 ओवरों में भारतीय टीम ने अजिंक्य रहाणे और विराट कोहली का अहम विकेट गंवा दिया। स्कोरबोर्ड पर तब महज 48 रन टंगे थे। इसी समय रोहित शर्मा का साथ देने आए युवा बल्लेबाज के एल राहुल। दोनों ही बल्लेबाजों ने वेस्टइंडीज के गेंदबाजों पर काउंटर अटैक कर दिया। इन दोनों ने महज 7.1 ओवर में 89 रनों की साझेदारी कर डाली। पोलार्ड ने 62 रनों के स्कोर पर रोहित शर्मा को आउट कर खतरनाक दिख रही इस साझेदारी को तोड़ा। लेकिन दूसरी तरफ के एल राहुल कैरिबियाई गेंदबाजों की जमकर खबर ले रहे थे। वो मैदान के हर कोने में शॉट लगा रहे थे। इसी बीच राहुल ने महज 46 गेंदों पर अपना पहला टी-20 शतक लगाया। दूसरी तरफ से कप्तान धोनी ने भी मोर्चा संभाल लिया और टीम को एतिहासिक जीत के मुहाने पर ला खड़ा किया। भारतीय टीम को आखिरी ओवर में जीत के लिए सिर्फ 7 रन चाहिए थे और क्रीज पर थे कप्तान महेंद्र सिंह धोनी जिनको दुनिया का बेस्ट फिनिशर कहा जाता है। इस वजह से सब लोग भारतीय टीम की जीत को लेकर आश्वस्त थे। लेकिन मैच में ट्विस्ट अभी बाकी था। वेस्टइंडीज की तरफ से गेंदबाजी करने आए उनके सबसे अनुभवी खिलाड़ी ड्वेन ब्रावो ने अपनी पहली ही गेंद पर भारतीय कप्तान का विकेट लगभग निकाल ही लिया था लेकिन सैमुअल्स ने धोनी का कैच टपकाकर उन्हें जीवनदान दे दिया। दबाव सबके चेहरे पर साफ दिख रहा था, इसी वजह से सैमुअल्स से धोनी का कैच छूट गया। लेकिन भारतीय टीम पहली 5 गेंदों पर 5 रन ही बना सकी। आखिरी गेंद पर इंडियन टीम को जीत के लिए 2 रन बनाने थे और क्रीज पर थे खुद कप्तान धोनी। मैच की आखिरी और निर्णायक गेंद धोनी के बल्ले का किनारा लेकर हवा में तैर गई और इस बार थर्डमैन में खड़े सैमुअल्स ने कोई गलती नहीं को। महेंद्र सिंह धोनी का कैच लेने के साथ ही वेस्टइंडीज ने रोंगटे खड़े कर देने वाले इस मुकाबले में मेन इन ब्लू को 1 रनों से हरा दिया। के एल राहुल दूसरे छोर पर नाबाद 110 रनों पर खड़े रहे। 5. भारत बनाम बांग्लादेश, बैंगलूरू bengleru टी-20 वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड के हाथों पहला मैच हारने के बाद भारतीय टीम को टूर्नामेंट में बने रहने के लिए अपना अगला मैच जीतना बेहद जरूरी थी। भारत ने अपने अगले मैच में चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तानी टीम को आसानी से हरा दिया, लेकिन सेमीफाइनल की रेस में बने रहने के लिए उसे बांग्लादेश के खिलाफ अगला मैच जीतना बेहद जरूरी था। बांग्लादेश की टीम ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। भारत की शुरुआत बेहद खराब रही और टॉप आर्डर के बल्लेबाजों के फ्लाप प्रदर्शन के कारण भारतीय टीम मुश्किल में आ गई। लेकिन कुछ दिग्गज बल्लेबाजों शिखर धवन, विराट कोहली और सुरेश रैना की उपयोगी पारियों की मदद से भारतीय टीम 20 ओवरों में 146 रनों का सम्मानजनक स्कोर खड़ा करने में सफल रही। फ्रंटलाइन स्पिनर आर अश्विन ने मोहम्मद मिथुन को आउट करके भारतीय टीम को पहली सफलता दिलाई। लेकिन जीत अभी काफी दूर थी। लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने आखिर के कुछ ओवरों में अपनी कसी हुई गेंदबाजी से बांग्लादेशी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। नतीजा ये हुआ कि बांग्लादेश को आखिरी ओवर में जीत के लिए 11 रन चाहिए थे। टीम के अनुभवी बल्लेबाज महमदुल्लाह और मुशफिकुर रहीम क्रीज पर डटे हुए थे। भारतीय टीम की तरफ से आखिरी ओवर की जिम्मेदारी संभाली युवा खिलाड़ी हार्दिक पांड्या ने। लेकिन पांड्या की पहली ही 3 गेंदों पर बांग्लादेश ने 9 रन बना लिए। अब बांग्लादेश को जीत के लिए 3 गेंदों पर महज 2 रन चाहिए थे। सबको बांग्लादेश की जीत पक्की लगी। लेकिन यहीं से मैच का रुख पलट गया। पांड्या की चौथी गेंद को रहीम समझ नहीं पाए और दीप मिड विकेट में खड़े शिखर धवन को कैच धमा बैठे। इसके अगली ही गेंद पर महमदुल्लाह भी आउट हो गए। भारतीय टीम और फैंस की उम्मीदें एक बार फिर से जग गईं। सब अपनी-अपनी जगह पर खड़े हो गए। बांग्लादेश को अब जीत के लिए आखिरी गेंद पर 2 रन चाहिए थे और सामने बल्लेबाज थे शुवागता। लेकिन शुवागता पांड्या की आखिरी गेंद पर अपना बल्ला तक नहीं लगा सके फिर भी रन के लिए दौड़ पड़े इस उम्मीद में कि बाई के एक रन मिल जाएं और मैच सुपर ओवर तक खिंच जाए। लेकिन यहीं से कप्तान धोनी के सेंस ऑफ माइंड का कमाल देखने को मिला। धोनी आखिरी गेंद से पहले ही समझ गए थे कि बांग्लादेश के बल्लेबाज बाई रन के लिए दौड़ लगा सकते हैं, इसीलिए उन्होंने अपने दायें हाथ का दस्ताना पहले ही निकाल लिया। जैसे ही शुवागता और रहीम बाई रन के लिए दौड़े धोनी ने तेजी से दौड़कर रहीम के स्ट्राइकर एंड पर क्रीज में पहुंचने से पहले ही विकेट की गिल्लियां बिखेर दी और इस तरह से भारतीय टीम ने इस बेहद रोमांचक मुकाबले में 1 रनों से जीत हासिल की।

Edited by Staff Editor
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