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भारतीय बल्लेबाज़ों द्वारा सफल चेज़ करने वाली 6 बेहतरीन पारियां

30   //    06 Jul 2018, 12:05 IST
लक्ष्य का पीछा करना क्रिकेट में एक कला है जिसके लिए एक मजबूत मनोदशा, महत्वपूर्ण मूल्यांकन और गणनात्मक जोखिम की आवश्यकता होती है। बल्लेबाज को अपने काम में बेहद सतर्कता बरतनी पड़ती है, जिसमें विपक्ष के कमजोर गेंदबाजों पर अटैक करना और अच्छों को चुनौतीपूर्ण तरीके से खेलना होता है।

पारंपरिक रूप से दूसरी पारी में बल्लेबाजी को क्रिकेट में एक चुनौतीपूर्ण कार्य के रूप में देखा जाता है। विकेट हाथों में रखने के साथ आवश्यक दर को बनाए रखने का दबाव हमेशा बल्लेबाज के दिमाग में चलता है। स्कोरबोर्ड पर रन टांगने का काम बल्लेबाजों का होता है, अटैकिंग गेंदबाजों का काम और अधिक चुनौतीपूर्ण बनाता है। रनों का पीछा करने की स्थिति के लिए अच्छी समझ की आवश्यकता होती है, जैसे कि कब सावधानीपूर्वक दृष्टिकोण अपनाना है और कब गियर बदलना है।

टीम का दृष्टिकोण इसमें महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनकी पारी का भाग्य तय करता है। उच्चतम स्कोर का पीछा करते हुए बल्लेबाजों विशेष रूप से सलामी बल्लेबाजों को शुरु से ही आक्रामक शुरुआत करनी होती है और पावरप्ले ओवरों में अधिकांश रन बटोरने की जरूरत होती है। मुश्किल मध्यम स्कोर मैचों में विकेट हाथों में रखते हुए स्कोरबोर्ड आगे बढ़ाये रखने का काम मध्य क्रम का होता है।

करीबी चेज़ रोलर कोस्टर सवारी की तरह ही होते हैं, प्रशंसकों के दिल की धड़कन हर गेंद के साथ बढ़ती जाती है खिलाड़ियों पर मैच का दबाव बढ़ता जाता है। नतीजतन, हमने कई बड़े बल्लेबाजों सहित कई खिलाड़ियों को देखा है, जो पिछले कुछ वर्षों में भारी स्कोर के दबाव में फंस गए हैं। फिर भी ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जहां नए अनुभवहीन बल्लेबाजों ने दबाव को काबू किया है और अपनी नब्ज़ को थामते हुए टीम को जीत के पार पहुंचाया है।

पिछले दशक में एमएस धोनी, विराट कोहली, एबी डिविलियर्स, माइकल हसी जैसे खिलाड़ियों ने एक शांत दिमाग के साथ अवसरों को पकड़ते हुए और स्थिति पर काबू करते हुए लक्ष्य का पीछा करने की कला में महारत हासिल की है।हम भारतीय बल्लेबाजों द्वारा सबसे अच्छे चेज़ पर नजर डालते हैं, जिनमें से कुछ ने भारत को प्रतिष्ठित आईसीसी खिताब जीतने में मदद की-

#6 एमएस धोनी 183* बनाम श्रीलंका, 2005




 

दोनों पक्षों के बीच सात मैचों की द्विपक्षीय श्रृंखला का यह तीसरा वनडे मैच सवाई मान सिंह स्टेडियम में खेला गया था। श्रीलंका खेल में 0-2 से पीछे चल रहा था और अपने भाग्य को बदलने की कोशिश कर रहा था।

दिग्गज विकेटकीपर खिलाड़ी कुमार संगकारा ने शानदार 138 और उनके अनुभवी साथी महेला जयवर्धने ने 71 रनों की पारी खेली और श्रीलंका को 50 ओवरों में 298/4 रन पर पहुंचा दिया। 299 के लक्ष्य का पीछा करना कभी भी आसान नहीं होता है और पहले ओवर में सचिन तेंदुलकर के विकेट ने भारत के लिए चीजों को और भी खराब कर दिया।

हालांकि इसके बाद में मैदान पर मौजूद दर्शकों ने क्लास और पावर हिटिंग का एक नजारा देखा और ये आग किसी के नहीं बल्कि महेंद्र सिंह धोनी के बल्ले से निकली जिसने मैदान के चारों ओर रनों की बरसात करते हुए श्रीलंका के गेंदबाजों की जमकर खबर ली। धोनी ने गति और स्पिन पर बराबर नियंत्रण किया और सिर्फ 85 गेंदों में शतक लगाया।उन्होंने अगले 60 गेंदों में 83 रन जोड़ डाले और एकदिवसीय मैचों में विकेटकीपर के उच्चतम स्कोर के साथ, एडम गिलक्रिस्ट के 172 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

एमएस धोनी ने 145 गेंदों पर 183* रनों की अपनी पारी में 15 चौके और 10 छक्के लगाए, जो रनों का पीछा करते हुए किसी भारतीय का पहला व्यक्तिगत और विश्व स्तर पर दूसरा सबसे ज्यादा स्कोर है।
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