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क्या होता अगर 1996 में लाहौर में हुए विश्वकप फ़ाइनल को भारत जीत जाता ?

Modified 06 Sep 2016, 15:00 IST
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सन 1996 में जब बैंगलौर में हुए क्वार्टरफाइनल में भारत ने पाकिस्तान को हरा दिया तो पूरे देश में ऐसा जश्न मना मानो भारत ने विश्वकप का फाइनल जीत लिया हो। सभी लोग लाहौर में होने वाले फ़ाइनल की बात करने लगे थे। फैन्स तकरीबन ये बात भूल गये थे कि श्रीलंका के साथ सेमीफाइनल मैच भी होना था। इस विश्वकप में श्रीलंकाई खेमे की खास बात ये थी कि शुरूआती 15 ओवर में काफ़ी आक्रमक क्रिकेट खेलने की रणनीति से मैदान पर उतरते थे। भारत और श्रीलंका के बीच सेमीफाइनल शुरू हुआ और श्रीलंका के 35 रन में 3 खिलाड़ी पैवेलियन वापस लौट गये थे। श्रीलंकाई टीम ने अरविन्द डी सिल्वा की तेज अर्धशतकीय पारी के बदौलत रिकवरी करते हुए भारत के सामने जीत के लिए 251 रन का लक्ष्य रखा, इस दौरान उनके 8 बल्लेबाज़ आउट हुए। लाहौर में होने वाले फाइनल में खेलने के लिए भारतीय टीम बेहद शानदार तरीके से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ी लेकिन अचानक 98 के स्कोर पर भारत का पहला विकेट सचिन के रूप में गिरा तो टीम का स्कोर 35 ओवर तक 120 पर 8 हो गया। जिससे ईडेन गार्डेन के दर्शक नाराज़ हो गये। दर्शकों की अभद्रता के चलते ये मैच पूरा नहीं हो पाया। इसलिए श्रीलंका को इस मैच का विजयी घोषित कर दिया गया। पूरा देश इस हार के सदमे में समा गया। श्रीलंका ने इस विश्वकप को जीता और उन्होंने विश्व क्रिकेट में अपनी दस्तक देते हुए सबको जता दिया कि वह एक चैंपियन टीम हैं। लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा कि अगर भारत लाहौर में फाइनल में कप उठता तो क्या होता? क्रिकेट हो या दुनिया का कोई भी खेल हो उसमें ''अगर-मगर'' से कुछ भी हाथ नहीं आता है। सच तो सच है। हालाँकि स्पोर्ट्सकीड़ा ने बस एक कयास के तहत एक  प्रयास किया है। हम बताने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर भारत 1996 में चैंपियन बनता तो कौन सी चीजें सामने उभरकर आती? #1 विनोद काम्बली और सचिन तेंदुलकर भारतीय क्रिकेट के जय और वीरू बने रहते sachinkambli-1473064723-800 एक तस्वीर जो भारत और श्रीलंका के बीच हुए इडेन गार्डेन के सेमीफाइनल की याद को ताज़ा कर देती है, उस तस्वीर में श्रीलंका को जीत देने के बाद विनोद काम्बली रोते हुए नजर आते हैं। विनोद उस वक्त मैदान पर बल्लेबाज़ी कर रहे थे, जब दर्शकों ने उत्पात मचाना शुरू किया था। काम्बली भारत के लिए ये मैच जीतना चाहते थे। अगर ऐसा हो जाता तो काम्बली भारतीय क्रिकेट के पोस्टर बॉय बन जाते। उनका क्रिकेट करियर बहुत अच्छे मुकाम पर नहीं खत्म हुआ। वह टॉक शो में उलूल जुलूल बातों से सनसनी नहीं मचाते। साथ ही उनकी सचिन के साथ दोस्ती बरकरार रहती। ये दोनों आज भारतीय क्रिकेट के जय वीरू होते। सुभाष घई इन दोनों पर फिल्म बनाते जिसका शीर्षक इनके कोच रमाकांत आचरेकर बताते- मेरे दो अनमोल रत्न-एक है तेंदुलकर एक है काम्बली।
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Published 06 Sep 2016, 15:00 IST
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